जनार्दन को जूता दिखाने वाले शिक्षक सुनील कुमार की असली जिंदगी

[caption id="attachment_20527" align="alignleft" width="89"]योगेंद्र सिंह शेखावतयोगेंद्र सिंह शेखावत[/caption]तारीख 6 जून, 2011. आज जब ढलती दोपहर को मैं देश के तेजी से बदलते घटनाक्रम पर पल-पल जानकारी लेते हुए न्यूज़ पर पकड़ बनाये हुए था तो उस समय जनमर्दन द्विवेदी की प्रेस कांफ्रेंस का टेलीकास्ट किया जा रहा था। अचानक एक शख्स अपना जूता लेते हुए द्विवेदी पर चढ़ाई करता हुआ दिखाई पड़ा।

कांग्रेस कवर करने वाले इन पत्रकारों पर थू थू करिए

हद है. कांग्रेस कवर करने वाले कई पत्रकारों ने उस युवक को जमकर पीटा जिसने भ्रष्टाचार में आकंठ डूबी कांग्रेस पार्टी के नेता जनार्दन द्विवेदी को जूता दिखाया. वो युवक चाहता तो द्विवेदी को जूतिया सकता था पर उसने केवल जूता दिखाकर अपना विरोध प्रदर्शित कर दिया. और उसने वह काम किया है जो इस देश का हर आदमी करना चाहता है पर कई वजहों से लोग अभी कर नहीं पा रहे हैं.

पत्रकार ने कांग्रेस महासचिव जनार्दन द्विवेदी को जूतियाने की कोशिश की

बाबा रामदेव और केन्द्र सरकार के बीच मचे घमासान के बीच नया घटनाक्रम सामने आया है.  कांग्रेस मुख्यालय में रामदेव के आरोपों पर मीडियाकर्मियों को जवाब दे रहे कांग्रेस के महासचिव जनार्दन द्विवेदी को एक पत्रकार ने जूता मारने की कोशिश की. हालांकि सुरक्षाकर्मियों ने उसे पकड़ लिया और जमकर धुनाई की. पत्रकार राजस्‍थान का रहने वाला है.

वे पीटते रहे, थक गये, मैं बेहोश हो गया

: इंटरव्यू (पार्ट-एक) : मुंतज़र अल ज़ैदी (इराकी पत्रकार) : बुश पर जूता फेंकना भी “पीसफुल” था… : वे बम बरसाते हैं, तब भी कुछ नहीं होता, हम हथियार पकड़ते हैं तो अपराधी हो जाते हैं : गांधी ज़िंदा हैं, ज़िंदगी की तरह :

जरनैल के जूते के बाद उत्सव का चाकू

न्याय में देरी और पीड़ितों को समय से इंसाफ न मिलने पर कानून-व्यवस्था को हाथ में लेने का सिलसिला बढ़ा : जब आक्रोश चरम पर जाता है तो विस्फोट होता है. ऐसी ही एक विस्फोट आज चंडीगढ़ में हुआ. मीडिया वालों के बीच में खड़े और खुद को फोटोग्राफर दिखा रहे एक युवक उत्सव शर्मा ने हरियाणा के पूर्व पुलिस महानिदेशक एसपीएस राठौर पर चाकू से हमला कर दिया. उनके चेहरे पर तीन वार मारे. चेहरे से खून टपकने लगा. राठौर रुचिका गिरहोत्रा छेड़छाड़ मामले में अपनी अपील पर सुनवाई में शामिल होने के लिए अदालत आए थे. जिस युवक उत्सव शर्मा ने हमला किया है, वह खुद को पत्रकार के रूप में पेश करते हुए राठौर की तस्वीरें लेने की कोशिश कर रहा था. हमलावर उत्सव शर्मा अहमदाबाद से फिल्म निर्माण का प्रशिक्षण ले रहा है. उसने राठौर के गाल पर तो चाकू मारा ही, दाएं हाथ से दूसरे गाल पर घूंसे भी मारे. 

जागरण ने एकतरफा फैसला दिया

[caption id="attachment_15334" align="alignleft"](खबर पढ़ने के लिए तस्वीर पर क्लिक करें)[/caption]मैं जरनैल सिंह को जानता हूं। जो कुछ उन्होंने किया, बेशक गलत था पर जिस प्रबंधन ने उन्हें दूध की मक्खी की तरह निकाल फेंका, उसे कहीं से भी उचित नहीं ठहराया जा सकता। दैनिक जागरण प्रबंधन ने जहां तक संभव था, जरनैल का इस्तेमाल किया। जरनैल को याद होगा, जब वह जालंधर आए थे, विधानसभा चुनाव की कवरेज में। अकालियों के समर्थन में तैयार स्टोरी को किस दबाव में अकालियों के खिलाफ किया गया था, यह मैं भी जानता हूं। और जरनैल तो खैर भुक्तभोगी हैं ही। हम जिस पत्रकारिता में इन दिनों हैं, वहां फेस-वैल्यू सबसे अहम है। चिदंबरम की फेस-वैल्यू कांग्रेस आलाकमान ज्यादा मानता है। जब जरनैल ने चिदंबरम की ओर जूता उछाला था तो सन्न मैं भी रह गया था। पर, आप उसके बैकग्राउंड में जाकर देखें कि उसने ऐसा क्यों कर किया। बिना कारण जाने जरनैल को जो सजा मिली, वह उसके साथ ज्यादती है। सरकार ने तो कुछ नहीं किया, जागरण ने जरूर एकतरफा फैसला दे दिया। मैं नहीं मानता कि पत्रकारिता में अब शुचिता बची है। कहीं है भी, तो मैं नहीं देख पाता। संभवतः नेत्र रहते मैं अंधा हूं। पर, होती तो कहीं तो दिखती।