कात्यायनी चैनल पर ताला लग गया है। इसके कर्ताधर्ता श्रीवास्तव बंधुओं ने सभी 108 कर्मियों को तीन महीने की एडवांस सेलरी पकड़ाने के बाद सेक्युरिटी गार्डों को बोल दिया है कि किसी को अंदर न घुसने दिया जाए, सभी का हिसाब हो चुका है। 19 सितंबर को आन एयर हुए इस धार्मिक चैनल पर ताला तीन दिन पहले 8 अक्टूबर को लगा। कल सभी कर्मियों को एडवांस सेलरी देकर गुडबाय बोल दिया गया। मात्र 20 दिन चले इस चैनल के अचानक बंद हो जाने से इसमें काम करने वालों के चहरे पर हवाइयां उड़ने लगी है। जितने भी लोग आए थे, वे सब कहीं न कहीं नौकरी कर रहे थे। एक वरिष्ठ मीडियाकर्मी ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि उन्होंने एक वरिष्ठ के कहने पर एक अच्छे ब्रांड की कंपनी से इस्तीफा देने के बाद यहां ज्वाइन किया था।
अचानक सड़क पर आ जाने से वे कहीं के नहीं रहे। इस दौर में जबकि नौकरियां मुश्किल से मिला करती हैं, बेरोजगार होने के बाद नौकरी मिलना और भी ज्यादा मुश्किल हो गया है। सूत्रों का कहना है कि कर्मचारियों का हिसाब तो कर दिया गया है लेकिन अभी कई तरह की देनदारियां मालिकों पर बाकी है। इक्विपमेंट से लेकर डेकोरेशन, सामान, फिल्मों-सीरियलों का राइट आदि का पैसा देना अभी शेष है। कुछ लोगों का कहना है कि श्रीवास्तव बंधुओं ने चैनल को तात्कालिक तौर पर बंद किया है। वे प्रज्ञान भट्टाचार्या और पार्थो घोष की टीम से पीछा छुड़ाना चाहते हैं। इसलिए अशांति से बचने के लिए इन लोगों ने सभी को एडवांस सेलरी देकर चैनल बंद होने की बात कही है। अगर ये वाकई चैनल बंद करते तो ट्रांसमीशन भी बंद कराते। ट्रांसमीशन अभी चालू है। कहा जा रहा है कि बाद में यह चैनल दूसरे लोगों के जरिए चलाया जाएगा। गुटबाजी और विवाद से बचने के लिए प्रज्ञान और पार्थों से पीछा छुड़ाने के बाद अब उनकी टीम से पीछा छुड़ा लिया गया है।
जो भी हो, कात्यायनी के बंद होने से नए चैनलों के साथ करियर शुरू करने का रिस्क एक बार फिर सामने आया है। यही हाल वीओआई का हुआ। सैकड़ों मीडियाकर्मी जमी-जमाई नौकरी छोड़कर वीओआई के साथ आए लेकिन आज वे कहीं नहीं है और वीओआई भी बंद हो चुका है। वीओआई और कात्यायनी का जो हाल हुआ है, उसे देखने के बाद आगे से किसी भी नए चैनल में लोग जाने से पहले सौ बार सोचा करेंगे।











