पुलिस ने जी न्‍यूज के मालिक सुभाष चंद्रा को भी पूछताछ के लिए बुलाया

जी न्यूज के दो वरिष्ठ पत्रकारों के कथित तौर पर धन उगाही की कोशिश के मामले में ऐसा माना जा रहा है कि जी समूह के अध्यक्ष सुभाष चंद्रा ने पुलिस को सूचित किया है कि वह पांच दिसंबर तक जांच में शामिल नहीं हो सकते हैं। पुलिस सूत्रों ने बताया कि जांचकर्ताओं ने उन्हें जांच में शरीक होने के लिए नोटिस भेजा था जिसके जवाब में चंद्रा ने और समय की मांग की है क्योंकि वह विदेश में हैं। पुलिस ने चंद्रा को कल अदालत में दो बार जांच में शामिल होने को कहा था। यह पूछे जाने पर कि क्या जांचकर्ता अब अदालत का रूख कर वारंट जारी करने की मांग करेंगे, पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि जब जरूरत होगी, तब इस पर फैसला किया जाएगा।

दिल्ली पुलिस के दोबारा नोटिस के बाद जी ग्रुप के चेयरमैन सुभाष चंद्रा ने दिल्ली पुलिस के सामने पेश होने के लिए कुछ समय मांगा है, माना जा रहा है कि ये समय इसलिए मांगा गया है, ताकि वो कानूनी माहिरों से 100 करोड़ उगाही मामले में कानूनी मदद ले सकें। फिलहाल जी ग्रुप के मालिकों ने जी बिजऩैस और जी न्यूज़ में खाली हुए संपादकों के पदों को भर दिया है, ये पद समीर और सुधीर के जेल में जाने के बाद खाली हुए हैं, खबर है कि मैनेजमेंट ने राकेश कार को जी न्यूज़ का और और मिहिर भट्ट को जी बिजऩैस का संपादक नियुक्त कर दिया है।

पुलिस सुधीर चौधरी और समीर अहलूवालिया की रिमांड को बढाने की मांग करने की उम्मीद है। दोनों को कल अदालत में पेश किया जाएगा। उन्हें दो दिनों के लिए पुलिस हिरासत में भेजा गया था। सूत्रों ने कहा कि चंद्रा के जांच में शामिल नहीं होने की स्थिति में पुलिस दोनों संपादकों की हिरासत अवधि बढ़ाने की मांग कर सकती है और कह सकती है कि साजिश पर से पर्दा उठाने के लिए हिरासत में उनसे पूछताछ जरूरी है। कुल मिलाकर जी न्‍यूज और इसके कर्ताधर्ताओं की मुश्किलें आगे और बढ़ सकती हैं।  

दिल्ली पुलिस अपनी जांच में जुटी है मगर जी ग्रुप के मालिकों ने पहले ही खुद को और अपने संपादकों को क्लीन चिट देकर अपने तरफ से मामले को खत्म कर दिया है। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि जी न्यूज के लिए नवीन जिंदल जंजाल बन गए हैं। मंगलवार देर शाम हुई गिरफ्तारी के बाद समीर चौधरी और समीर अहलूवालिया पर नवीन जिंदल ने आरोप लगाया था कि कोयला घोटाले पर कवरेज रोकने के बदले जी न्यूज के संपादक सुधीर चौधरी और जी बिजनेस के संपादक समीर अहलूवालिया ने 100 करोड़ रुपए मांगे थे। 


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