प्रभाष जोशी के जन्मदिन पर एक साथी का जाना

: जनसत्ता के लोग दोतरफा आलोचनाओं के शिकार होते रहे हैं पर ऐसे किसी आयोजन में उन्हें पूछा भी नहीं जाता जिसकी वजह जनसत्ता अखबार और प्रभाष जोशी हों : इस बार प्रभाष जोशी के जन्मदिन पर जनसत्ता से शुरू से जुड़े रहे वरिष्ठ पत्रकार सतीश पेडणेकर को विदाई दी गई। प्रभाष जोशी को याद किया गया और एक ऐसे साथी को विदा किया गया जो शुरू से प्रभाष जी की टीम का हिस्सा रहे।

प्रभाषजी के जन्मदिन पर इंदौर में उड़ाया गया उन्हीं का मजाक!

यह शुद्ध शुद्ध प्रभाष जोशी का मजाक उड़ाने जैसा है. और मजाक उड़ाने का बंदोबस्त किया प्रभाष जोशी पर बने न्यास ने. इंदौर प्रेस क्लब और प्रभाष परंपरा न्यास के तत्वावधान में दो दिनी आयोजन प्रभाष जोशी के जन्मदिन के बहाने और भाषाई पत्रकारिता महोत्सव के नाम पर इंदौर में चल रहा है. इस आयोजन में जो लोग मंच पर बिठाए गए उनमें राजीव शुक्ला भी हैं.

सात काम सौंप गए प्रभाष जी

प्रभाष जी से मेरा पहला परिचय जेपी आंदोलन के समय में उस समय हुआ जब वे रामनाथ गोयनका के साथ जयप्रकाश नारायण से मिलने आए थे। उस समय की वह छोटी सी मुलाकात धीरे-धीरे प्रगाढ़ संबंध में बदल गई। बोफोर्स मुद्दे को लेकर जब पूरे देश में कांग्रेस के खिलाफ आवाज उठने लगी तब उन्होंने मुझे भारतीय जनता पार्टी में भेजने के लिए संघ के अधिकारियों से बात की। उनका मानना था कि जेपी आंदोलन के दौरान जो ताकतें कांग्रेस के खिलाफ सक्रिय थीं, उन्हें फिर से एकजुट करने में मेरी महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। वीपी सिंह की सरकार बनने के पहले और बाद में भी मेरा उनसे लगातार संपर्क बना रहा।