पोथी, पतरा, ज्ञान कपट से बहुत बड़ा है मानव

[caption id="attachment_18496" align="alignright" width="151"]कविता पाठ करते वीरेन डंगवालकविता पाठ करते वीरेन डंगवाल[/caption]: कानपुर में वीरेन डंगवाल का एकल काव्यपाठ : प्रख्यात कवि वीरेन डंगवाल ने कल दोपहर बाद कानपुर में कविता पाठ किया. एकल कविता पाठ. उसी कानपुर में जहां वे कुछ वर्षों पहले कुछ वर्ष तक रहे, अमर उजाला अखबार के संपादक के बतौर. जहां उन्होंने संपादक रहते हुए दर्जनों पत्रकारों को संपादकीय, मानवीयता, सरोकार और पत्रकारिता का पाठ पढ़ाया.

मेरे अंदर काफी गुस्सा है, मैं क्रोधित हूं : वीरेन डंगवाल

वीरेन डंगवाल

हमारा हीरो : वीरेन डंगवाल (कवि, शिक्षक और पत्रकार) : मैंने अमर उजाला छोड़कर निजी संबंधों को बचाया : मेरी राजुल और अतुल से हमेशा बात होती है, पर उस मुद्दे पर नहीं : उस बारे में कोई बात नहीं करना चाहता : अमर उजाला से दस हजार रुपये से ज्यादा किसी महीने पारिश्रमिक नहीं लिया : हरिवंश जी घटिया पत्रकारिता को मुंह चिढ़ा रहे हैं : कविता पर राजेंद्र यादव चूतियापे की बात करते हैं : उदय प्रकाश को टुच्चे लोगों से पुरस्कार नहीं लेना चाहिए : इसी 5 अगस्त को नौकरी के 38 साल और जीवन के 62 साल पूरे हो गए : 30 जून, 2010 को बरेली कालेज से कार्यमुक्त हो जाऊंगा : स्तंभ लेखन करना चाहता हूं,  खूब घूमना चाहता हूं : पत्रकारिता व अध्यापन पर उपन्यास लिखने का इरादा :

वीरेन डंगवाल ने अमर उजाला को नमस्ते कहा

[caption id="attachment_14696" align="alignnone"]वीरेन डंगवालवीरेन डंगवाल[/caption]मशहूर कवि और वरिष्ठ पत्रकार वीरेन डंगवाल ने अमर उजाला, बरेली के स्थानीय संपादक पद से इस्तीफा दे दिया है। पिछले 27 वर्षों से अमर उजाला के ग्रुप सलाहकार, संपादक और अभिभावक के तौर पर जुड़े रहे वीरेन डंगवाल का इससे अलग हो जाना न सिर्फ अमर उजाला बल्कि हिंदी पत्रकारिता के लिए भी बड़ा झटका है। मनुष्यता, धर्मनिरपेक्षता, लोकतंत्र में अटूट आस्था रखने वाले वीरेन डंगवाल ने इन आदर्शों-सरोकारों को पत्रकारिता और अखबारी जीवन से कभी अलग नहीं माना। वे उन दुर्लभ संपादकों में से हैं जो सिद्धांत और व्यवहार को अलग-अलग नहीं जीते। वीरेन ने इस्तीफा भी इन्हीं प्रतिबद्धताओं के चलते दिया।