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वीओआई में पैसे बचाने और पैसे बनाने की मुहिम !

त्रिवेणी ग्रुप अपने नए चैनल वायस आफ इंडिया को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की कवायद में जुटा है। इसके लिए प्रबंधन अब बिजनेस एसोसिएट्स की तलाश धड़ल्ले से कर रहा है। इस बाबत दिल्ली से लेकर मध्य प्रदेश तक के अखबारों में विज्ञापन दिया जा रहा है। पैसे लेकर बिजनेस एसोसिएट्स को नियुक्त करने की इस मुहिम का असर खबरों पर भी पड़ेगा, यह तय माना जा रहा है। ऐसी आशंका व्यक्त की जा रही है कि बिजनेस एसोसिएट्स फील्ड से पैसे लेकर खबरें चलवाने के लिए काम करेंगे। बिजनेस एसोसिएट्स अप्वाइंट करने और चुनाव वाले प्रदेशों से बिजनेस लाने के लिए पिछले दिनों चैनल के एमडी मधुर मित्तल और इलेक्शन मीडिया कंपेनर राजेश बादल ने दो प्रदेशों का दौरा संयुक्त रूप से किया। राजेश बादल इन दिनों प्रबंधन के आंख के तारे बने हुए हैं।

त्रिवेणी ग्रुप अपने नए चैनल वायस आफ इंडिया को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की कवायद में जुटा है। इसके लिए प्रबंधन अब बिजनेस एसोसिएट्स की तलाश धड़ल्ले से कर रहा है। इस बाबत दिल्ली से लेकर मध्य प्रदेश तक के अखबारों में विज्ञापन दिया जा रहा है। पैसे लेकर बिजनेस एसोसिएट्स को नियुक्त करने की इस मुहिम का असर खबरों पर भी पड़ेगा, यह तय माना जा रहा है। ऐसी आशंका व्यक्त की जा रही है कि बिजनेस एसोसिएट्स फील्ड से पैसे लेकर खबरें चलवाने के लिए काम करेंगे। बिजनेस एसोसिएट्स अप्वाइंट करने और चुनाव वाले प्रदेशों से बिजनेस लाने के लिए पिछले दिनों चैनल के एमडी मधुर मित्तल और इलेक्शन मीडिया कंपेनर राजेश बादल ने दो प्रदेशों का दौरा संयुक्त रूप से किया। राजेश बादल इन दिनों प्रबंधन के आंख के तारे बने हुए हैं।

प्रबंधन की हर मुहिम में आंख मूदकर साथ दे रहे हैं। इसी के चलते उन्हें ईनाम भी मिला है। उन्हें डिप्टी ग्रुप मैनेजिंग एडिटर बना दिया गया है। साथ ही उन्हें एक्सक्लूसिवली और इंडीपेंडेंटली रीजनल चैनलों को हैंडल करने का काम दिया गया है। इसके चलते अब तक रीजनल का काम देख रहे मुकेश कुमार  थोड़े मुश्किल में पड़ गए हैं।

राजेश बादल के कमान संभाल लेने से वीओआई के मध्य प्रदेश के विवादित ब्यूरो चीफ एसपी त्रिपाठी ने सबसे ज्यादा राहत की सांस ली है। पिछले दिनों उन पर उनकी टीम की एक लड़की ने दुर्व्यवहार के आरोप लगाए थे। शिकायत दिल्ली में चैनल प्रबंधन से भी की। चैनल की तरफ से कार्रवाई न होते देख उसने भोपाल में एफआईआर लाज कराया। इस मामले को भोपाल के अखबारों व चैनलों ने फ्लैश किया था। पर वीओआई चैनल प्रबंधन ने कुछ लोगों की मदद से एसपी त्रिपाठी को क्लीन चिट दे दी। एसपी त्रिपाठी ने प्रबंधन द्वारा दिए गए बिजनेस टारगेट को भी काफी हद तक पूरा करने की कोशिश की है, जिससे प्रबंधन उनसे प्रसन्न है।  

आर्थिक स्थिति सुधारने की कवायद के तहत त्रिवेणी प्रबंधन ने खर्चों में कटौती का अभियान छेड़ दिया है। सूत्रों के अनुसार इसके तहत मिलनेयर चैनल और रीजनल बांग्ला चैनल को अभी स्थगित करने की तैयारी की जा रही है। प्रबंधन चुनाव वाले राज्यों मध्य प्रदेश और राजस्थान के चैनलों को फटाफट आगे लाने के प्रयास में है। मुश्किल ये है कि मिलनेयर और बांग्ला चैनल को अपलिंक करने का परमिशन सूचना प्रसारण मंत्रालय से मिल चुका है पर प्रबंधन इसकी बजाय मध्य प्रदेश- छत्तीसगढ़ और राजस्थान चैनल, जहां से जल्द रेवेन्यू आने के आसार हैं, को पहले लाने के जुगाड़ में है। इसके लिए तकनीकी दिक्कतों को दूर करने की खातिर बाजीगरी जारी है।

इस पूरे घटनाक्रम के दौर में वीओआई कर्मी भी थोड़े मुश्किल में आ गए हैं। इसे चैनल प्रबंधन द्वारा खर्चे में कटौती का अभियान कहें या फिर लेटलतीफी, इन कर्मियों की सेलरी बैंक में पहुंचने में लगातार देरी हो रही है। पहले जहां सेलरी हर महीने की 31 तारीख को मिल जाया करती थी वो आगे बढ़ते बढ़ते अब 7 तारीख तक पहुंच गई है। 31 के बाद सेलरी 3 को दी जाने लगी, फिर 7 को। ऐसी आशंका है कि सेलरी देने की तारीख इस महीने अभी और आगे खिसक सकती है।  सूत्रों ने बताया कि इस महीने की सेलरी अभी वीओआई कर्मियों के खाते में नहीं गई है।

हाल-फिलहाल चैनल छोड़कर गए किशोर मालवीय, स्नेहांशु शेखर और कमल शर्मा की सेलरी रोक ली गई है। बताया जाता है कि पिछले दिनों वीओआई की एक एंकर ने सहारा समय न्यूज चैनल ज्वाइन कर लिया। सारी औपचारिकता पूरी होने के बावजूद उसकी सेलरी अभी तक नहीं दी गई है। किशोर मालवीय की सेलरी भी अभी तक नहीं रिलीज की गई है। बताया जाता है कि किशोर मालवीय ने भी इसी के चलते वीओआई की तरफ से मिले लैपटाप और ब्लैक बेरी मोबाइल को लौटाया नहीं है। उनका कहना है कि एक हाथ दो एक हाथ लो । सूत्रों का कहना है कि चैनल प्रबंधन द्वारा पैसे बचाने और पैसे बनाने की मुहिम के तहत चैनल के स्ट्रिंगरों पर भी गाज गिरी है। उन्हें प्रत्येक स्टोरी पर पहले हजार रुपये दिए जाते थे, उसे कम करके 500 रुपये कर दिया गया है।  

इन सारे मुद्दों पर चैनल के सीईओ राहुल कुलश्रेष्ठ से जब भड़ास4मीडिया ने बात की तो उनका कहना था कि बिजनेस एसोसिएट्स चैनल की एक रणनीति के तहत अप्वाइंट किए जा रहे हैं। इस रणनीति का खुलासा नहीं किया जा सकता। चैनल में आर्थिक तंगी के सवाल पर उनका कहना था कि यह बात पूरी तरह बेबुनियाद है। जिन लोगों के नो ड्यूज वैगरह क्लीयर नहीं हैं, उन्हें औपचारिकता पूरी होने के बाद सेलरी दे दी जाएगी। मिलनेयर और बांग्ला चैनल को अभी टालने और राजस्थान व मध्य प्रदेश चैनल को पहले आन एयर करने के सवाल पर राहुल ने बताया कि हम लोग सभी चैनलों पर काम कर रहे हैं। जिसकी तैयारी पहले हो जाएगी, उसे पहले लांच किया जाएगा। हमें आगे पीछे सभी चैनल लांच करने हैं। इसे लेकर कोई अन्य अर्थ निकालना पूरी तरह गलत है। उन्होंने कहा कि चैनल को सही दिशा और स्वरूप में लाने के लिए प्रयास किया जा रहा है।

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