राजेश बादल – राजेंद्र तिवारी से सीख सको तो सीखो

: दोनों ने मुश्किल दिनों में हिम्मत नहीं छोड़ा, हार नहीं मानी, क्रिएटिव बने रहे : राजेश बादल राज्यसभा टीवी में वरिष्ठ पद पर पहुंचे तो राजेंद्र तिवारी प्रभात खबर को देंगे अपनी सेवाएं : इसलिए भी बधाई दें क्योंकि इन दोनों ने बीते महीनों में अपने करियर के सबसे मुश्किल दिन देखें हैं और आज वे फिर से नई पारी शुरू कर चुके हैं. एक ऐसी पारी जिसमें दोनों ने नई ऊंचाई हासिल की है. राजेंद्र तिवारी प्रभात खबर के साथ जुड़ गए हैं, लेकिन अप्रत्यक्ष तरीके से. उन्होंने विनिंग स्टोक्स नामक कंपनी ज्वाइन की है जो अपनी सेवाएं प्रभात खबर समेत कई अखबारों को मुहैया कराती है. यह मीडिया कंसल्टेंसी कंपनी है. इसके संस्थापक विप्लव बनर्जी हैं जो कई अखबारों में काम कर चुके हैं. इस कंपनी के न्यूज पार्ट, कंटेंट पार्ट के सर्वेसर्वा बनाए गए हैं राजेंद्र तिवारी. कंपनी की तरफ से राजेंद्र तिवारी प्रभात खबर, रांची में जाकर कई मोर्चों पर काम करने लगे हैं. सोच सकते हैं कि जो शख्स हिंदुस्तान, रांची में शीर्ष पद पर रहा हो और वह उसी रांची शहर में प्रभात खबर जैसे अखबार से जुड़ जाए तो इसका जबर्दस्त फायदा प्रभात खबर को मिलेगा. न्यूज रूम ट्रेनिंग से लेकर विरोधी अखबारों से उम्दा कंटेंट देने के गुर राजेंद्र तिवारी प्रभात खबर के लोगों को सिखाएंगे. तो राजेंद्र तिवारी ने प्रभात खबर ज्वाइन किया है, लेकिन अलग तरीके से, अलग कंपनी के जरिए.

चंदन शर्मा बने प्रभात खबर, भागलपुर के आरई

प्रभात खबर समूह ने अपने नये शुरू हो रहे भागलपुर यूनिट के लिये चंदन शर्मा को स्थानीय संपादक पद की जिम्मेदारी दी है. चंदन शर्मा फिलहाल प्रभात खबर, रांची में ही सेंट्रल डेस्क के इंचार्ज के रूप में कार्यरत थे. चंदन इससे पहले दैनिक भास्कर, राजस्थान पत्रिका, अमर उजाला जैसे संस्थानों में काम कर चुके हैं.

इसे कहते हैं भरोसा

एसपी ने प्रभात खबर की टीम के साथ बैठे बीडीओ को जबरन कस्टडी में लिया तो डरकर रोने लगे थे बीडीओ : झारखंड में माओवादियों ने बीडीओ को रिहा करने के लिए मध्यस्थ के रूप में प्रभात खबर अखबार पर भरोसा जताया. माओवादियों ने प्रभात खबर के झारखंड हेड अनुज कुमार सिन्हा के पास संदेश भिजवाया कि वे सिर्फ प्रभात खबर की टीम के सामने ही बीडीओ को रिहा कर सकते हैं क्योंकि उन्हें प्रभात खबर और उसके लोगों पर भरोसा है. माओवादियों का संदेश स्पष्ट था- बीडीओ प्रशांत को वे रिहा कर सकते हैं, लेकिन सिर्फ प्रभात खबर की टीम के समक्ष.  अनुज कुमार सिन्हा ने यह संदेश सबसे पहले अपने प्रधान संपादक हरिवंश तक पहुंचाया.