रुमनी को एवार्ड पर कइयों ने उठाए सवाल

ईर्ष्या और दुख के कारण अनेक होते हैं. मुझे एवार्ड नहीं मिला तो उसे क्यों मिल गया. उसे अगर मिल तो क्यों मिला. उसने लिखा तो क्या लिखा. जो लिखा वो कहां से लेकर लिखा. कुछ यही हाल दैनिक भास्कर, इंदौर में कार्यरत रुमनी घोष के विरोधियों का है. हफ्ते भर में करीब सात ऐसी मेल भड़ास4मीडिया के पास आई हैं जिनमें रुमनी घोष को एवार्ड के नाकाबिल बताया गया. रुपनी पर आरोप लगाया गया है कि जिस लिखे पर उन्हें एवार्ड मिला है, वो मौलिक नहीं है, चोरी का है. जिस एवार्ड के तहत न्यूयार्क में उन्हें दो लाख रुपये दिए जाएंगे, उसके लिए वे हकदार नहीं है. जिस महिला पर रिपोर्ट उन्होंने प्रकाशित की है, उससे वे मिली ही नहीं, उसके गांव वे गई ही नहीं. चोरी की रचना पर उन्हें एवार्ड दे दिया गया है. आदि आदि.  इसके प्रमाण में कई सुबूत भी भेजे गए हैं.

भास्कर की रुमनी को सरोजिनी नायडू पुरस्कार

[caption id="attachment_18113" align="alignleft" width="63"]रुमनी घोषरुमनी घोष[/caption]दैनिक भास्कर इंदौर की न्यूज एडिटर रुमनी घोष को द हंगर प्रोजेक्ट का प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार दिया जाएगा। उन्हें ‘पंचायती राज में महिलाएं’ विषय पर हिंदी श्रेणी में श्रेष्ठ रिपोर्टिग के लिए चुना गया है। न्यूयॉर्क में 23 अक्टूबर में होने वाले कार्यक्रम में सुश्री घोष को दो लाख रुपए का नकद पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र मिलेगा।

भास्कर के टैलेंट पूल में 13 लोग, भोपाल में ट्रेनिंग

मीडिया में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और गुणवत्ता की बढ़ती मांग के चलते मीडिया हाउस अब अपने बेहतरीन लोगों को ट्रेनिंग देने व रिफ्रेशर कोर्स कराने लगे हैं। भास्कर समूह ने इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए संपादकीय गुणवत्ता के लिए और भविष्य के संपादकीय लीडर्स को डेवलप करने के लिए एक टैलेंट पूल बनाया है। इसमें देश भर के विभिन्न एडीशन से बेहतरीन और संभावनाशील लोगों को चुना गया है। इन सभी को भोपाल बुलाकर इन्हें कई तरह की ट्रेनिंग दी जा रही है। एक जून से शुरू हुए टैलेंट पूल में 13 लोगों को बुलाया गया है। इन 13 लोगों के नाम और ये जहां से आए हैं उस संस्करण के नाम इस प्रकार हैं….