छत्‍तीसगढ़ मीडिया की पहचान रमेश नय्यर जी

पंकजसमाचार माध्यमों खास कर इलेक्ट्रोनिक मीडिया में आपको किसी शहर या संस्थान को स्थापित करने के लिए उसकी पहचान वाले किसी विजुअल को दिखाना होता है. जैसे अगर बात भारत की हो तो चैनलों में सामान्यतः इंडिया गेट को दिखाया जाता है. किसी शहर को दिखाना हो तो वहां के रेलवे स्टेशन को दिखा कर आप उस शहर के बारे में बता सकते हैं. इसी तरह बात अगर छत्तीसगढ़ के मीडिया की की जाय तो निश्चित ही लगभग पांच दशक से प्रदेश के मीडिया में अपना सम्मानित जगह रखने वाले वरिष्टतम पत्रकार रमेश नय्यर को रखा जा सकता है. छोटे कद के बड़े आदमी नय्यर जी से मिलना ना केवल पत्रकारिता बल्कि सौजन्यता सीखना भी है. सन 1965 में शिक्षक की सरकारी एवं अपेक्षाकृत सुरक्षित नौकरी को छोड़ कर उस समय के पत्रकारिता के कंटकाकीर्ण मार्ग का अवलंबन करने वाले नय्यर जी आज तो इस विधा के चलते-फिरते पाठशाला के रूप में ही जाने जाते हैं.

अब तो सारे संपादक एक ही जैसे दिखते हैं

[caption id="attachment_18332" align="alignleft" width="173"]रमेश नैयररमेश नैयर[/caption]: इंटरव्यू : रमेश नैयर (छत्तीसगढ़ के जाने-माने और वरिष्ठ पत्रकार) : भाग-दो : ”हमने स्पेस बेच दिया… अपना ईमान बेच दिया… अपने सारे मूल्यों को हम विस्मृत कर गये… तो अपनी आत्मा को आदमी पहले मारता है, तब वो बेचता है अपनी अस्मत को… उर्दू का एक शेर है, ”कुछ भी कहिये जमीर कांप तो जाता होगा / वो गुनाह के पहले हो या गुनाह के बाद”…

अब रिपोर्टर्स नहीं, शार्प शूटर्स चाहिए : रमेश नैयर

[caption id="attachment_18309" align="alignnone" width="505"]वरिष्ठ पत्रकार रमेश नैयरवरिष्ठ पत्रकार रमेश नैयर[/caption]

: इंटरव्यू : रमेश नैयर (छत्तीसगढ़ के जाने-माने और वरिष्ठ पत्रकार) : भाग-एक : रायपुर में नैयर साहब का मतलब सिर्फ रमेश नैयर होता है। कुलदीप नैयर जी में लगे नैयर नाम की समानता की वजह से यहां धोखे की कहीं कोई गुजांइश नहीं होती। रमेश नैयर साहब छत्तीसगढ़ में पत्रकारिता के स्कूल की तरह रहे हैं।