क्‍या बिक जाएगा निराला निकेतन!

उत्तर बिहार की सांस्कृतिक राजधानी के साथ मुजफ्फरपुर की पहचान रस भरी लीचियों के लिए भी है। इसके साथ ही यहां से उठती थी उत्तर छायावाद की वो लहर जिसे निराला निकेतन को जानने वाले जरूर सुनते और गाते थे। हम बात कर रहे हैं। स्व. आचार्य जानकी बल्लभ शास्त्री की। जिनकी कविताओं ने उन्हें पद्मश्री के साथ उत्तर प्रदेश का सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान भारत भारती दिलवा दिया। आचार्य महीनों से बीमार चल रहे थे। लगभग महीने भर पहले उनका निधन हो गया। आचार्य अपने पीछे दर्जनों कुत्ते और छह गायें छोड़कर गए हैं।

हाइकु संग्रह ‘इंद्रधनुष’ का लोकार्पण

सहारनपुर के नौ हाइकुकारों के हाइकु संग्रह ‘इंद्रधनुष’ का लोकार्पण देश के प्रख्यात साहित्यकार व ‘हंस’ के संपादक राजेंद्र यादव और जाने-माने कथाकार वल्लभ डोभाल सहित अनेक साहित्यकारों ने किया। हाइकु जापानी विधा की छोटी कविता है, जिसमें मात्र 17 अक्षर होते हैं।  डा. द्वारिका प्रसाद स्मृति न्यास द्वारा सेक्टर 62 नोएडा के एक सभागार में आयोजित समारोह में ‘इंद्रधनुष’ का लोकार्पण किया गया।

नौ साहित्‍यकारों को अम्बिका प्रसाद स्‍मृति साहित्‍य सम्‍मान

शीर्ष ऐतिहासिक उपन्यासकार, कवि, चित्रकार एवं साठ महत्वपूर्ण ग्रंथों के सर्जक स्व. अम्बिका प्रसाद दिव्य की स्मृति में साहित्य सदन, भोपाल द्वारा दिये जा रहे दिव्य पुरस्कारों की घोषणा 28 मार्च 2011 को साहित्य सदन, भोपाल में आयोजित एक सादे समारोह में दिव्य पुरस्कारों के संयोजक एवं चर्चित साहित्यिक पत्रिका ‘दिव्यालोक’ के संपादक श्री जगदीश किंजल्क ने की।

साहित्‍यकार कन्‍हैयालाल नंदन का निधन

नंदन: काफी दिनों से बीमार चल रहे थे : कई जानी-मानी पत्र-पत्रिकाओं के संपादक भी रहे :हिंदी के जाने-माने साहित्यकार और वरिष्‍ठ पत्रकार कन्हैयालाल नंदन का शनिवार तड़के निधन हो गया. वह 77 साल के थे. नंदन की तबियत पिछले कुछ दिनों से खराब चल रही थी. उन्‍हें इलाज के लिए दिल्‍ली के एक निजी अस्‍पताल में भर्ती कराया गया था. जहां वे डायलसिस पर थे. उनके परिवार के सदस्‍यों ने बताया कि उन्‍होंने तड़के करीब तीन बजे आखिरी सांस ली.