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वीओआई का शटर डाउन, बवाल शुरू

वायस आफ इंडिया उर्फ वीओआई का शटर डाउन हो चुका है। नए डायरेक्टर और सीईओ अमित सिन्हा की नेकनीयती और सदिच्छा के बावजूद इस दुर्भाग्यशाली चैनल का भाग्य नहीं बदल सका। कल रात से वीओआई के सभी चैनलों का प्रसारण बंद हो चुका है। चैनल के आफ एयर होने के पीछे भड़ास4मीडिया को तीन कहानियां पता चली हैं। पहली बात तो यह कि नए निदेशक अमित सिन्हा और चैनल के परंपरागत कर्ताधर्ता मित्तल बंधुओं के बीच जो डील साइन होनी की बात प्रचारित की गई थी, दरअसल वह डील आज तक साइन ही नहीं हुई और न मित्तल बंधु डील साइन करने के मूड में हैं। इस कारण चाहकर भी अमित सिन्हा चैनल की दशा-दिशा बदल नहीं सकते क्योंकि उनके पास अधिकृत तौर पर अधिकार हैं ही नहीं।  मित्तल बंधु अमित सिन्हा से पैसे लेते रहे पर डील साइन करने को टालते रहे।

वायस आफ इंडिया उर्फ वीओआई का शटर डाउन हो चुका है। नए डायरेक्टर और सीईओ अमित सिन्हा की नेकनीयती और सदिच्छा के बावजूद इस दुर्भाग्यशाली चैनल का भाग्य नहीं बदल सका। कल रात से वीओआई के सभी चैनलों का प्रसारण बंद हो चुका है। चैनल के आफ एयर होने के पीछे भड़ास4मीडिया को तीन कहानियां पता चली हैं। पहली बात तो यह कि नए निदेशक अमित सिन्हा और चैनल के परंपरागत कर्ताधर्ता मित्तल बंधुओं के बीच जो डील साइन होनी की बात प्रचारित की गई थी, दरअसल वह डील आज तक साइन ही नहीं हुई और न मित्तल बंधु डील साइन करने के मूड में हैं। इस कारण चाहकर भी अमित सिन्हा चैनल की दशा-दिशा बदल नहीं सकते क्योंकि उनके पास अधिकृत तौर पर अधिकार हैं ही नहीं।  मित्तल बंधु अमित सिन्हा से पैसे लेते रहे पर डील साइन करने को टालते रहे।

जुलाई बीत जाने के बाद डील की एक शर्त के तहत यह डील अमान्य हो चुकी है और साइन किए जाने योग्य नहीं है। इस कहानी में कितनी सच्चाई है, इस बारे में दावे से कुछ कहा नहीं जा सकता लेकिन चैनल से जुड़े उच्च पदस्थ सूत्र डील से संबंधित यह बात दावे के साथ कह रहे हैं। दूसरी बात जो पता चली है वह यह कि चैनल के जो समस्त उपकरण हैं, वह जूम कंपनी से किराए पर लिए गए हैं। वीओआई पर इस कंपनी के करोड़ों रुपये बकाया है। वीओआई ने पैसा नहीं दिए तो जूम के लोग कोर्ट में चले गए और कुछ दिनों पहले मुकदमा जीत गए। कोर्ट के आदेश के अनुरुप जूम वाले अपने सामान कभी भी उठा सकते हैं। इस कारण मित्तल बंधुओं ने चैनल के कीमती सामान पहले ही हटा लेने और चैनल बंद करने के लिए सक्रिय हो गए। उनकी मंशा यह थी की जूम वाले जब तक आएं, तब तक वे खुद ही करोड़ों रुपये के सामान पार कर दें। तीसरी और सबसे बड़ी वजह है कर्मचारियों को कई महीनों से सेलरी न मिलना।

वीओआई में काम करने वाले किस कदर परेशान हैं, इसका अंदाजा वीओआई के किसी कर्मी से बात करने से लग जाता है। अभी दिसंबर महीने की भी सेलरी इन लोगों को नहीं मिली है। फीस न जमा होने से कई लोगों के बच्चों के नाम स्कूल से कट चुके हैं। कई लोग अपनी पत्नियों को अपने गांव पहुंचा चुके हैं। लोग अभी तक सिर्फ एक उम्मीद पर काम करते जा रहे थे कि कभी तो सबेरा होगा। पर यह सबेरा होने से पहले ही फिर रात हो गई। चैनल के नए और पुराने मालिकानों के झगड़े के कारण चैनल बंद हो गया और कर्मचारियों को नौकरी व सेलरी, दोनों मारी गई। सूत्रों का कहना है कि कर्मचारी अब आर-पार की लड़ाई लड़ने के मूड में हैं। वे किसी हालत में अपनी कई महीनों की सेलरी छोड़ने के मूड में नहीं हैं। इन कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें चैनल के शीर्ष प्रबंधन में क्या झगड़ा चल रहा है, इससे कुछ लेना-देना नहीं है। उन्हें हर हालत में सेलरी चाहिए।

बताया जा रहा है कि आज करीब 400 कर्मचारियों के हस्ताक्षर से युक्त पत्र वीओआईकर्मी सूचना और प्रसारण मंत्री को सौंपने जा रहे हैं जिसमें उनकी सेलरी हर हालत में दिलाने और वीओआई प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की गई है। वीओआई कर्मियों का कहना है कि वीओआई के मालिक मित्तल बंधुओं के बाद दूसरे कामों के लिए करोड़ों रुपये हैं लेकिन सेलरी देने के लिए पैसे नहीं है, यह बात समझ में नहीं आती। जो कर्मचारी भूखे पेट चैनल चला रहे हैं, उनकी चिंता किसी को नहीं है। सबको सिर्फ अपनी फिक्र है। उधर, वीओआई में कल रात हुए बवाल को दूसरे न्यूज चैनलों के रिपोर्टरों और कैमरामैनों ने कवर तो किया लेकिन किसी ने अपने चैनल पर दिखाया नहीं। सूत्रों का कहना है कि कर्मचारियों के बवाल से निपटने के लिए मित्तल बंधुओं ने चैनल में गुंडे भेज रखे थे ताकि कर्मचारी मनमानी नहीं कर सकें। इस पूरे घटनाक्रम पर जानकारी के लिए भड़ास4मीडिया ने जब वीओआई के निदेशक अमित सिन्हा और ग्रुप एडिटर किशोर मालवीय को फोन किया तो किसी ने भी फोन नहीं उठाया।

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