अमित ने आरोपों को बेबुनियाद और छवि खराब करने की कोशिश बताया : अमित सिन्हा और मित्तल बंधुओं के बीच डील न हो पाने की खबर के बाद बी4एम ने वीओआई के कर्ताधर्ता मधुर मित्तल से संपर्क किया तो उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि वीओआई किसी कीमत पर बंद नहीं किया जाएगा। अगले दो महीनों के भीतर इस चैनल में 25 करोड़ रुपये के निवेश की योजना है। उन्होंने कहा- ‘मैं चैनल चलाने की इच्छा रखता हूं लेकिन जिस तरह के अनुभव हो रहे हैं उससे मन खट्टा होता जा रहा है। मैं चैनल को आगे बढ़ाना चाहता हूं लेकिन ताली एक हाथ से नहीं बजती। अगर अभी तक मैंने 70-80 करोड़ रुपये चैनल में इनवेस्ट किया है तो ऐसा यूं ही नहीं किया है। मेरी कोशिश है कि अच्छे तरीके से चैनल चलाया जाए लेकिन हर बार किसी न किसी कड़वे अनुभव से पाला पड़ रहा है। इस बार अमित सिन्हा ने हम लोगों के साथ धोखा किया है। उनकी हैसियत चैनल खरीदने की नहीं थी। उनके पास 10 लाख रुपये भी नहीं हैं एकाउंट में और चले थे करोड़ों का चैनल खरीदने।
उन्होंने हम लोगों को भ्रम में रखा। मैं ओपन चैलेंज करने को तैयार हूं। कोई भी आकर सारे डाक्यूमेंट्स देख ले। उनके सभी चेक बाउंस हुए। मैं एफिडेविट, एग्रीमेंट और डाक्यूमेंट दिखा दूंगा। आप भी आकर देख लीजिए। कहकर भी स्टाफ को पैसे नहीं दिए। चुनिंदा चार छह पत्रकारों को पैसे देकर अपने पाले में कर लिया। अमित सिन्हा ने स्टाफ की भावनाओं से खिलवाड़ किया है। उनके बाउंस हुए चेक रखे हुए हैं। मुझे दुख हो रहा है कि अमित सिन्हा को भगवान बनाया जा रहा है। सच्चाई पता चल जाएगी अगर आप आफिस आकर सारे डाक्यूमेंट्स देख लेंगे। मैं वायस आफ इंडिया के सभी मीडियाकर्मियों से अपील करता हूं कि वे किसी बहकावे में न आएं और चैनल को चलाने में मदद करें।’
उधर, अमित सिन्हा ने बी4एम से बातचीत में कहा कि समझौता न होने का कारण ‘ड्यू डेलीजेंस’ रहा। कंपनी को खरीदने से पहले वैलूवेशन होता है। लेन-देन व कर्ज का पता लगाया जाता है। ऐसा न होने कंपनी का कर्ज बाई डिफाल्ट खरीदने वाले पर आ जाएगा। ड्यू डेलीजेंस फेल हो गया। इसे रुकवा दिया गया। इस कारण समझौता नहीं हुआ। मेरे पर लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं। यह छवि खराब करने की कोशिश है। चैनल के लिए उन लोगों ने मेरे से शुरू में ही 50 लाख रुपये का हैंड लोन लिया, जिसे आज तक वापस नहीं किया। उस समय उनको नहीं दिखा कि मेरे पास पैसा है या नहीं है। बाद में मैंने करोड़ों रुपये इस चैनल में लगाए। वे लोग मेरे एकाउंट चेक कराते थे कि कितना पैसा है। उसी मुताबिक मेरे से चेक लेने के लिए दबाव बनाते। मुझे अपने एकाउंट से पैसा हटाना पड़ा। वीओआई के लोग जानते हैं कि मैंने किस-किस तरह से मदद की। मई में जो सेलरी गई, उसको मैंने दिया। जो भी वेंडर आता, उसे मेरे से पेमेंट दिलाते। इन लोगों ने जो पेमेंट मांगे थे, वह ड्यू डेलीजेंस से संबंधित था। एग्रीमेंट न होने की स्थिति में एमओयू 31 जुलाई को खुद खत्म हो गया। 31 जुलाई से पहले ड्यू डेलीजेंस होना था। यह नहीं हुआ। तब मैंने पेमेंट रुकवा दिया। जब मैंने स्टाप पेमेंट कराया तो उन्होंने चेक के अगेंस्ट में डिमांड ड्राफ्ट लिया और कहा कि चेक वापस करा दूंगा पर वापस नहीं किया। इन्होंने मेरे को शेयर भी जारी किया था। ऐसा क्यों किया? इनकी कोशिश थी कि अमित सिन्हा को किसी तरह 83.5 करोड़ में चैनल बेच दो। कैसे भी साइन करा लो। पर इनके पास कोई चीज प्रापर नहीं है। मेरी इनसे कोई लड़ाई नहीं है। मैंने इनके बारे में कहीं कोई गलत बात नहीं की। ईश्वर सब देखता और जानता है।











