अतुलजी को इतनी जल्‍दी नहीं बुलाना चाहिए था

मैंने अमर उजाला में करीब साढ़े चार साल काम किया। अमर उजाला में ही मैंने इंटर्नशिप की। प्रशिक्षु बना और उसके बाद सब एडिटर। अमर उजाला से मैनें बहुत कुछ सीखा है। सन 2005 से 2010 का वह मेरा सफर मुझे अच्छी तरह याद है। मैं अतुल जी से कभी मिला तो नहीं लेकिन अमर उजाला लखनऊ यूनिट में उनके कार्य और व्यवहार की छवि प्रतिदिन कर्मचारियों में दिखाई देती थी। उनके रहते किसी भी कर्मचारी को यह भय नहीं था कि कभी उसे अखबार से निकाला भी जा सकता है। हर कर्मचारी बड़े ही आत्मविश्‍वास के साथ काम करता था।