साहित्य लोक कवि ने सम्मान दिलाने को कहा तो पत्रकार ने डांसर की डिमांड की : उपन्यास - लोक कवि अब गाते नहीं (3) : कभी कभार तो अजब हो जाता। क्या था कि लोक कवि की टीम में... bhadas4media.comMarch 8, 2011
दुख-दर्द चले गए बालेश्वर [caption id="attachment_19156" align="alignleft" width="107"]स्वर्गीय बालेश्वर[/caption]: स्मृति-शेष : सुधि बिसरवले बा हमार पिया निरमोहिया बनि के : अवधी की धरती पर भोजपुरी में झंडा गाड़... bhadas4media.comJanuary 9, 2011
साहित्य क्या! जो टॉयलेट में घुसा था, वो पत्रकार था? : मुजरिम चांद (अंतिम भाग) : डाक बंगले से थाने की दूरी ज्यादा नहीं थी। कोई 5-7 मिनट में पुलिस जीप थाने पहुंच गई।... bhadas4media.comAugust 5, 2010
साहित्य का बे तुम्हीं वह प्रेस वाला है? 'मुजरिम चांद' नामक यह कहानी दस साल पहले जब 'कथादेश' पत्रिका में छपी थी तब पत्रकारों में खूब चर्चित हुई थी. इस कहानी की... bhadas4media.comJuly 31, 2010