धर्मवीर भारती दफ़्‍तर में ‘डिवाइड एंड रूल’ में विश्‍वास रखते थे

‘धर्मयुग’ का माहौल अत्‍यन्‍त सात्‍विक था। संपादकीय विभाग ऊपर से नीचे तक शाकाहारी था। ‘धर्मयुग’ का चपरासी तक बीड़ी नहीं पीता था। सिगरेट-शराब तो दूर, कोई पान तक नहीं खाता था। कई बार तो एहसास होता यह दफ़्‍तर नहीं कोई जैन धर्मशाला है, जहाँ कायदे-कानून का बड़ा कड़ाई से पालन होता था। दफ़्‍तर में मुफ्‍त की चाय मिलती थी, जिसे लोग बड़े चाव से पीते थे।

शब्द-शब्द सहेजी गयीं संवेदनाएं, बयां हुआ सच

: महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय की तरफ से इलाहाबाद में कवि गोष्ठी आयोजित : हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के इलाहाबाद स्थित क्षेत्रीय विस्तार केंद्र में इलाहाबाद शहर के ख्यातिनाम शब्दशिल्पी जब एकत्र हुए तो इस अवसर पर सच बयाँ हुआ और शब्द-शब्द सहेजी गयीं संवेदनाएं। इस अनूठे कविता पाठ के आयोजन में रचनाकारों ने अपनी कविताओं के जरिए समय और समाज के सच सहित जिंदगी की कड़ुआहटों और खिलखिलाहटों के अर्थ बयां किए।