दरवाज़ा खोला तो सामने गोविंदाचार्य थे

अमिताभजीआज जब लोक सत्ता अभियान के सुरेन्द्र बिष्ट हमारे लखनऊ स्थित घर आये तो मुझे यह नहीं मालूम था कि उनके साथ कोई और भी खास व्यक्ति होगा. इसीलिए जब मैंने घंटी बजने पर घर का दरवाज़ा खोला तो सामने अचानक गोविन्दाचार्य जी को देख कर दंग रह गया. गोविन्दाचार्य जी आज एक किम्वदंती हैं इस बात से कोई इनकार नहीं करेगा. उनके राजनीति और सामाजिक कार्यों में योगदान के विषय में भी हम बहुत कुछ जानते हैं और साथ ही उनके तमाम राजनितिक झडपों को भी. यह भी हम जानते हैं कि अब वे अपने तरीके से देश में एक नया अलख जगाने में लगे हुए हैं.