भ्रष्‍ट पत्रकारिता (9) : महेंद्र मोहन और संजय गुप्‍ता ने भी हथिया रखे हैं सरकारी बंगले!

'अंतरपट में खोजिए, छिपा हुआ है खोट,
मिल जाएगी आपको, बिल्कुल सत्य रिपोर्ट'

प्रसिद्ध कवि काका हाथरसी की यह कविता कुछ पत्रकारों पर सटीक साबित होती है। अगर आपको नियम-कानून की धज्जियां उड़ानी नहीं आती है तो इसका प्रशिक्षण इन कुछ दिग्गज पत्रकारों से ले सकते हैं। इस अनमोल प्रतिभा ने 'क्रीमीलेयर पत्रकार' बना दिया है। नैतिकता का पाठ पढ़ाने वाले हरफनमौला पत्रकारों के 'किस्सों' से मीडिया और राजनीतिक दल का हर तबका परिचित है। लेकिन मीडिया के नियम विरूद्ध कारनामों पर कार्रवाई करने की हिम्मत न तो नौकरशाहों में है और नहीं सरकारों में है।

आपको जानकर हैरानी होगी कि नेता और अफसर अपने पद से रिटायर हो जाता है लेकिन पत्रकार कभी रिटायर नहीं होता है। अपने को मुख्यधारा में बनाए रखने के लिए हर हथकंडे अपनाता है। मीडिया संस्थानों से रिटायर होने जाने के बाद सरकारी आवासों पर कब्जा बरकरार रखने के लिए क्रीमीलेयर पत्रकार यह खेल वर्षां से खेल रहे हैं। राज्य सम्पत्ति विभाग ने 21 मई 1985 में समाचार पत्रों के मान्यता प्राप्त सम्पादकों, उपसम्पादक और पत्रकारों को सरकारी आवास आवंटन के लिए एक शासनादेश किया था। इस शासनादेश में इस बात का प्रावधान किया गया था कि जिनका निजी आवास होगा या अपने कार्यरत संस्थानों से आवास भत्ता प्राप्त कर रहे मान्यता प्राप्त सम्पादकों, उपसम्पादक और पत्रकारों को सरकारी आवास का आवंटन नहीं किया जाएगा। 27 साल बीत जाने के बाद भी राज्य सम्पत्ति विभाग ने अपने इस शासनादेश में कोई फेरबदल नहीं किया है। अभी भी पुराने शासनादेश पर अमल कर रहा है। सरकारों और नौकरशाहों के लचीली कार्यप्रणाली के चलते क्रीमीलेयर पत्रकारों ने बड़ी संख्या में सरकारी आवासों पर वर्षों से कब्जा जमा रखा है।

देश का सबसे बड़ा लगभग 10,064.02 लाख रुपए टर्नओवर वाला मीडिया हाउस दैनिक जागरण भी नियमों को ताक पर रखकर सरकारी आवास हथियाने में पीछे नहीं है। दैनिक जागरण के प्रधान सम्पादक महेन्द्र मोहन गुप्त के नाम से दिलकुशा कालोनी में बी-1 और बी-2 सम्पादक संजय गुप्ता के नाम से बंगले आवंटित हैं। यूं तो महेन्द्र मोहन गुप्त 7/51 पूर्ण निवास तिलक नगर कानपुर दो और संजय गुप्त डी 210-211, सेक्टर 63 नोएडा गौतमबुद्ध नगर के स्थायी निवासी हैं। जबकि इन दोनों सम्पादकों का निजी आवास होने और मान्यता प्राप्त न होने के बावजूद राज्य सम्पत्ति विभाग ने नियमों को ताक पर रखकर बड़े बंगले आवंटित कर रखा है। राज्य सम्पत्ति विभाग के सूत्रों का कहना है कि दैनिक जागरण के प्रधान सम्पादक महेन्द्र मोहन गुप्त और सम्पादक संजय गुप्ता के नाम पर आवंटित बंगलों का उपयोग 'गेस्ट हाउस' की तरह किया जा रहा है।

वरिष्ठ पत्रकार ज्ञानेन्द्र शर्मा किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। सबसे अधिक प्रसार संख्या वाले समाचार पत्र से लेकर सबसे अधिक विवादित अखबार के सम्पादक बनने का गौरव हासिल है। अपनी हरफनमौला कला के बल पर श्री शर्मा की उपलब्धियों में सूबे का राज्य सूचना आयोग का आयुक्त बनना भी शुमार है। सूचना आयुक्त बनने से पूर्व राज्य सम्पत्ति विभाग ने श्री शर्मा को पत्रकार कोटे से 23 गुलिस्तां कालोनी आवास आवंटित किया था। सूचना आयुक्त के पद पर तैनाती के समय राज्य सूचना आयोग ने सरकारी आवास 23 गुलिस्तां कालोनी का किराया राज्य सम्पत्ति विभाग को चुकाया है। सूचना आयुक्त पद से रिटायर होने के बाद अब फिर से पत्रकार कोटे से इस सरकारी आवास को अपने पास बनाए रखा है। भले ही इस समय किसी भी समाचार पत्र में नहीं हैं, लेकिन वरिष्ठ पत्रकार होने का तमगा सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग से मिल गया है। गोमती नगर के पत्रकार पुरम आवास संख्या 3/78 निजी आलीशान मकान होने के बाद भी श्री शर्मा सरकारी गुलिस्तां कालोनी के 23 नम्बर आवास में रह रहे हैं। सरकार द्वारा सब्सिडी पर दिए गए मकान को किराए पर दे रखा है।

कभी राजधानी लखनऊ से प्रकाशित होने वाला समाचार पत्र नवजीवन में प्रूफ रीडर रहे जोखू प्रसाद तिवारी यूपी प्रेस क्लब के महामंत्री हैं। श्री तिवारी का विवादों से गहरा नाता रहा है। बीते 30 सालों से यूपी प्रेस क्लब पर एकछत्र राज है। प्रेस क्लब पर से कब्जा न हट जाए, इसके लिए न तो नए लोगों को प्रेस क्लब की सदस्यता पर अघोषित रोक लगा रखी है। यूपी प्रेस क्लब में तमाम वित्तीय अनियमितताएं प्रकाश में आई, लेकिन क्रीमीलेयर पत्रकारों की एकजुटता ने इस सच्चाई पर पर्दा डाल रखा है। निष्पक्ष दिव्य संदेश ने प्रेस क्लब के काले कारनामों को प्रकाशित किया था, लेकिन इन क्रीमीलेयर पत्रकारों ने अपने प्रभाव से कोई कार्रवाई नहीं होने दी है। पत्रकारों के नेता बने श्री तिवारी का इस समय पत्रकारिता से दूर-दूर तक नाता नहीं है, लेकिन सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग से जोड़-तोड़ कर के स्वतंत्र पत्रकार का तमगा हासिल कर लिया है। सरकार से 1/204 विराज खण्ड सब्सिडी प्लॉट ले रखा है। श्री तिवारी इस समय 3/43 टिकैत राय सरकारी कालोनी में रह रहे हैं। प्रतिष्ठित समाचार पत्र से रिटायर होने के बाद सज्जन प्रवृत्ति के रवीन्द्र जायसवाल अब स्वतंत्र मान्यता प्राप्त पत्रकार है। पत्रकार पुरम में 3/21 निजी आवास को किराए पर देने के बाद सरकारी आवास 56 आफीसर्स हास्टल छोडऩे का मोह नहीं त्याग पा रहे हैं।

वरिष्ठ पत्रकार एस.एल सिंह का मानना है कि पत्रकारिता अब आम के आम गुठलियों के दाम बन गई है। सरकारी और अन्य सेवा की महत्वपूर्ण नौकरी प्राप्त करना भले ही टेढ़ी खीर हो, लेकिन पत्रकार बनना काफी आसान है। किसी भी छोटे से लेकर बड़े समाचार पत्र में अपनी पहुंच और जोड़-तोड़ के बल पर नौकरी आसानी से हासिल की जा सकती है। बस इसके लिए चालाक होने की योग्यता जरूरी है। अगर आप चालाक हैं तो पत्रकारिता की दुकान आसानी से चल जाएगी। आप भी आलीशान हवेलियों के मालिक बन जाएंगे।

पंजाब केसरी अखबार से मान्यता प्राप्त संवाददाता नासिर खान ने कहा कि नेताओं की सिफारिश पर थोक के भाव में ऐसे पत्रकारों की राज्य मुख्यालय की मान्यताएं हो गई हैं, जो गैरकानूनी कार्यों में लिप्त हैं। इन लोगों का पत्रकारिता से दूर-दूर तक नाता नहीं है, लेकिन नेताओं और अफसरों से संबंध बनाने के लिए सारे मापदण्ड ताक पर रखे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि विधान सभा सत्र का बजट कवरेज करने के लिए 377 पत्रकारों को पास जारी किए गए हैं, जबकि पत्रकार कक्ष में बैठने की क्षमता मात्र 150 लोगों की है। कई विधायकों ने विधान सभा अध्यक्ष और प्रमुख सचिव से शिकायत की है कि सेंट्रल हाल और कैंटीन में पत्रकार कुर्सियों पर कब्जा करके बैठ जाते हैं, उनको खड़े रहना पड़ता है। श्री खान ने कहा कि उन्होंने मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के अध्यक्ष और सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के निदेशक से राज्य मुख्यालय की मान्यता प्रदान करने में सभी नियमों का पालन किये जानक मांग कर रखी है। जिससे पत्रकारिता की खराब हो रही छवि को सुधारा जा सके।
उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के अध्यक्ष हेमंत तिवारी ने पत्रकारों के भ्रष्टाचार पर कोई भी प्रतिक्रिया देने के बजाए चुप्पी साध रखी। जबकि अन्य पत्रकार संगठनों ने क्रीमीलेयर पत्रकारों के कारनामों की सरकार से जांच कराए जाने की मांग की है।

त्रिनाथ के शर्मा की रिपोर्ट. यह रिपोर्ट दिव्‍य संदेश में भी प्रकाशित हो चुकी है.

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