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भोजपुरी चैनल महुवा में कुनबावाद : तारकेश्वर

तारकेश्वर मिश्रापहला और नवजात भोजपुरी चैनल महुवा के अंदर ऐसा क्या चल रहा है जिससे तीन माह में ही तीन इनपुट इंचार्जों को जाना पड़ा? इस बात की तहकीकात के लिए भड़ास4मीडिया ने महुवा से हाल-फिलहाल इस्तीफा देने वाले डिप्टी एक्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर  और इनपुट प्रभारी   तारकेश्वर मिश्रा  से संपर्क साधा तो उन्होंने चैनल प्रबंधन पर कई आरोप लगाए। महुवा में मात्र 65 दिन काम कर सके वरिष्ठ पत्रकार तारकेश्वर का कहना है कि इस चैनल को कई बीमारियां लग गई हैं।

तारकेश्वर मिश्रापहला और नवजात भोजपुरी चैनल महुवा के अंदर ऐसा क्या चल रहा है जिससे तीन माह में ही तीन इनपुट इंचार्जों को जाना पड़ा? इस बात की तहकीकात के लिए भड़ास4मीडिया ने महुवा से हाल-फिलहाल इस्तीफा देने वाले डिप्टी एक्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर  और इनपुट प्रभारी   तारकेश्वर मिश्रा  से संपर्क साधा तो उन्होंने चैनल प्रबंधन पर कई आरोप लगाए। महुवा में मात्र 65 दिन काम कर सके वरिष्ठ पत्रकार तारकेश्वर का कहना है कि इस चैनल को कई बीमारियां लग गई हैं।

तारकेश्वर के मुताबिक महुवा में कुनबावाद फैलाया जा रहा है। नाते-रिश्तेदारों व गांव-जंवार के लोगों को भरा जा रहा है और इसके लिए अच्छे लोगों की बलि ली जा रही है। ऐसे लोगों को चैनल में फिट किया जा रहा है जिनको लेकर आगे चला नहीं जा सकता। जब इन अक्षम लोगों की गलतियों को उजागर किया जाता है या गलतियां न करने के लिए इन्हें समझाया जाता है तो लोग इसका बुरा मानते हैं। स्थितियां धीरे-धीरे खराब होती जा रही थीं। चीजें और बिगड़ें, इससे पहले ही मैंने निकल जाने का फैसला कर लिया।

तारकेश्वर का कहना है कि उन्होंने दो महीनों के अपने कार्यकाल के दौरान चैनल के लिए नेटवर्किंग अच्छी कर दी। इस काम के लिए उन्होंने अपने करियर के समस्त अनुभवों व संबंधों का इस्तेमाल किया। भोजपुरीवासियों को जोड़ने का काम किया। चैनल में चल रही गलत भोजपुरी को सुधारने का प्रयास किया। एंकरों को ट्रेनिंग दी। नेटवर्क बनाया। इस चैनल का बहुत सुनाम सुनकर आया था, अब दुखी मन से जा रहा हूं। यहां आने का फैसला गलत हो गया। भोजपुरी की सेवा करने आया था। पर यहां आकर पता चला कि दूर के ढोल सुहावने होते हैं। अब ये किस्मत की बात है कि जो पौधा रोपता है वो फल नहीं खा पाता।

तारकेश्वर दुखी मन से स्वीकार करते हैं कि महुवा ज्वाइऩ करना उनके करियर का सबसे खराब फैसला था। तारकेश्वर का कहना है कि अभी मैं आने वाले चुनाव को लेकर काफी कुछ प्लान करने वाला था लेकिन चैनल के अंदरूनी हालात को देखते हुए हाथ खींच लिया।

चैनल के भविष्य के बारे में पूछे जाने पर तारकेश्वर का कहना है कि जब चैनल को 24 घंटे चलाने की स्थिति आएगी तो स्तरीय कंटेंट ये लोग नहीं दिखा पाएंगे। केवल नाचने-गाने के प्रोग्राम दिखा सकते हैं। अच्छे कंटेंट के लिए आपको अच्छे लोगों का चैनल में लाना पड़ेगा और इन अच्छे लोगों का सम्मान करना भी सीखना पड़ेगा।

यह पूछने पर कि अब कहां ठिकाना जमाने का इरादा है, तारकेश्वर ने बताया कि वे अभी तय नहीं कर पाये हैं। इस सदमें से उबरने के बाद नए ठिकाने के बारे में तय कर लेंगे। तारकेश्वर ने संकेत दिया कि वे राजस्थान पत्रिका में घर वापसी कर सकते हैं, कुछ उसी तरह जैसे सुबह का भूला शाम को घर लौट आए तो उसे भूला नहीं कहते।

अपने करियर के बारे में तारकेश्वर ने बताया कि वे कोलकाता में सन्मार्ग अखबार के 10 वर्षों तक चीफ रिपोर्टर रहे। बाद में खास खबर के ब्यूरो चीफ बने।  वे ईटीवी  के राजस्थान चैनल के प्रभारी थे। साथ ही ईटीवी के चारों हिंदी चैनलों के लाइव का भी दायित्व था। बाद में वे कोलकाता में राजस्थान पत्रिका के संग हो लिए। यहां बतौर न्यूज एडीटर उन्होंने संपादकीय प्रभारी और ब्रांच इंचार्ज दोनों दायित्वों को निभाया।  

तारकेश्वर मिश्रा द्वारा महुवा चैनल के अंदरूनी हालात को लेकर उठाए गए सवालों पर भड़ास4मीडिया ने महुवा के कंटेंट हेड और बिजनेस हेड से संपर्क साधा। 

महुवा चैनल के एडीटोरियल हेड अंशुमान त्रिपाठी का कहना है कि तारकेश्वर जी को मैं ही चैनल में लेकर आया था और वो मेरे परिचित नहीं थे। भाई-भतीजावाद न होने का यही सबसे बड़ा उदाहरण है। मैं उनके चैनल से जाने से आहत हूं। वे मेरे वरिष्ठ साथी हैं। उन्होंने जो कुछ चैनल के बारे में कहा है कि उससे हम लोग सीखने की कोशिश करेंगे। हम लोग हर किसी की सलाह सुनते हैं और उससे खुद को ठीक करने की कोशिश करते हैं। अंशुमान का कहना है कि भोजपुरी चैनल लाने के पीछे उद्देश्य कोई धार्मिक नहीं है बल्कि मार्केट की जरूरत भी है। हम हर हाल में एक लोकप्रिय भोजपुरी चैनल बनना चाहेंगे और उसी दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

महुवा के बिजनेस हेड राघवेश अस्थाना का कहना कि चैनल को लेकर जितने भी आरोप लगाए जा रहे हैं वे निराधार हैं। मैं खुद चैनल के मालिक तिवारी जी का रिश्तेदार नहीं हूं, न ब्राह्मण हूं। कुनबावाद की बात गलत है। चैनल के तीन हफ्ते के परफारमेंस के आधार पर कहा जा सकता है कि हम सही दिशा में जा रहे हैं। कुछ लोग हर जगह असंतुष्ट होते हैं और ये लोग कुछ न कुछ कहते ही हैं। अगर डिलीवरी, प्रोडक्टिविटी, परफारमेंस ठीक है तो बाकी बातों के बहुत मायने नहीं होते।

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