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रिटायर हो गए विष्णु नागर

[caption id="attachment_17857" align="alignleft" width="71"]विष्णु नागरविष्णु नागर[/caption]बहुत कम लोग मीडिया से रिटायर होते हैं. वह भी बेदाग. उनमें से विष्णु नागर भी हैं. वरिष्ठ पत्रकार और साहित्यकार विष्णु नागर ने 60 साल की उम्र होने के बाद सक्रिय पत्रकारिता से संन्यास लेने का फैसला कर लिया. वे घर पर रहते हुए बहुत कुछ लिखना-रचना चाहते हैं.

विष्णु नागर

विष्णु नागर

बहुत कम लोग मीडिया से रिटायर होते हैं. वह भी बेदाग. उनमें से विष्णु नागर भी हैं. वरिष्ठ पत्रकार और साहित्यकार विष्णु नागर ने 60 साल की उम्र होने के बाद सक्रिय पत्रकारिता से संन्यास लेने का फैसला कर लिया. वे घर पर रहते हुए बहुत कुछ लिखना-रचना चाहते हैं.

उन्होंने अपने इस फैसले से नई दुनिया के प्रधान संपादक आलोक मेहता को अवगत कराया तो आलोक मेहता ने शुरुआत में तो मना किया पर बाद में विष्णु नागर के जिद पर अड़े रहने के कारण उनका इस्तीफा बेमन से स्वीकार कर लिया. भड़ास4मीडिया से बातचीत में विष्णु नागर ने बताया कि वे रोजमर्रा के रुटीन काम से अलग होकर कुठ ठोस लिखना पढ़ना चाहते हैं, इसी कारण रिटायर होने का फैसला किया. विष्णु नागर संडे नईदुनिया के संपादक पद पर कार्यरत थे.

उन्होंने वर्ष 2008 के सितंबर महीने में कादंबिनी के संपादक पद से इस्तीफा देकर नई दुनिया ज्वाइन किया था. करियर की शुरुआत वर्ष 1971 में दिल्ली आकर की. 1974 में विष्णु नागर टाइम्स आफ इंडिया की ट्रेनिंग स्कीम में शामिल हुए. उसके बाद वर्ष 1997 तक नवभारत टाइम्स के हिस्से बने रहे. पूरे 23 साल तक एक ही जगह जमे रहे. 1998 में उन्होंने एचटी ग्रुप ज्वाइन किया. हिंदुस्तान के नेशनल ब्यूरो में काम किया. पांच साल तक कादंबिनी के संपादक रहे. बीच में वे दो साल तक जर्मनी में रहे. वहां रेडियो डायचेवेले की हिंदी सर्विस के संपादक के रूप में काम किया. विष्णु जी की रिटायरमेंट के बाद वाली सबसे क्रिएटिव पारी के लिए हम सभी मीडियाकर्मी शुभकामनाएं देते है और पत्रकारिता में विष्णु नागर के लंबे रचनात्मक योगदान के लिए आभार जताते हैं.

विष्णु नागर ने 2008 में जब कादंबिनी से इस्तीफा दिया थो तो उनकी खबर भड़ास4मीडिया पर प्रकाशित करने के साथ-साथ उनकी दो कविताएं भी प्रकाशित की गई थीं. उन कविताओं को पढ़ने के लिए क्लिक कर सकते हैं- विष्णु नागर

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0 Comments

  1. s bharatiya

    August 14, 2010 at 3:50 pm

    yeh sukun dene vali suchana hai. is faisale ke liye nagar ji ko badhaee.

    aap swasth rahen, rachana karm men juten rahen.

  2. vivek shukla

    August 15, 2010 at 11:57 am

    हालांकि किसी का रिटायर होना अपने आप में कोई खबर नहीं होनी चाहिए पर विष्णु नागर जी के सक्रिय पत्रकार जीवन की पारी की समाप्ति पर कष्ट हो रहा है। काश, आलोक मेहता जी उन्हें कुछ बरसों तक खबरों क दुनिया से और जोड़कर रख लेते तो अच्छा रहता। मुझे उनके साथ हिन्दुस्तान में सालों काम करने का मौका मिला। उनसे बहुत कुछ सीखने की कोशश करता रहा। मेरे जैसा मामूली सा पत्रकार उनकी लेखनी पर टिप्पणी क्या करेगा पर मैं इतना तो अवश्य ही कह सकता हूं कि आपको उनकी तरह से कमजोर,गरीब, गुरबा के हक में लिखने वाला दूसरा लेखक फिर शायद न मिले। अगर किसी को नागर जी जैसा सच्चा और अच्छा इंसान मिले तो बताना। मेरी उनसे हमेशा यही अपेक्षा और मांग रहेगी कि वे लगातार ‘गर्मागर्म’ लिखते रहे।

    विवेक शुक्ला

  3. Sudhir.Gautam

    August 16, 2010 at 6:32 am

    वर्तमान मीडिया में जहाँ चारों और से आरोप प्रत्यारोप की बारिश में सभी और छींटे पड़ रह हैं, ऐसे में विष्णु नागर सरीखे लोग एक अनुकरणीय व्यक्तित्व के साथ रिटायर हो रहे हैं…ये हम सभी के लिए और आने वाले मीडिया से जुड़ने वाले नए साथियों के लिए भी एक नायाब उदाहरण हैं.
    शांतिपूर्ण सह अस्तित्व और अपने भीतर के शोर को उगलने की तीव्र उत्कंठा दर्शाती ये पंक्तियाँ पर्याप्त हैं विष्णु नागर जी को समझने के लिए…
    “मेरे भीतर इतना शोर है
    कि मुझे अपना बाहर बोलना
    तक अपराध लगता है
    जबकि बाहर ऐसी स्थिति है
    कि चुप रहे तो गए।”
    हम सभी को उनके मंगल जीवन एवम घर पर रह कर ठोस लिखने की उनकी कामना पूर्ती के लिए ईश्वर से प्रार्थना करनी चाहिए. वे अनुकरणीय एवम आदर्श हैं… क्योंकि सिर्फ और सिर्फ विष्णु नगर में हे ये लिखने का माद्दा था की….
    ” जब तक जिंदा हूँ गलतियाँ करता रहूँगा
    अगर मैं अपनी किसी भी गलती के लिए माफी न मांगूं
    तो समझना कि मैं हूँ नहीं।”

  4. anil pande

    August 17, 2010 at 7:07 pm

    बेदाग !

    Ha………Ha………Ha………..

  5. Aaay mahajan

    August 20, 2010 at 7:00 am

    Good luck dada

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