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घर में नहीं दाने, अम्मा चली भुनाने

तेलगु दैनिक वार्ता और हिंदी दैनिक स्वतंत्र वार्ता का हाल : उत्तर भारत में एक कहावत प्रचलित है कि “घर में नहीं दाने, अम्मा चली भुनाने “, ठीक इसी कहावत को चरितार्थ कर रहा है आन्ध्र प्रदेश के ए.जी.ए. पब्लिकेसन द्वारा प्रकाशित तेलगु दैनिक “वार्ता” एवम हिंदी दैनिक ‘स्वतंत्र वार्ता’. इसके कर्मचारियों को पिछले तीन से चार माह की पगार नहीं मिली है वहीं समूह के वरिष्ठ अधिकारी इन दिनों थाईलैंड की पर्यटन यात्रा पर गए हुए हैं.

तेलगु दैनिक वार्ता और हिंदी दैनिक स्वतंत्र वार्ता का हाल : उत्तर भारत में एक कहावत प्रचलित है कि “घर में नहीं दाने, अम्मा चली भुनाने “, ठीक इसी कहावत को चरितार्थ कर रहा है आन्ध्र प्रदेश के ए.जी.ए. पब्लिकेसन द्वारा प्रकाशित तेलगु दैनिक “वार्ता” एवम हिंदी दैनिक ‘स्वतंत्र वार्ता’. इसके कर्मचारियों को पिछले तीन से चार माह की पगार नहीं मिली है वहीं समूह के वरिष्ठ अधिकारी इन दिनों थाईलैंड की पर्यटन यात्रा पर गए हुए हैं.

इनमें महा प्रबंधक विज्ञापन, वितरण एवं नेटवर्क प्रभारी के साथ-साथ विभिन्न प्रकाशनों के शाखा प्रबंधक, विज्ञापन प्रभारी एवं कुछ ब्यूरो सवांददाता भी शामिल हैं. पता हो कि वार्ता तेलगु का प्रकाशन आंध्र प्रदेश के 23 जिलों में से 19 जगहों से होता है, स्वतंत्र वार्ता हैदराबाद, विशाखापट्टनम एवं निज़ामाबाद से प्रकाशित होता है. कभी तेलगु दैनिक प्रदेश में वितरण के मामले में दूसरा स्थान रखता था, लेकिन अब वह पाचवें पायदान पर पहुंच गया है. दोनों दैनिकों से कर्मचारी संस्थान छोड़ कर चले जा रहे हैं. स्टाफ मिल नहीं रहा है.

प्रबंधन की अनदेखी के चलते अखबार की हालत बिगड़ती जा रही है. इसी समाचार पत्र समूह द्वारा अंगरेजी में पेज थ्री की तर्ज पर सन 2009 में ‘ज़ेड’ नामक एक मैगजीन भी शुरु की गयी है, वह मैग्जीन कहां बिकती है, किसी को पता नहीं. उसकी कीमत है 100 रुपये. संस्थान की योजना एक तेलगु न्यूज चैनल भी चलाने की है, जिसके लिए हैदराबाद स्थित मुख्य कार्यालय में दो साल पहले करोड़ों की लागत से स्टूडियो भी बनाया जा रहा था, लेकिन यह योजना भी अधूरी रह गयी. चैनल के लिए सैकड़ों मूवी कैमरे भी ख़रीदे गये थे, वे कहां गये, किसी को पता नहीं.

खबर है कि हिंदी दैनिक स्वतंत्र वार्ता निज़ामाबाद संस्करण में तीन मई को अखबार का लोकप्रिय पृष्ठ (धर्म-संसकृति) का पूरा पेज ही उलटा प्रकाशित हो गया. यह अखबार बंट भी गया. इस संदर्भ में प्रबंधन मंडल ने कोई कार्रवाई अभी तक नहीं की है. पत्रकारिता के सारे मापदंडों को दर-किनार करते हुए आफिस ब्वाय को डी.टी.पी. आपरेटर, आपरेटर को उपसंपादक तक बना दिया गया है. ग्रामीण संवाददाता को ब्यूरो प्रमुख तक बना दिया गया.

विदेश यात्रा पर गए लोगों के बारे में बताया जा रहा है कि उन्हें अखबार के वार्षिक सदस्य बनने की योजना के तहत भेजा गया है. लेकिन अखबार के कर्मचारियों का कहना है कि पहले सभी यूनिटों के लोगों का पगार दे दिया जाता तब इन्हें विदेश यात्रा पर भेजा जाता.  हम यहां बता दे कि इन अखबार समूहों के प्रकाशक और प्रधान संपादक डा. गिरीश संघी हैं जो राज्यसभा सदस्य भी हैं. सांसद के बड़े पुत्र गौरव संघी कार्यकारी निदेशक हैं. वार्ता तेलगु के संपादक अशोक टंक्सला हैं जबकि स्वतंत्र वार्ता के संपादक डा. राधे श्याम शुक्ल हैं.

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0 Comments

  1. kamal.kashyap

    May 14, 2010 at 10:20 am

    sahi hai……. jam main nahi rupiya main chala yuropiya

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