सभ्य मोहल्ला और एक बदचलन की मौत

अजय प्रकाश: वह तो मुसलमान ही था जो इन बच्चों का पेट पाल रहा था, इससे पहले पंजाबी से भी इसीलिए शादी की क्योंकि बिहारी कुछ करता ही नहीं था, सिवाय बच्चा पैदा करने के… : परसों की बात है। दिन के करीब दस बज रहे थे। दुबारा लौट आयी ठंड के बाद मेरी हिम्मत ठंडे पानी से नहाने की नहीं हुई तो सोचा क्यों न धूप में खड़े होकर थोड़ा गरम हो लिया जाये। धूप की गरमी से अगर हिम्मत बंध गयी तो नहा लूंगा, नहीं तो कंपनियों ने महकने का इंतजाम तो कर ही रखा है।

अग्निवेश जैसे मध्यस्थ सत्ता को बहुत भाते हैं

[caption id="attachment_18048" align="alignleft" width="116"]स्वामी अग्निवेशस्वामी अग्निवेश[/caption]: याद कीजिये, स्वामी अग्निवेश बाल मज़दूरी के सवाल पर भी काफ़ी आन्दोलन कर चुके हैं और बाल मज़दूरी के विरोध के लाभ भी उठा चुके हैं जबकि बाल मज़दूरी के आंकड़े लगातार बढ़ते गये : जनज्वार ब्लॉग पर हाल में बिहार की घटनाओं पर टिप्पणियां और साई बाबा का जवाब और फिर स्वामी अग्निवेश के स्वघोषित शान्ति दूत की भूमिका में उतरने के बारे में लिखी गयी टिप्पणी देखी.

धोखेबाज हैं स्वामी अग्निवेश!

स्वामी अग्निवेश: शांति दूत की जगह चुनावी एजेंट बने : निजी महत्वाकांक्षाओं के लिए शांति-न्याय मार्च के 60 सदस्यों के साथ धोखा किया : छत्तीसगढ़ के चिंतलनार क्षेत्र में माओवादियों और पुलिस के बीच संघर्ष में 6 अप्रैल को अर्धसैनिक बलों के 76 जवान मारे गये थे। माओवादियों के हाथों सरकार के सबसे काबिल और सुसज्जित सुरक्षा बलों का इतनी बड़ी संख्या में मारा जाना जहां राज्य मशीनरी के लिए एक नयी चुनौती बना, वहीं ऐसी स्थिति न चाहने वालों के लिए सरोकार का गंभीर प्रश्न। सरोकार की इसी चाहत से शांति चाहने वालों ने एक समूह बनाकर चिंतलनार वारदात के ठीक एक महीने बाद 5 से 8 मई के बीच रायपुर से दंतेवाड़ा तक एक शांतियात्रा की। यात्रा का असर रहा और सरकार एवं माओवादियों से बातचीत की एक सुगबुगाहट भी शुरू हुई।