बिहार ही नहीं चार अन्‍य प्रदेशों में भी फैला है हिंदुस्‍तान का अवैध प्रकाशन और विज्ञापन फर्जीवाड़ा

मुंगेर। भारत में प्रजांतत्र है। भारतीय संविधान में कानून की नजर में सभी समान हैं, परन्तु संविधान की यह अवधारणा केवल कानून की कितबों तक ही सीमित है। उपलब्ध सरकारी दस्तावेज उजागर करते हैं कि मेसर्स हिन्दुस्तान टाइम्स लिमिटेड की प्रमुख शोभना भरतीया की कारपोरेट हस्ती के कारण केन्द्र सरकार का प्रेस रजिस्ट्रार और दृष्य एवं प्रचार निदेशालय (डीएवीपी) के कार्यालय के साथ-साथ बिहार का सूचना एवं जनसम्पर्क निदेशालय का कार्यालय नपुंसक बनकर काम कर रहा है।

हिंदुस्‍तान के अवैध प्रकाशन मामले में सूचना आयोग के आदेश को प्रेस रजिस्‍ट्रार ने कूड़ेदान में डाला

मुंगेर। देश में मजबूत लोकपाल कानून क्यों जरूरी है और समाजवादी नेता अन्ना हजारे का आंदोलन देश की आजादी की दूसरी लड़ाई कैसे है, साक्ष्यों पर आधारित प्रस्तुत घटनाएं प्रमाणित करती हैं। केन्द्र सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय। वेस्ट ब्लाक-8, विंग नं-2, आरकेपुरम, नई दिल्ली ने केस नं.- सीआईसी/ओके/ए/2008/885/एडी में केन्द्रीय सूचना आयोग की सूचना आयुक्त माननीया अन्नपूर्णा दीक्षित के 8 दिसंबर, 2008 के आदेश को विगत दो वर्ष सात माह से कूड़दान में डाल रखा है।