पत्रकारिता में चापलूसी के नए-नए आयाम देखे हैं मैंने : सुधांशु गुप्त

भड़ास4मीडिया पर लंबे समय से बंद ”इंटरव्यू” के स्तंभ को फिर शुरू कर रहे हैं, लेकिन नए दर्शन-फार्मेट के साथ. अब महान महान संपादकों-पत्रकारों के इंटरव्यू प्रकाशित करने की जगह हम उन लोगों को प्राथमिकता देंगे जो मीडिया इंडस्ट्री में चुपचाप लंबे समय से कार्यरत हैं या रहे हैं. ऐसे पर्दे के पीछे के हीरोज को सामने लाना ज्यादा बड़ा दायित्व है, बनस्पति उनके जो हर मोर्चों, मंचों, माध्यमों पर प्रमुखता से प्रकाशित प्रसारित मंचित आलोकित होते रहते हैं.

सुधांशु गुप्त ने हिंदुस्तान, दिल्ली से अपना बारह वर्षों का नाता तोड़ा

हिंदुस्तान, दिल्ली से पिछले कुछ समय से छुट्टियों पर चल रहे सुंधाशु गुप्त ने अपना इस्तीफा दे दिया है. वे चीफ कॉपी एडिटर के पद पर कार्यरत थे. सुंधाशु पिछले तीन दशक से ज्यादा समय से मीडिया में हैं. उन्होंने दिनमान, माया समेत कई मैग्जीनों-अखबारों में काम किया. वे हिंदुस्तान समूह से एक दशक से ज्यादा समय से जुड़े हुए थे. वे पिछले ढाई-तीन महीने से अवकाश पर चल रहे थे.

… ताकि जाया न जाए संगम की मृत्यु

प्रदीप संगम का असमय जाना निश्चित रूप से बेहद दुखद घटना है। लेकिन यह घटना हमें यह सोचने पर भी मजबूर करती है कि पत्रकारिता की दुनिया में आखिर वो कौन से कारण है जो किसी भी संवेदनशील इंसान को तनाव की उस पराकाष्ठा तक पहुंचा देते हैं, जहां से कोई वापसी संभव नहीं होती। प्रदीप संगम से मेरा परिचय लगभग 12 साल पुराना है।