भ्रष्‍ट पत्रकारिता (1) : पत्रकार हैं- लड़ते-भिड़ते, उलझते-गालियां खाते दिख ही जाते हैं

दो तीन समाचार पत्रों के ब्यूरोचीफ की जिम्मेदारी निभा चुके यह महोदय इन दिनों अपनी इस समय एक ऐसे समाचार पत्र में यह ओहदा संभाले हुए है। जिसकी बुनियाद में ही बसपा सरकार के घोटालेबाज मंत्री का सब कुछ लगा है। हमेशा दूसरों को परेशान करने के लिए परेशान रहने वाले इन महोदय के सामने इस समय पहचान का बड़ा संकट है। जब किसी अधिकारी या नेता को फोन करते है तो पहले उस अखबार का नाम बताते हैं, जहां पहले काम करते थे फिर कहते हैं सरजी अब इस अखबार को देख रहा हूं। 

नेता से लेकर गेट पर खड़े सिक्योरिटी गार्ड तक से भिड़ जाते हैं। कोई असरदार नेता और अफसर सामने पड़ जाता है तो भीगी बिल्ली बन जाते हैं, लेकिन और चपरासी तक से पत्रकारिता का रौब गांठकर उसे हैसियत में रहने की सलाह देते हैं। लेकिन स्टैंडवाले को पैसा न देने पड़े इसके लिए अपने प्रभाव दिखाते हैं लेकिन गालियां भी खाते हैं, धक्कामुक्की करते हैं तो मार भी खाते हैं और बड़बड़़ाते हुए किनारे हो जाते हैं। 
 
हाल ही में अपने एक सहयोगियों की छुट्टी कराने के बाद से अपने को बड़ा शूरवीर समझ रहे यह महोदय इन दिनों अपने नए आका को लेकर सचिवालय से लेकर महत्वपूर्ण स्थानों पर घुमा फिराकर अपनी नौकरी पक्की करने में लगे हैं। सहयोगियों की गाली खाते हैं घर में नशे करके पहुंचते है तो वहां भी उठा के पटके जाते हैं लेकिन इनसबके बावजूद अपनी हरकतो से बाज नहीं आते। ऐसे स्वामी जी की जय।
 
त्रिनाथ के शर्मा की रिपोर्ट. यह रिपोर्ट दिव्‍य संदेश में भी प्रकाशित हो चुकी है.

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