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जाने के निशान तो दिखते हैं, आने के नहीं

राजीव शुक्ला के न्यूज चैनल ‘न्यूज 24’ से लोगों के जाने के निशान तो दिखते हैं, पर आने के नहीं। इस चैनल से पिछले दिनों राजीव रंजन और अंकिता ने भी इस्तीफा दे दिया। ये दोनों चैनल के बिजनेस डेस्क पर थे। इस न्यूज चैनल से जाने का सिलसिला थम नहीं रहा है। नई भर्तियां हो नहीं रही है। जो लोग बचे हैं, उन पर काम का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। प्रबंधन है कि सुनता नहीं। दो साल पहले लांच हुए इस न्यूज चैनल में ‘आजतक’ से ढेर सारे लोग आए थे। तब कहा जा रहा था कि ‘न्यूज24’ जल्द ही नंबर वन न्यूज चैनल बन जाएगा। इसीलिए आजतक के अच्छे-खासे लोग न्यूज24 से जुड़े। पर दो साल बाद भी यह चैनल मध्य क्रम में सहारा के ‘समय’ से युद्ध लड़ रहा है। उधर, जो लोग इस चैनल से जुड़े उन्हें दो वर्षों में कोई इनक्रीमेंट और प्रमोशन नहीं दिया गया। टीवी इंडस्ट्री में कहा जाता है कि नए चैनल की लांचिंग से जुड़े लोगों को लांचिंग के बाद या छह महीने पर या साल भर होने पर करीब पचास प्रतिशत की सेलरी हाइक दी जाती है और प्रमोशन मिलता है।

राजीव शुक्ला के न्यूज चैनल ‘न्यूज 24’ से लोगों के जाने के निशान तो दिखते हैं, पर आने के नहीं। इस चैनल से पिछले दिनों राजीव रंजन और अंकिता ने भी इस्तीफा दे दिया। ये दोनों चैनल के बिजनेस डेस्क पर थे। इस न्यूज चैनल से जाने का सिलसिला थम नहीं रहा है। नई भर्तियां हो नहीं रही है। जो लोग बचे हैं, उन पर काम का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। प्रबंधन है कि सुनता नहीं। दो साल पहले लांच हुए इस न्यूज चैनल में ‘आजतक’ से ढेर सारे लोग आए थे। तब कहा जा रहा था कि ‘न्यूज24’ जल्द ही नंबर वन न्यूज चैनल बन जाएगा। इसीलिए आजतक के अच्छे-खासे लोग न्यूज24 से जुड़े। पर दो साल बाद भी यह चैनल मध्य क्रम में सहारा के ‘समय’ से युद्ध लड़ रहा है। उधर, जो लोग इस चैनल से जुड़े उन्हें दो वर्षों में कोई इनक्रीमेंट और प्रमोशन नहीं दिया गया। टीवी इंडस्ट्री में कहा जाता है कि नए चैनल की लांचिंग से जुड़े लोगों को लांचिंग के बाद या छह महीने पर या साल भर होने पर करीब पचास प्रतिशत की सेलरी हाइक दी जाती है और प्रमोशन मिलता है।

पर मंदी और खर्चों में जबरदस्त कटौती के नए दौर ने न्यूज 24 के ढेर सारे कर्मियों की न सिर्फ कमर तोड़कर रख दी है बल्कि कइयों की बोलती भी बंद कर दी। जो लोग बचे हैं, उनमें से ज्यादातर कर्मी बड़े न्यूज चैनलों के संपर्क में हैं लेकिन कई बड़े न्यूज चैनलों के शीर्ष संपादकीय नेतृत्व में स्टाफ के आने-जाने को लेकर आपसी अघोषित सहमति होने के कारण पलायन के रास्ते भी सीमित हैं। इन ढेर सारे वजहों से न्यूज 24 के लोग अब ऐसे चैनलों में जाने लगे हैं, जो बिलकुल नए हैं या हाल-फिलहाल लांच हुए हैं। बिजनेस डेस्क के राजीव रंजन का पी7न्यूज ज्वाइन करना इसका प्रमाण है। कुछ नाम, जिन्होंने न्यूज24 को बॉय बोला, इस प्रकार हैं- राकेश कश्यप, कार्तिकेय शर्मा, श्वेता सिंह, प्रणय उपाध्याय, कविता चौहान, विनती झा, सूरजपाल, प्रकाश नटराजन, नलिनी तिवारी, सुहेब खालिद, उन्मुक्त मिश्रा, सुशील कुमार, जैगम इमाम, आसिमा, निशा, सुधीर सुधाकर, विभाकर, अलका, अजय शर्मा, गौरव खेड़ा, हरपाल, आलोक, रमाशंकर, मनोज ठकरान, जयवीर सिंह, आलोक कुमार, संतोष तिवारी, राजीव रंजन, विकास कौशिक, राजीव मिश्रा, गुलाब मखीजा, मुकेश केजरीवाल, मुन्ने भारती, फजले, वर्षा, सुमित, मृगांका, सुमेधा, शिवानी, नीरज कर्ण सिंह, अंकिता चतुर्वेदी, निर्मल, अतुल भाटिया आदि। संभव है, इन नामों में कई ऐसे भी हो सकते हैं जिन्हें प्रबंधन ने ही निकाल बाहर किया हो लेकिन इन लोगों के जाने के बाद इनकी जगह पर किसी को रखा नहीं गया। इनमें से कई ऐसे नाम हैं जो आजतक से आए थे और न्यूज 24 का माहौल देख फिर आजतक में लौट गए। तो क्या, चैनल लांच करने के लिए ओवर स्टाफिंग की गई थी या आजतक से आए लोगों से झूठा वादा किया गया था?

सूत्रों के मुताबिक न्यूज24 के जबरदस्त घाटे में रहने के कारण और मंदी का दौर शुरू होने के बाद बीएजी प्रबंधन चैनल को कम से कम खर्चे में चलाने पर जोर दे रहा है। डिस्ट्रीव्यूशन से लेकर स्टाफ तक के खर्चे कम कर दिए गए हैं। छोटे-छोटे खर्चों तक पर ध्यान दिया जा रहा है। साथ ही कोशिश यह की जा रही है कि न्यूज 24 अपना खर्चा खुद निकाले। इसके लिए न्यूज 24 की मार्केटिंग टीम को लगातार कसा जा रहा है और ज्यादा से ज्यादा उत्तरदायी व जवाबदेह बनाया जा रहा है। बीएजी का जो प्रोडक्शन हाउस है, वह पहले की तरह जबरदस्त मुनाफे में है लेकिन न्यूज24 और ई24, दोनों को घाटा उठाना पड़ रहा है। बालीवुड न्यूज के चैनल ई24 को पहले ही मुंबई से दिल्ली लाकर और बंपर छंटनी करने के बाद बेहद कम से कम स्टाफ में संचालित किया जा रहा है। मंदी के दौर में इन चैनलों के एचआर, कैमरा यूनिट और आईटी से करीब 50 से 75 लोग निकाल दिए गए। नई भर्तियों के नाम पर कुछ रिपोर्टरों व प्रोड्यूसरों को रखा गया है। लेकिन अब भी न्यूज24 को देखकर कहा जा सकता है कि यहां से लोगों के जाने के निशान तो मिलते हैं, आने के नहीं। न्यूज 24 में अब जो लोग बचे हैं, खासकर वे जो आजतक से आए हुए, परेशान हैं। वे बीच वाली स्थिति में फंस चुके हैं। उनसे न उगलते बन रहा है, न निगलते। ये लोग करियर और पैसे को लेकर जो ख्वाब बुनकर आए थे, वो फिलहाल धूल-धूसरित ही है। संभव है, अगले कुछ महीनों में बैग प्रबंधन इनकी सुध ले।

न्यूज 24 के मैनेजिंग एडिटर अजीत अंजुम इस बात से इनकार करते हैं कि उनके यहां से लोग गए हैं, आए नहीं। उनका कहना है कि जहां भी जरूरत पड़ी, वहां हमने स्टाफ एप्वाइंट किया। रिपोर्टिंग हो या डेस्क, हर जगह नए लोग रखे गए। ये हो सकता है कि छोड़ने वालों की संख्या ज्यादा हो, रखे जाने वालों की कम। जूनियर लोगों का रिप्लेसमेंट हम अपने पत्रकारिता संस्थान के बच्चों से कर देते हैं। मुख्य चीज है कि काम स्मूथ तरीके से चलना चाहिए, और ऐसा हो रहा है। 

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