मीडिया पर असली हमला तो पत्रकारों का भयंकर आर्थिक शोषण है

विष्णु राजगढ़िया: ((जवाब- पार्ट दो)) : यकीन मानिये, वेज बोर्ड के कारण कोई अखबार बंद नहीं होने जा रहा : सबका दर्द सुनने-सुनाने वाले पत्रकारों के बड़े हिस्से को श्रमजीवी पत्रकारों के वेतनमान पर रिपोर्ट देने वाले जस्टिस मजीठिया आयोग की वेज बोर्ड रिपोर्ट के बारे में कुछ मालूम नहीं होता, इसका लाभ मिलना तो दूर की बात है.

झारखंड सरकार पत्रकारों को देगी पुरस्‍कार और मीडिया फेलोशिप

झारखंड सरकार ने पहली बार पत्रकारों के लिए पुरस्कार और फेलोशिप की बड़ी योजना घोषित की है। इसके तहत दस पत्रकारों/छायाकारों को एक-एक लाख रुपये का पुरस्कार और 20 पत्रकारों को 50-50 हजार की मीडिया फेलोशिप दी जायेगी। आवेदन की अंतिम तिथि 25 मई 2011 है। संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है-

पारदर्शी उम्‍मीदों के पांच साल

विष्‍णु : आरटीआई कानून ने अधिकारियों को बनाया जवाबदेह : गरीबी रेखा से नीचे श्रेणी की पुष्पा कुमारी की कहानी सुनिये। रांची विश्वविद्यालय में राजनीतिशास्त्र की छात्रा है। उसे पता चला कि स्नातकोत्तर के हर विभाग में बीपीएल के दो विद्यार्थियों को निशुल्क शिक्षा का प्रावधान है। अलग से 500 रुपये मासिक छात्रवृति भी मिलनी है। इसका लाभ न तो पुष्पा को मिल रहा था, न अन्य को। पुष्पा ने अपने भाई मुकेश की मदद से सूचना का आवेदन डाला। नतीजा यह हुआ कि पुष्पा को छात्रवृति की राशि मिलने लगी। स्नातकोत्तर के 23 विभागों से मिली सूचना के मुताबिक किसी भी विभाग ने गरीब छात्र-छात्राओं को उनका जायज हक नहीं दिया।