भ्रष्‍ट पत्रकारिता (17) : दिव्‍य संदेश ने खोला जगदीश नारायण शुक्‍ल के खिलाफ मोर्चा, बताया 420 पत्रकार

लखनऊ। ये दो कहावतें 'कौवा चला हंस की चाल' और 'नौ सौ चूहे खा के बिल्ली हज को चली' निष्पक्ष प्रतिदिन के तथाकथित सम्पादक जगदीश नारायण शुक्ल पर सटीक साबित होती है। तमाम नेताओं और अफसरों के खिलाफ अनर्गल खबरें छपवाकर अपने काले कारनामों से मीडिया को शार्मिंदा करने वाले यह सफेदपोश 420 पत्रकार करोड़ों रुपए की चल-अचल का मालिक बन गया है। पूर्व कैबिनेट सेक्रेटरी शशांक शेखर सिंह का करीबी होने के कारण इस 420 पत्रकार के खिलाफ ब्लैकमेलिंग और घपलों की तमाम शिकायतों के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।

मालूम हो कि जिस तरह पूर्व कैबिनेट सेक्रेटरी शशांक शेखर सिंह ने अपनी पूरी नौकरी बगैर कागजातों के करने का कारनामा अंजाम दिया। मौजूदा समय न तो नियुक्ति विभाग और न ही नागरिक उड्डयन विभाग के पास पूर्व कैबिनेट सचिव शशांक शेखर सिंह के सेवा अभिलेख मौजूद हैं। ठीक वैसे ही 420 पत्रकार जगदीश नारायण शुक्ल ने पग-पग पर सरकार को गुमराह करके ठगी की।
बसपा के सदस्य डा. धर्मपाल सिंह द्वारा 11 अप्रैल 2012 को शुरू हुए विधान सभा के प्रथम सत्र में पहले सोमवार को पूछे गए सवाल के लिखित जवाब में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा था कि लखनऊ और सीतापुर से प्रकाशित दैनिक निष्पक्ष प्रतिदिन का प्रकाशन पूर्णतया अनियमित एवं अवैध है।

मुख्यमंत्री अपने लिखित उत्तर में यह भी अवगत कराया है कि सहकारी समिति के संयुक्त निदेशक दिनेश कुमार शुक्ल ने 23 मार्च 2005 को दि लखनऊ सहकारी प्रेस लिमिटेड 289 चंद्रलोक कालोनी का निबंधन रद्द कर दिया था। 28 फरवरी 2012 को कार्रवाई के लिए संयुक्त निदेशक ने जिलाधिकारी लखनऊ को पत्र लिखा था। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने यह भी कहा था कि हिन्दी दैनिक निष्पक्ष प्रतिदिन समाचार पत्र 2007 से अस्तित्व में नहीं है। इस समाचार पत्र के प्रकाशक, मुद्रक और सम्पादक जगदीश नारायण शुक्ल ने सरकार को गुमराह करते हुए वर्ष 2007 से लेकर अप्रैल 2011 तक सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के विज्ञापन मद से 30,50,844,15 लाख रुपए प्राप्त किया है। इसके अतिरिक्त श्री शुक्ला ने प्रदेश और भारत सरकार के अन्य विभागों रेलवे, डीएवीपी, पॉवर कारपोरेशन, आवास विकास, विकास प्राधिकरण व अन्य विज्ञापन मदों में धनराशि प्राप्त कर शासकीय धन की क्षति पहुंचाई है।

विज्ञापन के माध्यम से अवैध ढंग से प्राप्त की गई धनराशि की वसूली के लिए 14 मार्च 2012 को पावर कारपोरेशन, राजकीय निर्माण निगम, आयुक्त नगर विकास, पर्यटन विभाग, महाप्रंधक राष्ट्रीय राजमार्ग, लखनऊ विकास प्राधिकरण, मण्डी परिषद के अधिकारियों को पत्र लिखा गया है। हिन्दी दैनिक निष्पक्ष प्रतिदिन के कथित प्रकाशक, मुद्रक और सम्पादक जगदीश नारायण शुक्ल ने शासन को गुमराह कर धोखाधड़ी और जालसाजी करते हुए भ्रामक सूचनाओं एवं झूठे अभिलेखों के आधार पर विज्ञापन प्राप्त करने और शासन को राजस्व की हानि पहुंचाने के आरोप पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक लखनऊ से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर 16 मार्च 2012 को हजरतगंज थाने में मु0अ0सं096/12 धारा 419/420/467/468 भादवि बनाम जगदीश नारायण शुक्ल के खिलाफ पंजीकृत कराया गया था। इसके अलावा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने लिखित जवाब में कहा है कि अवध प्रकाशन प्राइवेट लिमिटेड का भवन कमलाबाद, बढ़ौली छठवां मील सीतापुर रोड के बारे में सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग ने 14 मार्च 2012 को लखनऊ के जिलाधिकारी को पत्र लिखकर 6 बिन्दुओं पर एक जांच रिपोर्ट मांगी थी।

इसके साथ ही 23 मार्च 2005 से निष्पक्ष प्रतिदिन समाचार पत्र बंदी के दौरान 420 पत्रकार जगदीश नारायण शुक्ल ने डीएवीपी से 14 लाख 74 हजार 50 रुपए का विज्ञापन लेकर धोखाधड़ी की है। इसके अलावा विज्ञापन लेने के लिए समाचार पत्र के प्रचार संख्या में भी हेरा-फेरी की है। नाम न छापने की शर्त पर एक वरिष्ठ पत्रकार ने बताया कि पूर्व कैबिनेट सेक्रेटरी शशांक शेखर सिंह ने 420 पत्रकार जगदीश नारायण शुक्ल को करोड़ों रुपए का विज्ञापन और अन्य जरियों से काली कमाई करवाई। मौजूदा समय इस 420 पत्रकार की लखनऊ, इलाहाबाद, वारणासी, दिल्ली और उत्तराखण्ड में लगभग 50 करोड़ रुपए की चल-अचल सम्पत्ति है। उन्होंने कहा कि पूर्व कैबिनेट सचिव का खास होने के कारण न तो जिलाधिकारी अनुराग यादव और न ही सूचना निदेशक प्रभात मित्तल कोई कार्रवाई कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस 420 पत्रकार ने निष्पक्ष प्रतिदिन में कई अफसरों के खिलाफ फर्जी खबरें प्रकाशित करवाई हैं। जिनमें पूर्व पासपोर्ट अधिकारी जहूर जैदी, आईपीएस नवनीत सिकेरा, पूर्व आईएएस जय शंकर मिश्र, पूर्व मुख्य सचिव अनूप मिश्र, संजय अग्रवाल, नेतराम आदि तमाम अफसर हैं। इस इस 420 पत्रकार ने तमाम अफसरों, नेताओं, इंजीनियरों को ब्लैकमेल किया है। इनमें से कई अफसरों ने फर्जी खबरों को लेकर मानहानि का दावा भी ठोंक रखा है।

त्रिनाथ के शर्मा की रिपोर्ट. यह रिपोर्ट दिव्‍य संदेश में भी प्रकाशित हो चुकी है.

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