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टीवी

पांच लाख रुपये देकर स्टेट हेड बनिए

टीवी न्यूज चैनलों पर आप लोगों ने ढेर सारे स्टिंग आपरेशन देखे होंगे, लेकिन इन न्यूज चैनलों का स्टिंग कहीं पढ़ा-सुना-देखा नहीं होगा। आज आपके सामने पेश है एक टीवी न्यूज चैनल का स्टिंग आपरेशन। भड़ास4मीडिया की तरफ से दो लोगों ने अलग-अलग मोबाइल नंबरों से फोन कर सारी बातचीत रिकार्ड की। ये रिकार्डिंग भड़ास4मीडिया के पास सुरक्षित है। जितना भी कुछ रिकार्ड किया गया है, उसे हम टेक्स्ट रूप में यहां पेश कर रहे हैं। आप पढ़िए और मीडिया की धंधेबाजी के बारे में सोचिए। पांच लाख रुपये लेकर यूपी का स्टेट हेड बनाने का प्रस्ताव और 15 से 20 हजार रुपये लेकर रिपोर्टर नियुक्त करने का प्रस्ताव हमें भी दिया गया। हमारा मकसद स्टेट हेड या रिपोर्टर बनकर धंधा करना नहीं बल्कि धंधा करने में जुटे न्यूज चैनलों को बेनकाब करना था। सो, बातचीत होती चली गई और सारा खेल-तमाशा सामने आ गया। दरअसल, इस मामले का पता ही तब चला जब एक युवा पत्रकार ने हाल में ही लांच हुए चैनल वन न्यूज चैनल पर नीचे चलने वाली पट्टी को गौर से देखा। इसमें लिखा था कि अगर आप पत्रकार बनना चाहते हैं तो तुरंत फोन करें। साथ में फोन नंबर दिए गए थे। उस युवा पत्रकार ने जब फोन किया और सारी बात पता चली तो उसने भड़ास4मीडिया आफिस को पूरी जानकारी दी, संबंधित नंबर भी बताया। भड़ास4मीडिया की ओर से जब उसी नंबर पर फोन किया गया तो एक के बाद एक सारे रहस्य खुलते चले गए।

यहां हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि दोषी सिर्फ चैनल वन ही नहीं है। चैनल वन का दोष तो बस इतना है कि वह खुला खेल खेलने लगा और फंस गया। यह खेल ज्यादातर छोटे-बड़े न्यूज चैनल खेल रहे हैं। आज के जमाने में जो फंस जाए, पकड़ जाए, उसे ही चोर माना जाता है। यह भी सच है कि पकड़े छुटभैये ही जाते हैं जिन्हें चोरी की अक्ल नहीं होती। समझदार ‘चोर’ कभी गल्ती नहीं करता, इसलिए पकड़ा नहीं जाता। ऐसे मीडिया घराने, जिनकी दूसरी या तीसरी पीढ़ी नेतृत्व की भूमिका में है, कभी संदेह के घेरे में नहीं आते, आते भी हैं तो उनका कोई खास नुकसान नहीं होता। पर वे लोग जिनका मीडिया और सत्ता में कोई माई-बाप नहीं है और खुद मीडिया हाउस प्लान कर रहे हैं, या चला रहे हैं, उन्हें पग-पग पर ऐसे उल्टे-सीधे सलाहकार मिलते हैं कि अगर कुछ ही दिनों में मीडिया हाउस का भट्ठा न बैठ जाए तो ये सलाहकार खुद को सफल नहीं मानते। भड़ास4मीडिया के पास दिल्ली के एक ऐसे संगठित पत्रकार गिरोह के बारे में जानकारी मिली है जो नए न्यूज चैनल लांच कराने का ठेका लेता है, लांच कराता है, छह महीने-साल भर खाता-पीता है, और चैनल का भट्ठा बैठाकर, आर्थिक रूप से दिवालिया कर, निकल लेता है। फिर तलाशने लगता है कोई मुर्गा। खैर, बात कुछ और हो रही थी, होने कुछ और लगी। आप सभी मीडियाकर्मियों, बुद्धिजीवियों, पाठकों से अनुरोध है कि इस बातचीत को पढ़ने के बाद अपने विचार हम तक पहुंचाएं,  [email protected] के जरिए।

– यशवंत सिंह, एडिटर, भड़ास4मीडिया

टीवी न्यूज चैनलों पर आप लोगों ने ढेर सारे स्टिंग आपरेशन देखे होंगे, लेकिन इन न्यूज चैनलों का स्टिंग कहीं पढ़ा-सुना-देखा नहीं होगा। आज आपके सामने पेश है एक टीवी न्यूज चैनल का स्टिंग आपरेशन। भड़ास4मीडिया की तरफ से दो लोगों ने अलग-अलग मोबाइल नंबरों से फोन कर सारी बातचीत रिकार्ड की। ये रिकार्डिंग भड़ास4मीडिया के पास सुरक्षित है। जितना भी कुछ रिकार्ड किया गया है, उसे हम टेक्स्ट रूप में यहां पेश कर रहे हैं। आप पढ़िए और मीडिया की धंधेबाजी के बारे में सोचिए। पांच लाख रुपये लेकर यूपी का स्टेट हेड बनाने का प्रस्ताव और 15 से 20 हजार रुपये लेकर रिपोर्टर नियुक्त करने का प्रस्ताव हमें भी दिया गया। हमारा मकसद स्टेट हेड या रिपोर्टर बनकर धंधा करना नहीं बल्कि धंधा करने में जुटे न्यूज चैनलों को बेनकाब करना था। सो, बातचीत होती चली गई और सारा खेल-तमाशा सामने आ गया। दरअसल, इस मामले का पता ही तब चला जब एक युवा पत्रकार ने हाल में ही लांच हुए चैनल वन न्यूज चैनल पर नीचे चलने वाली पट्टी को गौर से देखा। इसमें लिखा था कि अगर आप पत्रकार बनना चाहते हैं तो तुरंत फोन करें। साथ में फोन नंबर दिए गए थे। उस युवा पत्रकार ने जब फोन किया और सारी बात पता चली तो उसने भड़ास4मीडिया आफिस को पूरी जानकारी दी, संबंधित नंबर भी बताया। भड़ास4मीडिया की ओर से जब उसी नंबर पर फोन किया गया तो एक के बाद एक सारे रहस्य खुलते चले गए।

यहां हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि दोषी सिर्फ चैनल वन ही नहीं है। चैनल वन का दोष तो बस इतना है कि वह खुला खेल खेलने लगा और फंस गया। यह खेल ज्यादातर छोटे-बड़े न्यूज चैनल खेल रहे हैं। आज के जमाने में जो फंस जाए, पकड़ जाए, उसे ही चोर माना जाता है। यह भी सच है कि पकड़े छुटभैये ही जाते हैं जिन्हें चोरी की अक्ल नहीं होती। समझदार ‘चोर’ कभी गल्ती नहीं करता, इसलिए पकड़ा नहीं जाता। ऐसे मीडिया घराने, जिनकी दूसरी या तीसरी पीढ़ी नेतृत्व की भूमिका में है, कभी संदेह के घेरे में नहीं आते, आते भी हैं तो उनका कोई खास नुकसान नहीं होता। पर वे लोग जिनका मीडिया और सत्ता में कोई माई-बाप नहीं है और खुद मीडिया हाउस प्लान कर रहे हैं, या चला रहे हैं, उन्हें पग-पग पर ऐसे उल्टे-सीधे सलाहकार मिलते हैं कि अगर कुछ ही दिनों में मीडिया हाउस का भट्ठा न बैठ जाए तो ये सलाहकार खुद को सफल नहीं मानते। भड़ास4मीडिया के पास दिल्ली के एक ऐसे संगठित पत्रकार गिरोह के बारे में जानकारी मिली है जो नए न्यूज चैनल लांच कराने का ठेका लेता है, लांच कराता है, छह महीने-साल भर खाता-पीता है, और चैनल का भट्ठा बैठाकर, आर्थिक रूप से दिवालिया कर, निकल लेता है। फिर तलाशने लगता है कोई मुर्गा। खैर, बात कुछ और हो रही थी, होने कुछ और लगी। आप सभी मीडियाकर्मियों, बुद्धिजीवियों, पाठकों से अनुरोध है कि इस बातचीत को पढ़ने के बाद अपने विचार हम तक पहुंचाएं,  [email protected] के जरिए।

– यशवंत सिंह, एडिटर, भड़ास4मीडिया


पहली रिकार्डिंग….


-आपके यहां टीवी पर एक एड चल रहा है जर्नलिस्ट बनने के लिए। कैसे आवेदन करना होगा?

-आप कहां से बोल रहे हैं?

-लखनऊ से।

-आपका नाम क्या है?

-मेरा नाम दीपक है।

-आप अपना नंबर जरा बताएंगे?

-मेरा नंबर है- ………

-आप लखनऊ से ही बोल रहे हो?

-हां, आजकल लखनऊ आया हुआ हूं।

-आप कहीं काम कर रहे हो इस समय?

-हां, मैंने काम किया हुआ है।

-कहां?

-कई जगह, एमएच1 न्यूज में काम कर चुका हूं, एस-1 चैनल में भी रहा हूं।

-अच्छा, तो आप ऐसा कीजिए कि अपना सीवी [email protected] पर भेज दें।

-इसमें और क्या औपचारिकताएं होंगी?

-अभी हम लोग कोर्स कराकर ट्रेनीज रिपोर्टर के रूप में अप्वाइंट कर रहे हैं। कोर्स का कुछ फी है। आप ट्रेनीज रिपोर्टर को स्ट्रिंगर कह सकते हैं।  

-लेकिन हम तो सीनियर पोस्ट पर काम किए हैं।

-हां, वो तो ठीक है। मैंने इसीलिए आपको अपना सीवी भेजने को कहा है। जैसे ही कुछ होता है, आपको काल चला जाएगा।    

-आपके यहां शायद ब्यूरो चीफ या स्टेट हेड बनने के लिए जगह खाली चल रही है?

-नहीं-नहीं, उसके लिए हमारा दूसरा फंडा है।  

-कौन-सा फंडा?

-हमारा जैन टीवी वाला फंडा है।

-वह क्या होता है?

-जैसे, हम लोग जिनको ब्यूरो हेड बना रहे हैं, उनसे पांच लाख रुपये ले रहे हैं। ये पांच लाख देकर ब्यूरो नेटवर्क हमारे यहां जो संभालता है, वह ब्यूरो चीफ कम नेटवर्किंग डाइरेक्टर होता है। आपके पास अनुभव है, इसलिए आप तो पांच लाख रुपये हमे देकर यह काम करोगे नहीं? 

-नहीं-नहीं। ऐसी क्या बात है, मैं भी कर सकता हूं। कितने दिनों के लिए पांच लाख ले रहे हैं?

-दिनों के लिए नहीं।

-तो?

-उसके लिए ऐसा है कि आपका तीन साल का पीरियड रहेगा। और उस दौरान आपके अंडर में सौ विधानसभा क्षेत्र यूपी के रहेंगे। जो रिपोर्टर ट्रेनीज के रूप में आपके पास कोर्स करने आएंगे, वे विधानसभा स्तर पर 35,000 रुपये और जिला स्तर पर 50,000 रुपये जमा करेंगे। उसका दस-पंद्रह प्रतिशत कमीशन आपको मिल जाएगा।  

-पैंतीस हजार में किसका रहेगा?

-पैंतीस हजार रुपये विधानसभा स्तर का रिपोर्टर बनाने का रेट है।  मतलब की कोर्स कराने का है। डिस्ट्रिक्ट स्तर पर पचास हजार का है। 

-…अच्छा!! और पचास हजार रुपये में?

-पचास हजार जिला स्तर के रिपोर्टरों का रेट है। अगर आप स्टेट ब्यूरो संभालने के लिए हमे पांच लाख रुपये दे रहे हैं तो कोर्स करने के लिए 35 हजार, 50 हजार वाले जितने ट्रेनी होंगे, उनसे दस परसेंट मिल ही जाएंगे। और उनका कोर्स भी तीन माह का ही होगा। तीन माह बाद उन्हें अगर कहीं नौकरी मिलती है तो वे चले जाएंगे। उनकी जगह खाली होने पर आप फिर अपना नया रिपोर्टर रख सकते हैं।  

-उनको ट्रेनिंग कैसे देनी होगी? हमको ही देनी होगी या…?

-नहीं ट्रेनिंग आपको नहीं देनी होगी। पहले हम लोग उसको चार दिन ऑफिसियल कोर्स कराएंगे। दिल्ली के रिपोर्टर उनको रिपोर्टिंग की ट्रेनिंग देंगे। इसके बाद फील्ड में भेजेंगे प्रैक्टिल एक्सपीरिअंस करने। उस दौरान वह जो भी कवरेज करेगा, हम उसे प्रसारित भी करेंगे। हमारा 12-14 चैनलों से संबंध है। आधे घंटे का प्रोग्राम सब पर प्रसारित होगा। फील्ड में भेजते समय उनको प्रेस पहचानपत्र, लोगो आदि भी दिया जाएगा।  

-क्या उनको सेलरी भी आप लोग देंगे?

-कोर्स के दौरान हम उनको कुछ भी नहीं देंगे। जो न्यूज वे भेजेंगे, वे चैनल पर चलेंगे उनके नाम के साथ। उसका उन्हें बेनफिट मिलेगा। अन्य चैनलों पर उन्हें काम का अवसर मिलेगा। यदि उन्हें ऐसा अवसर नहीं मिलता है तो वह हमारे साथ चैनल कनेक्ट से जुड़े रह सकते हैं। हर स्टोरी के हिसाब से जो भी हमारे यहां देय तय होगा, वह उन्हें मिलेगा। उन्हें हमको बिजनेस भी देना होगा। ये तो हर चैनल का फंडा होता है न। …तो जो बिजनेस वह हमें देंगे,  उसका दस से पंद्रह प्रतिशत तक उन्हें कमीशन मिल जाएगा।  

-अगर स्टेट ब्यूरो हेड के लिए हम आपको पांच लाख रुपये दे रहे हैं तो हमारे काम की सेलरी मिलेगी या किसी अन्य तरीके से कोई भुगतान करेंगे?

-आपको बताया न कि पहले आपको वही कमीशन मिलेगा, जो विधानसभा, जिला स्तर के ट्रेनी आप अप्वाइंट करेंगे, उनसे जो पैसा मिलेगा, उसमें आपका दस प्रतिशत हिस्सा। फर्ज करिए कि सौ विधानसभा का पैंतीस हजार रुपये के हिसाब से आपका कमीशन हो जाएगा करीब साढ़े तीन लाख रुपये। यदि आपके ब्यूरो क्षेत्र में 15 जिले पड़ते हैं तो डेढ़-दो लाख उसमें भी मिल जाएंगे। …तो इस तरह आपको अपना पैसा निकालना है। यदि वे ट्रेनीज बिजनेस भी देते हैं तो उसका दस-पंद्रह प्रतिशत कमीशन आपको भी मिलेगा।  

-अच्छा… ठीक है। दिल्ली आकर आपसे मिलता हूं।

-ठीक है जी।


दूसरी रिकार्डिंग…..


-ये क्या चैनल नंबर वन का दफ्तर है?

-जी हां।

-मैं प्रभात बोल रहा हूं नई दिल्ली से। मैंने आपके चैनल पर देखा था कि यूपी में रिपोर्टर की जरूरत है। ब्यूरो चीफ चाहिए?

-जरा रुकिए, आपसे संबंधित व्यक्ति से बात करवा देता हूं।

-हलो…..

-हलो, जी, अपना फोन नंबर बताइए?

-जी, मेरा फोन नंबर है …………..

-अच्छा, तो बताइए आप हमसे क्या चाहते हैं?

-मैं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़ना चाहता हूं। आपके चैनल से जुड़ना चाहूं तो मुझे तो क्या करना पड़ेगा?

-आप मेरा मेलआईडी पता नोट करिए। …….इस पते पर सीवी भेज दीजिए। देखिए हमारे यहां अप्वाइंटमेंट का फंडा जरा दूसरी तरह का है। थ्री मंथ का कोर्स है। आप जहां से करना चाहो। किसी भी जिले से या स्टेट से कर सकते हो। चार दिन की ऑफिसियल ट्रेनिंग होगी। फिर फिल्ड में भेज दिया जाएगा। जो न्यूज दोगे, उसका कोई पेमेंट नहीं होगा। आपका नाम चलेगा। उसका आपको फायदा मिलेगा।  

-मैंने पहले काम किया है। अनुभवी रिपोर्टर हूं। आपके यहां स्टेट का ब्यूरो चीफ बनना चाहूं तो?

-देखिए ब्यूरो चीफ बनने के लिए आपको हमे पांच लाख रुपये देने होंगे।  

-ये पांच लाख किस तरह देना होगा?

-नेटवर्किंग डाइरेक्टर की पोस्ट है। ब्यूरो चीफ आप ही रहेंगे लेकिन नेटवर्किंग डाइरेक्टर के रूप में काम करेंगे। जो पांच लाख रुपये देंगे, रिफंडेबल नहीं होंगे। आपको सौ विधानसभा क्षेत्रों और जिला स्तर पर रिपोर्टर बनाने होंगे। विधानसभा क्षेत्र के रिपोर्टर 35-35 हजार रुपये देंगे और जिला स्तर के 50-50 हजार रुपये। उसमें आपका दस प्रतिशत कमीशन होगा। हम रिपोर्टर बनाएंगे तो भी उसमें से दस प्रतिशत आपको देंगे। हम भी लगातार रिपोर्टर बना रहे हैं।

-पांच लाख रुपये दे दूं तो क्या मुझे आपकी कंपनी कुछ मानदेय भी देगी?

-कोई सेलरी नहीं। अभी कुछ तय नहीं। आपको तीन माह में अपना पैसा निकाल लेना होगा। 

-ब्यूरो चीफ का नाम क्यों, ये काम तो बिजनेस डेवलपमेंट का हुआ न?

-आप जो सौ लोगों को रिपोर्टर रखेंगे, वे आपको रिपोर्ट करेंगे। ओवरआल ब्यूरो चीफ एक होगा।  

-वह कौन होगा?

-जो दस-पंद्रह साल अनुभवी होगा। जो काफी परिपक्व होगा। अच्छा बंदा होगा।  

-तीन माह बाद क्या मैं हटा दिया जाऊंगा?

-नहीं। तीन साल तक रहेंगे। उसके बाद आपको रेन्यूवल कराना होगा।

-रेन्यूवल में कोई चार्ज लगेगा क्या?

-नहीं। आगे हो सकता है कि आपकी सेलरी की भी बात हो जाए।  

-मैं जो रिपोर्टर बनाऊं, उसमें चैनल का हस्तक्षेप होगा क्या?

-जो आप बना देंगे, वही काम करेगा। हमारा कोई हस्तक्षेप नहीं होगा।  हां, हां, थोड़ा यह होना चाहिए कि न्यूज पर पकड़ हो और कभी फोनो चला सके।

-मतलब, थोड़ा बहुत पढ़ सके, समझ सके और थोड़ा तेज हो दूसरे तरह का, मतलब धूर्त हो…?

-आप जो कह रहे हैं, वो सही है। कोई भी पैसा फंसाएगा तो निकालना तो चाहेगा ही। 

-तो क्या इससे चैनल की रेपुटेशन पर कोइ फ़र्क़ नहीं पड़ेगा?

-रेपुटेशन पर फ़र्क़ तो पड़ेगा, आप चाहोगे तो बिगाड़  दोगे, चाहोगे तो बना दोगे,.बट ये है कि तरीक़ा आपके उपर डीपेंड करता है कि आप कैसे डील करते हो. हम यह चाहेंगे कि जो कुछ भी आप करते हो वो बात हम तक ना पहुंचे,

-अच्छा! मतलब जो भी कुछ होता है उल्टा-सीधा, तो उसे अपने तक समझ लूँ?

-हाँ, आप अपने तक ही समेट लो, अगर लीगल है तो हम साथ  दे भी सकते हैं, लेकिन अगर  कुछ इलीगल  है तो आप समझ्ते ही हैं, चैनल बदनामी नहीं झेलेगा.   

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