पत्रकारों के एनकाउंटर पर अमादा सीजी पुलिस!

छत्तीसगढ़ में पुलिस बेखौफ हो चली है.. कभी खुलेआम पुलिस अपने मातहत अधिकारियों के सामने गार्ड को लात-घूंसे से मारती हैं.. तो कभी बीच सड़क पर पत्रकारों पर अपनी दबंगई दिखाती है.. नक्सल मोर्चे पर छत्तीसगढ़ पुलिस की फर्जी मुठभे़ड़ की कई दास्तां जगजाहिर है.. लेकिन अभी तक बेकसूर आदिवासियों को फर्जी मुठभेड़ में मार गिराने वाली छत्तीसगढ़ पुलिस के निशाने पर आम लोगों की आवाज उठाने वाले पत्रकार हैं.

मौत के खतरे को उठाकर घटनास्थल पर पहुंची साधना की टीम

: नक्सली गढ़ से साधना न्यूज की लाइव तस्वीरें : समुद्र तल से 2500 फीट पर पहुँची साधना न्यूज की ओवी : नक्सलियों के दुर्गम इलाके गरियाबंद के आमामोरा की पहाड़ियों पर साधना न्यूज : साधना न्यूज ने छत्तीसगढ़ के दुर्गम नक्सली क्षेत्र गरियाबंद के आमामोरा के पहाड़ियों से लाइव दिखाकर अटकलों पर विराम लगाया.

पत्रकारों ने बचाई पुलिस अधिकारी की जान

रायपुर में पुलिस दिखी लाचार…. पुलिस को पड़ गए जान के लाले.. अपने ही पुलिस अधिकारियों को छोड़ भाग खड़े हुए पुलिसकर्मी.. भीड़ के सामने पुलिस बेबस… मीडियाकर्मियों ने बचाई पुलिस अधिकारी की जान.. राजधानी के समीप मंदिरहसौद में एक हत्या के मामले में जमकर बवाल हुआ.. गांव वालों ने आरोपी अखिलेश मिश्रा औऱ उसके परिवार वालों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर पहले उसके घर औऱ बाद में पुलिस वालों पर पथराव किया.. जिससे आरंग के थानेदार लालचंद मोहले सहित तीन पुलिसकर्मी घायल हो गए..

इस ‘नत्था’ का तो पूरा खानदान जहर खाकर मर गया

[caption id="attachment_20162" align="alignleft" width="151"]एक पुरानी तस्वीर में अपनी बहनों व मां के साथ सुनील एक पुरानी तस्वीर में अपनी बहनों व मां के साथ सुनील [/caption]: शासन-प्रशासन को था मौत का इंतजार… रीयल लाइफ की नत्था जैसी स्टोरी में नहीं बच सका कुछ… नत्था जैसे सभी किरदार भ्रष्ट तंत्र की भेंट चढ़ गए : छत्तीसगढ़ के भिलाई में शासन और प्रशासन कुछ लोगों के मौत का इंतजार करता रहा.. जिन्होंने कुछ दिन पहले अपने-आप को कमरे में कैद कर मौत को गले लगाने का फरमान जारी किया था..

सामने नहीं आया दंतेवाड़ा अग्निकांड का सच, अग्निवेश के काफिले पर हमला

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा के तिम्मापुर में 14 मार्च को नक्सलियों और सुरक्षा जवानों के बीच हुई मुठभेड़ के बाद ताड़मेटला, तिम्मापुर एवं मोरपल्ली में कथित रूप से जवानों द्वारा तीन सौ घरों में आग लगाने तथा महिलाओं को बेइज्जत किए जाने के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैली हुई है. तिम्मापुर की सच्चाई हर कोई जानना चाहता है. क्या नक्सलियों ने कोई मनगढ़त कहानी गढ़ी है या जवानों ने अपनी क्रूरता के सारे हदों को पार किया है.

मीडिया ने मिलाया बिछुड़ों को, अगवा जवान हुए रिहा

: अग्निवेश की मध्यस्थता और मीडिया की पहल रंग लाई : छत्तीसगढ़ में मीडिया ने सराहनीय कदम उठाया है. मीडिया ने स्वामी अग्निवेश की मदद से उन चेहरे पर खुशियां लौटाई है जिनके चेहरे मुरझा चुके थे. जिन्होंने अपनों को पाने का आस छोड़ दिया था. जिन्हें सभी तरफ से मायूसी हाथ लगी थी. जिन्होंने अपना माथा हर उस चौखट पर टेका जहां से उन्हें उम्मीद की किरण नजर आ सकती थी. लेकिन यह किरण भी उनकी आंखों से ओझल होती जा रही थी.

पत्रकारों के सवालों से बौखलाए डीजीपी विश्वरंजन

बीते साल नक्सलियों ने छत्तीसगढ़ पुलिस को करारा झटका दिया है. नए साल पर पत्रकारों से पुलिस महानिदेशक की मुलाकात में इसका असर साफ दिखा. नक्सली मोर्चे पर असफल छत्तीसगढ़ पुलिस के कप्तान विश्वरंजन पत्रकारों के सवालों के जवाब देते-देते बौखला गए. उन्होंने सभी आंकड़ों को किनारे करते हुए कहा कि 2010 में नक्सली मोर्चे पर सुरक्षा बल को काफी कम नुकसान हुआ है, नक्सलियों को धकेला गया है, छत्तीसगढ़ पुलिस सजग, सतर्क और समर्थ है.

वर्दी वाले इन गुंडों को औकात में कौन लाएगा

आरके गांधी: 15 जवानों ने पत्रकार वैभव और सुरेंद्र पर अपना ‘पौरुष’ दिखाया : सड़क-सड़क पर गिरा-गिरा कर बुरी तरह पीटा : ‘दबंग’ फिल्म देखकर निकल रहे कप्तान ने गार्ड को मरवा दिया :  छत्तीसगढ़ पुलिस की दबंगई बढ़ती जा रही है. एक महीने पहले ही बिलासपुर में एसपी की मौजदूगी में सिनेमाघर के गार्ड पर कहर बरपाने के बाद वर्दी के इन गुंडों ने भिलाई के पत्रकार को अपना निशाना बनाया. ईटीवी के संवाददाता वैभव पांडे और जी24 घंटे के कैमरामैन इस बार पुलिसिया दंबगई के शिकार बने. 15-15 पुलिसवालों ने मिलकर लात-घूसे और लाठी-डंडों से पत्रकारों को पिटा. ईटीवी के संवाददाता पर पुलिसिया कहर इस तरह बरपी की वह इस समय भिलाई के एक निजी अस्पताल में भर्ती है. उसके दोनों हाथ और पैरों में गंभीर चोटें आई हैं. पुलिसवालों की इस दबंगई के बाद भी किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने इस बारे में कुछ खास चिंता नहीं जताई है.

मीडिया को रोक रहे हैं पुलिस व नक्सली

पुलिस और नक्सली, दोनों अब मीडिया पर शिकंजा कसने में लगे हैं. इसकी बानगी छत्तीसगढ़ के नारायणपुर में औड़ाई में हुई नक्सली घटना के बाद देखने को मिली. वहां मीडियाकर्मियों को जाने से रोक दिया. एक तरफ तो नक्सलियों का तालिबानी चेहरा साफ नजर आ रहा है दूसरी ओर पुलिस ने भी मीडियाकर्मियों को रोक कर अपने अलोकतांत्रिक चेहरे का दर्शन कराया है.

‘मेरे लाइव इनकाउंटर को लाइव दिखाओ’

[caption id="attachment_15906" align="alignleft"]सुमेर सिंहसुमेर सिंह[/caption]पुलिस ने मीडिया वाला बन पकड़ा नकली सीबीआई एनकाउंटर स्पेशलिस्ट को : 12वीं में पढ़ रहे किशोर सुमेर के पास थी नकली पिस्टल : आज की नई पीढ़ी कल्पना में जी रही है… फैंटेसी में ये नई-नई कहानियां बुनते रहते हैं… कभी स्पाइडर मैन… कभी सुपर मैन बनकर यह दूसरों से लड़ते हुए अपने-आप को सपने में देखते हैं.. लेकिन जब सपना टूटता है.. तो इन्हें अपने हकीकत का एहसास होता है…. बावजूद इसके, ये लोग कभी-कभी सपनों को हकीकत का अमलीजामा पहनाने की कोशिश करते हैं… जिसके कारण कई बार ये सलाखों के पीछे भी पहुंच जाते हैं… ऐसा ही कुछ हुआ है… रायपुर के स्कूली छात्र सुमेर सिंह के साथ… जो इसी फैंटेंसी कैरेक्टर को जीने के चक्कर में आज पुलिस की गिरफ्त में पहुँच चुका है… यह महोदय एक न्यूज चैनल के दफ्तर पहुँच खुद को सीबीआई एनकाउंटर स्पेशलिस्ट बता रहे थे…