मुफ्त में दारू-लड़की मिल जाए, यही इनका संपादकीय

 देरी के लिए माफी। वादे के अनुसार, ‘पत्रकारिता के पापी‘ शीर्षक से एक महिला पत्रकार द्वारा भेजे गए संस्मरण को यहां हूबहू प्रकाशित किया जा रहा है। इसमें कई जगह गालियां हैं और कुछ एडल्ट कंटेंट भी। इसे संपादित नहीं किया गया है ताकि आप इस महिला पत्रकार की भावना, पीड़ा, मजबूरी, दुख, हालात को संपूर्णता के साथ समझ सकें। उन्होंने अपना नाम आर. बिभा प्रकाशित करने को कहा है। मेल आईडी देने से मना किया है। संस्मरण के आगे का पार्ट लेखिका ने अभी भेजा नहीं है। -संपादक