अन्ना और मीडिया से आतंकित सत्यव्रत चतुर्वेदी व रमाकांत गोस्वामी का भाषण सुनकर उन्हें सुनाए बिना न रह सका

: आपको पता है कि …लम्हों ने खता की, सदियों ने सजा पाई.. लिखने वाले शायर का नाम? : जब आप सम्मान लेने बुलाए गएं हों तो मौका-ए-वारदात पर पूरे सम्मान के साथ मौजूद रहना चाहिए. किसी को टोकना-टाकना नहीं चाहिए. और, सम्मान पकड़कर प्लास्टिक वाली मुस्कान फेंकते हुए मनेमन मुनक्का मनेमन छुहारा होते हुए अपनी सीट पर लौट आना चाहिए.

दा.दा. चतुर्वेदीजी, जिन्होंने कविता को जिया और फिर अनंत की कविता हो गए

[caption id="attachment_20962" align="alignleft" width="151"]दा. दा. उर्फ दामोदर दास चतुर्वेदीदा. दा. उर्फ दामोदर दास चतुर्वेदी[/caption]: जयंती पर स्मरण : मां भारती के अनन्य सेवक, मूक साहित्यानुरागी, बहुमुखी प्रतिभा के धनी, स्वतंत्रता सेनानी, मनीषी दा. दा. चतुर्वेदी (दामोदर दास चतुर्वेदी) के व्यक्तित्व एवं कृतित्व के इतने आयाम हैं कि उन पर कुछ लिखना या कहने में बड़ी दुविधा होती है। सबसे बड़ी दुविधा तो इस बात से होती है कि उनके जीवन के किस आयाम से बात शुरू की जाए।

मुर्दों के रखरखाव का ऐसा जलवा!

पंडित सुरेश नीरव: यात्रा-संस्मरण : इजिप्त की सैर : पिरामिडों के देश में : कब्रों की ऐसी शान-शौकत देखकर हर शरीफ आदमी का मरने को मन ललचा जाता होगा, ऐसा मेरा मानना है, हजारों साल से सुरक्षित रखी ममियां दर्शकों को हतप्रभ करती हैं, इन निर्जीव शरीरों को देखकर प्रश्न उछलता है कि अपना सामान छोड़ कर कहां चले गए हैं ये लोग, क्या ये आएंगे अपना सामान लेने? :

रपट कूकर कॉलोनी की

मैं नगर के सबसे पॉश इलाके में रहता हूं। चाय के उत्पादन के लिए जैसे दार्जिलिंग और बरसात के मामले में चेरापूंजी की प्रतिष्ठा है, ठीक वैसे ही कुत्तों के मामले में हमारी कॉलौनी का भी अखिल भारतीय रुतबा है। एक-से-एक उच्चवर्णी और कुलीन गोत्रों के कुत्ते इस कूकर कॉलौनी में निवास करते हैं। इसलिए ही इस कुत्ता बाहुल्य भूखंड को सभ्यसमाज में पॉश कॉलौनी के नाम से जाना जाता है।

देश, दीवाली और उल्लू

पंडित सुरेश नीरवअपनी लगन में मगन नोटाभिलाषी नर-नारियों का नगर निगम स्तर का निर्गुट सम्मेलन नाना प्रकार के नयनाभिराम दृश्यों से नगर की सुंदरता को संवार रहा है। हर दुकानदार नई जगरमगर झालरें लगाकर पुरानी उतार रहा है। एक सिपाही दिहाड़ी बसूली के लिए सब्जीवाले को मार रहा है और पीछे से पाकिटमार उस सिपाही की पाकेट मार रहा है। सारे नगर में उत्सव का वातावरण बना हुआ है। अपने से हारे और औरत के मारे खोई हुई जवानी का इश्तहार बने हुए दफ्तरी मर्द फेस्टीवल लोन का आक्सीजन सिलेंडर पीठ से बांधे हुए मंहगाई के हिमालय पर चढ़ने को तैयार हैं। गठियाए पांव जो अभी कब्र में लटकने-भटकने को थो सुपरफास्ट स्पीड से ब्यूटीपार्लरों की ओर बढ़ रहे हैं। जर्जर बिल्डिंगों और खटारा स्त्रियों का युद्ध स्तर पर रंग-रोगन का कार्यक्रम दिन-रात चल रहा है।