कप्तान ने पूछा- तेरे पास अथारिटी क्या है!

पंकज दीक्षितऐसे अफसरों को कार्यमुक्त कर देना चाहिए : यशवंत जी, मुझे समझ में नहीं आ रहा है कि यूपी के अफसरों को क्या हो गया है. हमारी कमजोरी का फायदा उठाने का प्रयास करते हैं या फिर उन्हें संविधान की समझ नहीं है. यदि कारण पहला है तो ये उनकी होशियारी है. अगर जनसेवा के लिए नियुक्त किए गए आईएएस / आईपीएस अधिकारियों ने कर्तव्य और जिम्मेदारियों को ताक पर रख दिया है तो दुर्भाग्यपूर्ण है. अगर उन्हें सविधान की ही समझ नहीं है तो उन्हें अखिल भारतीय सेवा से मुक्त कर दिया जाना चाहिए. ये लोग भारत में जनता के पैसों से अपना घर चला रहे हैं और संविधान की अनदेखी कर जनता को ही सताते हैं. एक दिन जिले के पुलिस कप्तान ने मुझसे खबर के बारे में वर्ज़न लेते समय पूछा कि मेरे पार अथॉरिटी क्या है?

पंकज के प्रयोग और जज्बे को जानें

[caption id="attachment_15618" align="alignleft"]पंकज दीक्षितपंकज दीक्षित[/caption]बाजार में कैमरा सस्ता बिकने लगा, डेस्क पर सस्ता माल चलने लगा,  तब मैंने भी दूसरा रास्ता खोजने का सोच लिया : लखनऊ-दिल्ली में बैठे लोग ग्रामीण पत्रकारों के बारे में सीमित सोच रखते हैं :  एक्सक्लूसिव रिपोर्ट ईटीवी को दी मगर डेस्क वालों ने अपने नाम से चलवा ली :  जी न्यूज की एचआर वाइस प्रेसीडेंट बोली थीं कि स्ट्रिन्गर बड़े-बड़े गुल खिलाते हैं, इनके पैसे बढाने की क्या जरूरत, यह सुन बड़ा गुस्सा आया था : तुम 500 में कचड़ा खरीदो, अपना माल महंगा बिकेगा, सो बिक रहा है : मेरी खबर के पाठक गांव के हरिया-रामकली हैं : रामसरन की बेटी की शादी के लिए 20000 रुपये जेएनआई के प्रयास से मिले :  50 से अधिक प्रधानों के खि़लाफ गबन का मुकदमा लिखाया : 

एक स्ट्रिंगर का इस्तीफानामा

((जी न्यूज और जी यूपी के यूपी के फर्रूखाबाद जिले के रिपोर्टर / स्ट्रिंगर पंकज दीक्षित ने भरे मन से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने 7 अप्रैल को इस्तीफा देने संबंधी एक लंबा-चौड़ा पत्र जी न्यूज के एचआर विभाग को भेजा। यह पत्र भड़ास4मीडिया के भी हाथ लगा है। पंकज द्वारा भेजे गए इस्तीफे को पढ़ने के बाद चैनल के अंदर चलने वाली कहानी और एक जिनुइन पत्रकार की पीड़ा को समझा जा सकता है। -संपादक))