आम लोगों में भी दिखा पुलिस के खिलाफ आक्रोश, पत्रकारों का रायबरेली बंद सफल

रायबरेली में पत्रकारों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में गुरुवार को पूरा शहर बंद रहा. इस बंद से लोगों के मन में पुलिस एवं प्रशासन के खिलाफ पनप रहा गुस्‍सा साफ नजर आया. पत्रकारों के समर्थन में आयोजित यह बंद लगभग पूरी तरह सफल रहा. पुलिस की असंवेदनशीलता ने आग में घी का काम किया और लोग स्‍वर्स्‍फूत तरीके से बंद में शामिल होकर पत्रकारों को अपना समर्थन दिया. पत्रकारों की मांग थी कि जिले के एसपी तथा कोतवाल को हटाया जाए.

पेट्रोल पंपों, दवाखानों और अस्‍पतालों में तो सांकेतिक बंदी का ऐलान किया था, जबकि खुदरा बाजारों में ज्‍यादातर शटर दरवाजे बंद रहे. बंदी में आटो मोबाइल्‍स विक्रताओं और आटो-चालकों ने अपने चक्‍के जाम रखने के ऐलान पर अमल किया. जिले के दोनों बार ने भी इस बंदी को अपना पूरा समर्थन दिया. इनके अलावा जिले भर के चार दर्जन से अधिक संगठन पत्रकारों के साथ कंधा से कंधा मिलाकर इस बंद को सफल बनाने में अपना योगदान दिया. राजनैतिक दल के लोगों ने भी इस बंद को अपना समर्थन देकर पत्रकारों पर हुए लाठीचार्ज की निंदा की तथा पुलिस व प्रशासन की असंवेदनशील रवैया की आलोचना की.

गौरतलब है कि पुलिस की हरामखोरी तथा लापरवाही के चलते यह मामला इतना तूल पकड़ लिया है. पुलिसवालों ने एक पत्रकार के भतीजे को जमकर मारपीट कर घायल कर दिया. पत्रकार जब न्‍याय की उम्‍मीद लेकर कोतवाली पहुंचे तो कोतवाल ने पत्रकारों के साथ बदतमीजी की तथा फर्जी फंसाने की धमकी दी. पत्रकार जब इस अभद्रता की जानकारी देने के लिए एसपी को फोन किया तो उन्‍होंने फोन नहीं उठाया, जिससे मामला और बिगड़ गया. जिसके बाद पत्रकार सड़क जाम करने लगे और पुलिस ने एसपी के आदेश पर लाठियां भांजनी शुरू कर दी. इसमें कई पत्रकार घायल हुए. इसके बाद पुलिस ने अपने अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए पत्रकार के भतीजे तथा पत्रकारों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर लिया, जिससे स्थिति और अधिक बिगड़ गई.

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