अखबार अपने कंटेंट पर बहस नहीं चाहते

पिछले दिनों महेश्वर में राष्ट्रीय मीडिया संवाद का आयोजन किया गया जिसमें 80 से ज्यादा पत्रकार शामिल हुए. इस संवाद में जो आधार वक्तव्य पेश किया गया, वह इस प्रकार है : भूमंडलीकरण की बीस सालों की प्रक्रिया के बाद अब विकास के तय मानकों के बीच से गरीबी, लाचारी, बेबसी का चेहरा साफ नजर आता है। तमाम जाले साफ हुए हैं। विकास की पक्षधरता सबके हित में समान रूप से नहीं है। आंकड़ों के खेल कुछ और तस्वीरें बयां करते हैं, पर सच्चाई कुछ और है।