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भ्रष्‍ट पत्रकारिता (19) : कौन है निष्‍पक्ष प्रतिदिन का मालिक?

लखनऊ। राजधानी लखनऊ से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र निष्पक्ष प्रतिदिन का असल मालिक कौन है, यह यक्ष प्रश्न मीडिया और नौकरशाही को परेशान कर रहा है। आरटीआई के तहत मिली सूचनाओं से यह तथ्य प्रकाश में आए हैं कि निष्पक्ष प्रतिदिन समाचार पत्र का असल मालिक सहकारी समिति लखनऊ है। यह समाचार पत्र 2002 से लेकर 2007 तक बंद रहा। सरकारी दस्तावेजों में घोषित 420 और फ्राड पत्रकार जगदीश नारायण शुक्ल का अब इस समाचार पत्र पर अवैध कब्जा है।

लखनऊ। राजधानी लखनऊ से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र निष्पक्ष प्रतिदिन का असल मालिक कौन है, यह यक्ष प्रश्न मीडिया और नौकरशाही को परेशान कर रहा है। आरटीआई के तहत मिली सूचनाओं से यह तथ्य प्रकाश में आए हैं कि निष्पक्ष प्रतिदिन समाचार पत्र का असल मालिक सहकारी समिति लखनऊ है। यह समाचार पत्र 2002 से लेकर 2007 तक बंद रहा। सरकारी दस्तावेजों में घोषित 420 और फ्राड पत्रकार जगदीश नारायण शुक्ल का अब इस समाचार पत्र पर अवैध कब्जा है।

उल्लेखनीय है कि बसपा के सदस्य डा. धर्मपाल सिंह द्वारा 28 मई 2012 को शुरू हुए विधान सभा के प्रथम सत्र में पहले सोमवार को पूछे गए सवाल के लिखित जवाब में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा था कि लखनऊ और सीतापुर से प्रकाशित दैनिक निष्पक्ष प्रतिदिन का प्रकाशन पूर्णतया अनियमित एवं अवैध है। उन्होंने बताया था कि हिन्दी दैनिक निष्पक्ष प्रतिदिन के कथित प्रकाशक, मुद्रक और सम्पादक जगदीश नारायण शुक्ल ने शासन को गुमराह कर धोखाधड़ी और जालसाजी करते हुए भ्रामक सूचनाओं एवं झूठे अभिलेखों के आधार पर विज्ञापन प्राप्त करने और शासन को राजस्व की हानि पहुंचाने के आरोप पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक लखनऊ से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर 16 मार्च 2012 को हजरतगंज थाने में मु0अ0सं0 96/12 धारा 419/420/467/468 भादवि बनाम जगदीश नारायण शुक्ल के खिलाफ पंजीकृत कराया गया था।

मालूम हो कि लखनऊ के पूर्व जिलाधिकारी अनिल कुमार सागर ने 20 जनवरी 2012 को निष्पक्ष प्रतिदिन समाचार पत्र के मालिकाना हक को लेकर जगदीश नारायण शुक्ल द्वारा किए गए फर्जीवाड़े का संज्ञान लेते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया था। 6 फरवरी 2012 को निष्पक्ष प्रतिदिन के घोषणा पत्र को निरस्त करने की कार्रवाई की गई थी। इस समाचार पत्र को हथियाने के लिए कथित सम्पादक जगदीश नारायण शुक्ल ने तमाम फर्जीवाड़े किए हैं। आरएनआई में पहली बार निष्पक्ष प्रतिदिन समाचार पत्र का पंजीकरण 38852/82 सांध्‍य समाचार पत्र के रूप में किया गया था। इसका मुद्रण कार्यालय का पता गुंजनिका प्रिन्टर्स 289 चंद्रलोक कालोनी था। निष्पक्ष प्रतिदिन का प्रकाशन 2002 से लेकर 2007 तक बंद रहा। दुबारा इस समाचार पत्र को प्रकाशित करने के लिए दिए गए घोषणा पत्र में मुद्रण कार्यालय का पता टिन-टिन प्रिन्टेक प्राइवेट लिमिटेड सी-33 अमौसी इंडस्ट्रियल एरिया नादरगंज अंकित किया गया। 20 अक्टूबर  2010 को दिए गए घोषणा पत्र में मुद्रण स्थल का पता अवध प्रकाशन प्राइवेट लिमिटेड छठा मिल, सीतापुर रोड, कमलाबाद बढ़ौली दर्शाया गया।

इस घोषणा पत्र की सबसे खास बात यह रही कि सांध्य संस्करण को प्रात: संस्करण में बदलने की घोषणा की गई। प्रकाशक, मुद्रक द्वारा 12 अक्टूबर 2011 को फिर दिए गए घोषणा पत्र में निष्पक्ष प्रतिदिन का स्वामित्व जगदीश नारायन शुक्ला दर्शाया गया। डा. राम लखन गुप्ता ने 6 दिसम्बर 2010 को सूचना अधिनियम के तहत आरएनआई से मांगी गई सूचनाओं से स्पष्ट हो गया कि दुबारा प्रकाशन शुरू किए जाने की स्थिति में पंजीकरण संख्या में बदलाव हो जाएगा। घोषणा पत्र में किए गए कई बार बदलावों की जानकारी आरएनआई को नहीं दी गई। इन सब तथ्यों के आधार पर लखनऊ के पूर्व जिलाधिकारी अनिल कुमार सागर ने 20 जनवरी 2012 को निष्पक्ष प्रतिदिन समाचार पत्र घोषणा पत्र निरस्त कर दिया था। जिलाधिकारी के इस फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई। जिस पर उच्च न्यायालय ने जिलाधिकारी के आदेश को निरस्त करते हुए निर्देशित किया था कि दो सप्ताह में याची के प्रत्यावेदन को व्यक्तिगत सुनवाई कर निस्तारण करें।

24 फरवरी 2012 को डिप्टी रजिस्ट्रार के पत्र साफ किया गया था कि 2007 से लेकर जनवरी 2012 के अंक नियमित जमा किए गए हैं। इसके साथ ही आरएनआई ने इस पत्र में मालिकाना हक की स्थिति साफ करने को कहा गया था। इसी पत्र को आधार मानकर जिलाधिकारी अनुराग यादव ने 20 जून 2012 को कुछ शर्तों के साथ निष्पक्ष प्रतिदिन के घोषणा पत्र को बहाल किया था। साथ ही आरएनआई द्वारा उठाई गई खामियों को तत्काल दूर कर अवगत कराने का निर्देश दिया गया था। दस माह बीत जाने के बावजूद अभी तक खामियां दूर नहीं की गई हैं।

त्रिनाथ के शर्मा की रिपोर्ट. यह रिपोर्ट दिव्‍य संदेश में भी प्रकाशित हो चुकी है.

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