सच से डर लगता है

गिरीश: श्याबाओ हों या विकिलीक्स- कहानी एक है : ‘चीन तब तक दुनिया का नेता नहीं बन सकता, जब तक कि वो मानवाधिकार हनन नहीं रोकता. हालांकि लू श्याबाओ की कहानी एक अरब से ज्यादा लोगों में से एक व्यक्ति की कहानी है, लेकिन ये व्यक्तिगत अभिव्यक्ति के प्रति चीन की सरकार की असहिष्णुता का प्रतीक है.’ आर्चबिशप डेसमंड टूटू और वेस्लाव हावेल (दोनों नोबेल शांति पुरस्कार के पूर्व विजेता). ’चीन ने जो किया वो दुखद है…बहुत दुखद. एक मनुष्य होने के नाते मैं श्याबाओ की ओर अपना हाथ बढाना चाहती हूं.’ आंग सान सू ची (नोबेल शांति पुरस्कार की पूर्व विजेता). ’इस साल 2010 के नोबेल शांति पुरस्कार विजेता श्याबाओ का काम तुलनात्मक रूप से मुझसे कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है… मैं अपील करता हूं कि चीन सरकार उन्हें तुरंत रिहा करे.’ बराक ओबामा (2009 में नोबेल शांति पुरस्कार विजेता).