दुख-दर्द मुफ्त में दारू-लड़की मिल जाए, यही इनका संपादकीय देरी के लिए माफी। वादे के अनुसार, 'पत्रकारिता के पापी' शीर्षक से एक महिला पत्रकार द्वारा भेजे गए संस्मरण को यहां हूबहू प्रकाशित किया... bhadas4media.comMarch 23, 2009