मीडिया की नैतिकता के खिलाफ है जी न्यूज का स्टिंग ऑपरेशन

बीते कुछ दिनों या यूं कहें कि कुछ सालों में यह लगातार देखने को मिल रहा है कि मीडिया खासकर इलेक्ट्रानिक मीडिया अपनी गलत प्रतिस्पर्धा के लिए मीडिया के उन तमाम आदर्शों, नैतिकता आदि को ताक पर रख रहा है जिसके लिए मीडिया को अन्य लोगों से अलग रखा जाता है। लेकिन दुर्भाग्य की बात यह है कि टीआरपी पाने के लिए इलेक्ट्रानिक चैनल वो सारे काम करने को विवश है जिसके करने से मीडिया आदर्श को बहुत बड़ा धक्का लग रहा है। 
दो दिन पहले ही देश के बड़े मीडिया ग्रुप जी न्यूज के द्वारा कांग्रेस विधायकों का स्टिंग आपरेशन किया गया। हम बड़े आदर्शों और नैतिकता की तो बातें करते हैं लेकिन जब गला काट प्रतिस्पर्धा की बात आती है तो खुद मीडिया ग्रुप वह सारे गलत काम कर देता है जिसे करने से मीडिया आदर्श को बड़ा आघात पहुंचता है। 
जब दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी के नेता कुमार विश्वास पर एक चैनल ने स्टिंग ऑपरेशन किया तो उस वक्त कुमार विश्वास की ओर से बताया गया कि स्टिंग ऑपरेशन करने वाले वरिष्ठ पत्रकार अनुरंजन झा उनके पारिवारिक मित्र हैं और जिस दिन यह स्टिंग ऑपरेशन किया गया उस दिन अनुरंजन झा अपनी पत्नी और बच्चों के साथ घर पर आए थे और पारिवारिक व्यक्ति होने के कारण सामान्य तौर पर बातचीत होती रही। क्योंकि जब दो गहरे मित्र मिलते हैं चाहे वह पत्रकार और नेता ही क्यों न हो व्यक्ति थोड़ा सामान्य तौर पर अंदर की बातें करने लगता है लेकिन कोई अगर उस विश्वास का गला घोटे तो इसे क्या कहा जाए। उस वक्त कुमार विश्वास की यह बातों पर लोगों ने स्टिंग ऑपरेशन को नैतिकता के खिलाफ बताया था।
तो क्या कांग्रेस विधायकों का स्टिंग ऑपरेशन की नैतिकता के खिलाफ नहीं है? कांग्रेस विधायकों ने अगर आपसे विश्वास में एक दोस्त समझकर अगर कुछ शेयर किया तो क्या उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए था? यह तो मीडिया सहित साी जानते हैं कि कांग्रेस ने आप को इस लिए समर्थन किया है ताकि जो वायदे आप ने किए हैं वह पूरा करें, क्योंकि कांग्रेस को लगता है कि जिस तरीके से आप ने वायदे किए हैं उसे हकीकत में पूरा करना टेढ़ी खीर साबित होगी। वैसे तो यह सब जानते थे कि कांग्रेस ने आप को निपटाने के लिए ही सरकार बनवाई है इसमें भला कौन सी ब्रेकिंग न्यूज थी। बेवजह पत्रकार और नेता के बीच ऑफ रिकार्ड की प्रक्रिया को खत्म कर न्यूज चैनल ने अच्छा नहीं किया। इससे आगे साी नेता घर में या बाहर कहीं भी आफ रिकार्ड कुछ भी बात नहीं करेंगे। इसका खामियाजा सभी पत्रकारों को भुगतना पड़ेगा। क्योंकि हमारी बिरादरी जो भाई हैं उनकी काफी खबरें यही नेता
सूत्रों और विश्वस्त सूत्रों पर चलवाते हैं निसंदेह अब इस तरह जब बातचीत बंद होगी तो लोगों को विश्वस्त सूत्रों की ब्रेकिंग से कुछ नहीं मिलेगा।
मेरा मानना है कि हर हाल में कम से कम पत्रकारों और अन्य लोगों, नेता, अधिकारी आदि के बीच जो रिपोर्टिंग के दौरान गहरे रिश्ते बनते हैं और उन्हें हर हाल में कायम रहने की जरूरत है। क्योंकि हम लोग खबर के भूखे होते हैं और ये लोग विपरीत परिस्थिति में खबर न होने पर विश्वास की डोर को कायम कराते हुए खबर मुहैया करवाते हैं।
विभूति कुमार रस्तोगी
वरिष्ठ पत्रकार

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