नौकरशाहों को डा. आनंद कुमार से सबक लेने की जरूरत

देहरादून। बीते दिनों रामदेव के सत्याग्रह, लोकपाल विधेयक पर बबाल, च्यूइंग गम उर्फ जासूसी विवाद और मर्डोक के फोन टेपिंग प्रकरण के बीच एक सुखद खबर सुनने को मिली, जिसकी आवाज मद्धम ही सही, पर कुंभकर्णी नींद सोए राजनेताओं और ‘सिस्टम’ को अपने मन मुताबिक ढालने में सिद्धहस्त नौकरशाहों की नींद खोलने के लिए काफी थी। लेकिन ग्लैमर का तड़का न होने के चलते इस खबर को मीडिया में खास तवज्जो नहीं दी गई।