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दुख-दर्द

स्टिंगर पुलिस के लपेटे में, चैनल खामोश!

मदन मोहन तंवरएक स्ट्रिंगर, जिसे इंडिया न्यूज ने अपनी टीआरपी बढा़ने के लिए बखूबी इस्तेमाल किया, उसके कैमरे में कैद स्टोरी को एक्सक्लूसिव स्टोरी बताकर आन एयर किया, इस स्टोरी पर वाहवाही लूटी लेकिन जब उसी स्टोरी को कवर करने की वजह से पुलिस ने उस स्टिंगर पर फर्जी मुकदमा दर्ज कर लिया तो चैनल ने मदद करने की बजाय उससे अपना मुंह मोड़ लिया। ये सब कुछ हुआ है देश की राजधानी दिल्ली में। बतौर स्टिंगर इंडिया न्यूज में कार्यरत मदन मोहन तंवर (उम्र 48 साल) ने दिल्ली के साउथ वेस्ट इलाके में 08.07.2009 को डाबरी थाने से महज 70 मीटर की दूरी पर एक घर पर हो रहे पथराव को कवर करने पहुंचे। कुछ रसूखदार दिल्ली पुलिस से मिलकर गुलाब सिंह के घर पर कब्जा करना चाहते थे और इसी कवायद में कई बार गुलाब सिंह के घर पर बदमाशों ने तोड़फोड़ की लेकिन दिल्ली पुलिस ने मामला तक दर्ज नहीं किया।! पीड़ित गुलाब सिंह ने इसकी शिकायत डीसीपी से लेकर पुलिस कमिश्नर तक की लेकिन महज आश्वासन के सिवाय कुछ नहीं मिला। गुलाब सिंह के घर पर कई बार पथराव हुआ और गुलाब सिंह ने कई बार 100 नंबर पर फोन किया पर पीसीआर वाले भी उल्टा पीड़ित को ही धमकाने लगे। दिल्ली पुलिस ने हद तो तब कर दी जब उसी के डाबरी थाने के एसआई सोहनवीर रसूखदार के छत पर खड़े होकर गुलाब सिंह के घर पर पथराव करवा रहे थे। उनकी इस करतूत को अपने कमरै में कैद कर लिया मंदन मोहन तंवर ने।

मदन मोहन तंवरएक स्ट्रिंगर, जिसे इंडिया न्यूज ने अपनी टीआरपी बढा़ने के लिए बखूबी इस्तेमाल किया, उसके कैमरे में कैद स्टोरी को एक्सक्लूसिव स्टोरी बताकर आन एयर किया, इस स्टोरी पर वाहवाही लूटी लेकिन जब उसी स्टोरी को कवर करने की वजह से पुलिस ने उस स्टिंगर पर फर्जी मुकदमा दर्ज कर लिया तो चैनल ने मदद करने की बजाय उससे अपना मुंह मोड़ लिया। ये सब कुछ हुआ है देश की राजधानी दिल्ली में। बतौर स्टिंगर इंडिया न्यूज में कार्यरत मदन मोहन तंवर (उम्र 48 साल) ने दिल्ली के साउथ वेस्ट इलाके में 08.07.2009 को डाबरी थाने से महज 70 मीटर की दूरी पर एक घर पर हो रहे पथराव को कवर करने पहुंचे। कुछ रसूखदार दिल्ली पुलिस से मिलकर गुलाब सिंह के घर पर कब्जा करना चाहते थे और इसी कवायद में कई बार गुलाब सिंह के घर पर बदमाशों ने तोड़फोड़ की लेकिन दिल्ली पुलिस ने मामला तक दर्ज नहीं किया।! पीड़ित गुलाब सिंह ने इसकी शिकायत डीसीपी से लेकर पुलिस कमिश्नर तक की लेकिन महज आश्वासन के सिवाय कुछ नहीं मिला। गुलाब सिंह के घर पर कई बार पथराव हुआ और गुलाब सिंह ने कई बार 100 नंबर पर फोन किया पर पीसीआर वाले भी उल्टा पीड़ित को ही धमकाने लगे। दिल्ली पुलिस ने हद तो तब कर दी जब उसी के डाबरी थाने के एसआई सोहनवीर रसूखदार के छत पर खड़े होकर गुलाब सिंह के घर पर पथराव करवा रहे थे। उनकी इस करतूत को अपने कमरै में कैद कर लिया मंदन मोहन तंवर ने।

एसआई सोहनवीर को जब इसका अहसास हुआ तो जनाब ने अपनी करतूतों का खुलासा होता देख छिपने की बहुत कोशिश की लेकन तब तक वह कैमरे में कैद हो चुका था। इससे पहले गुलाब सिंह ने 10 बार 100 नंबर को फोन किया लेकिन पुलिस नहीं आई और जो आई भी तो वह बदमाशों के पथराव का तमाशबीन रहे लेकिन मदन मोहन तंवर ने अपनी जान पर खेलकर अपने कैमरे में उस पथराव को कैद किया। कवरेज के दौरान कई बार मदन मोहन तंवर पर भी पथराव किया गया लेकिन उन्होंने अपना काम जारी रखा। कैमरा देख कर जब एसआई सोहनवीर छत से नीचे आये तो इंडिया न्यूज के स्टिंगर मदन मोहन तंवर ने उनसे पूछा कि उपर खड़े होकर आप कौन सी ड्यूटी कर रहे थे तो एसआई सोहनवीर ने स्टिंगर मदन मोहन तंवर को धमका दिया। साथ ही इस स्टोरी को न चलाने की नसीहत दे डाली। एसआई सोहनवीर गुलाब सिंह के घर वालों को ही घसीटते थाने ले गए और इस पूरे मामले को मदन मोहन तंवर ने कैद किया। एक आदमी पर होते दिल्ली पुलिस की सितम की पोल खोल कर रख दी। जब इस पूरे मामले को मदन मोहन तंवर ने इंडिया न्यूज को बताया तो इंडिया न्यूज ने मदन मोहन तंवर को सीधे ऑफिस बुलाकर इस स्टोरी को एक्सक्लूसिव बताकर चलाया और इस मामले पर चार बार फोनो भी लिया।

अगले दिन मदन मोहन तंवर को गुलाब सिंह ने जानकारी दी कि मेरे चार परिवार वालों के साथ दिल्ली पुलिस ने आपके उपर भी एफआईआर दर्ज कर दी और मेरे भतीजे और पत्नी को गिरफ्तार कर लिया है। दिल्ली पुलिस ने गुलाब सिंह के परिवार समेत पत्रकार मदन मोहन तंवर के उपर पुलिस के साथ मारपीट और दंगा फसाद करने का मामला दर्ज कर लिया। तंवर को सच दिखाने की सजा दी गई। जो रसूखदार अजय पाल कब्जा करना चाहता था उसके उपर कोई कार्रवाई नही हुई। पत्रकार मदन मोहन तंवर ने जब इस बारे में इंडिया न्यूज को बताया तो चैनल ने उनकी आवाज उठाना तो दूर, उल्टा मदन मोहन तंवर से ही कन्नी काटने लगे और उनकी स्टोरी चलाने से साफ इंनकार कर दिया। लाचार हो मदन मोहन तंवर ने कई दूसरे चैनलों के रिपोर्टरों से भी मदद मांगी लेकिन खबरों के भूखे चैनलों को उनकी इस स्टोरी में कुछ नया नही दिखा और एक भी चैनल इस खबर को दिखाने की हिम्मत नहीं जुटा पाया। दिल्ली के जिस शिवाजी स्टेडियम मे तमाम टीवी पत्रकार रात को मिलते है उसी स्टेडियम में मदन मोहन तंवर ने सभी को देर रात पूरी स्टोरी बताई लेकिन किसी ने उनकी मदद नही की। लाचार हो पत्रकार मदन मोहन तंवर तीन दिन तक इंडिया न्यूज के आफिस के चक्कर काटते रहे लेकिन चैनल ने कोई मदद नही की। मदन मोहन तंवर को इंडिया न्यूज चैनल ने ना तो कोई आई कार्ड जारी किया है और न ही अथारिटी लेटर दिया। दिया है चैनल आईडी माईक।

एफआईआर

उधर दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में दलील दी है कि तंवर फर्जी पत्रकार है और उसने एक साजिश के तहत दिल्ली पुलिस को फंसाने की कोशिश की है। मदन मोहन तंवर ने कई बार इंडिया न्यूज चैनल से कहा कि कम से कम मुझे आई कार्ड या कोई ऐसा प्रूफ दे दीजिए जिससे अपने आपको पत्रकार साबित कर सकूं लेकिन चैनल ने मना कर दिया। यहां तक कि जो स्टोरी मदन मोहन तंवर के नाम से चली है, उसकी कॉपी तक देने से मना कर दिया। अब पत्रकार मदन मोहन तंवर जाएं तो जाएं कहां? 700 रुपये प्रति स्टोरी पर काम करने वाले दिल्ली के इस पत्रकार की माली हालत इतनी खराब है कि ये कोर्ट में अपना वकील तक नही कर सकता। मदन मोहन तंवर की इकलौती बेटी है जिसकी 25 दिन पहले ही शादी हुई है। परिवार में उनकी पत्नी है जो हृदय रोग की मरीज हैं। न्यूज चैनलों में स्टिंगरों की क्या हालत है, ये शायद आप सभी को बखूबी पता है। पत्रकार मदन मोहन तंवर आज बेबस और लाचार है। मुझे खुद पर भी शर्म आती है कि मैं भी एक रिपोर्टर हूं और इस बेबस पत्रकार की चाह कर भी मदद नही कर पा रहा क्योंकि मैं एक महज कीड़े की तरह हूं जिसे इस अजगर रूपी चैनल ने अपने मुंह में दबा लिया लेकिन मुझमें सच को सामने लाने का जज्बा कम नहीं हुआ और मैं आप सभी से ये गुजारिश करता हूं कि इस पत्रकार की मदद करें और उसकी आवाज का साथ दें। इस स्टोरी की सच्चाई की मैं लिखित रूप से गवाही देने को तैयार हूं। 

इस उम्मीद के साथ आपसे अलविदा ले रहा हूं कि आप सभी इस पत्रकार का साथ देगें क्योंकि आखिर स्टिंगर भी हमारा एक अंग है! कुछ गलत कह दिया हो तो आप सभी मुझे मॉफ करें।

जगवाणी, पंजाब केसरी और पंजाब टुडे के साथ काम कर चुके पत्रकार मदन मोहन तंवर से संपर्क 09213544723 के जरिए किया जा सकता है।


इस रिपोर्ट के लेखक अविनाश कुमार टीवी जर्नलिस्ट हैं। उनसे संपर्क [email protected] के जरिए किया जा सकता है।
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