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चुनावों के खत्म होते ही वाच न्यूज ने शटर गिराया

रायपुर के वाच न्यूज की कहानी खत्म हो गई। स्टैंडर्ड वर्ल्ड नामक चैनल पर पहले 22 घंटे, फिर 4 घंटे न्यूज प्रोग्राम चलाने वाले वाच न्यूज का शटर गिर चुका है। शेष बचे 20 लोगों को उनका भुगतान कर चलता कर दिया गया। यह घटनाक्रम 17 अप्रैल को हुआ। छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनावों के आसपास शुरू हुए वाच न्यूज ने काफी उठापठक देखे। कई एडिटर और सीईओ आए-गए। ढेरों लोगों की कई राउंड में छंटनी हुई। अब छत्तीसगढ़ में लोकसभा चुनाव के लिए पहले चरण में वोट पड़ने के तुरंत बाद वाच न्यूज ने कामधाम समेट लिया। सूत्रों के अनुसार 30 मार्च को चैनल से 40 लोग हटाए गए थे। लोकसभा चुनाव तक जिन लोगों से पैसे लिए गए थे, उनसे संबंधित कवरेज प्रसारित करने के बाद वाच न्यूज का चैनल पर प्रसारण बंद कर दिया गया। सूत्रों का कहना है कि वाच न्यूज में कई पार्टनर थे।

रायपुर के वाच न्यूज की कहानी खत्म हो गई। स्टैंडर्ड वर्ल्ड नामक चैनल पर पहले 22 घंटे, फिर 4 घंटे न्यूज प्रोग्राम चलाने वाले वाच न्यूज का शटर गिर चुका है। शेष बचे 20 लोगों को उनका भुगतान कर चलता कर दिया गया। यह घटनाक्रम 17 अप्रैल को हुआ। छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनावों के आसपास शुरू हुए वाच न्यूज ने काफी उठापठक देखे। कई एडिटर और सीईओ आए-गए। ढेरों लोगों की कई राउंड में छंटनी हुई। अब छत्तीसगढ़ में लोकसभा चुनाव के लिए पहले चरण में वोट पड़ने के तुरंत बाद वाच न्यूज ने कामधाम समेट लिया। सूत्रों के अनुसार 30 मार्च को चैनल से 40 लोग हटाए गए थे। लोकसभा चुनाव तक जिन लोगों से पैसे लिए गए थे, उनसे संबंधित कवरेज प्रसारित करने के बाद वाच न्यूज का चैनल पर प्रसारण बंद कर दिया गया। सूत्रों का कहना है कि वाच न्यूज में कई पार्टनर थे।

मुख्यतौर पर मध्य प्रदेश की राजनीति में सक्रिय एक राजनेता जो भाजपा की पिछली सरकार में मंत्री भी थे, के पुत्र ने वाच न्यूज में पैसा लगा। इसमें कुछ और लोगों को पार्टनर बनाया गया। मंत्री जी विधानसभा चुनाव में हार गए तो वाच न्यूज पर काले बादल छा गए। वाच न्यूज को लेकर सारी योजनाएं मंत्री जी के चुनाव जीतने पर आधारित थीं। चुनाव हारने से मंत्री जी इस बार मंत्री नहीं बन पाए। वाच न्यूज के दूसरे पार्टनरों ने भी पैसा लगाने से मना कर दिया। इसके बाद चैनल को लोकसभा चुनाव तक खींचने और कर्मचारियों की क्रमवार छंटनी की रणनीति बनी। विधानसभा और लोकसभा चुनावों से जितना रेवेन्यू जनरेट किया जा सका, इकट्ठा किया गया और चुनावों की इतिश्री होते ही चैनल का शटर गिरा दिया गया। वाच न्यूज में पहले छंटनी होने फिर इसे बंद किए जाने से करीबन सौ मीडियाकर्मी बेरोजगार हुए हैं। कथित मंदी के इस दौर में जब दूसरे मीडिया हाउस भी नो वैकेंसी का बोर्ड लटकाए हुए हैं, इन बेरोजगार मीडियाकर्मियों को जाब कौन देगा, यह एक बड़ा सवाल है।

 

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