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अमर उजाला के एमडी अतुल माहेश्वरी का निधन निश्चित रूप से पत्रकारिता के लिए एक अपूरणीय क्षति है, जिसे बहुत दिनों तक महसूस किया...
नया साल आ गया, हर छोटे बड़े अखबारों के संपादकीय कॉलम में बड़ी बड़ी बातें कहीं गईं भ्रष्टाचार, अन्याय, शोषण, असमानता के खिलाफ संकल्प...
दिमाग पर थोड़ा जोर दें तो आपको बचपन के वे दिन याद आ जायेंगे जब गुणा बाबा या गुदरिया बाबा को देखते ही आप...
वर्ष 2010 को विदा करने के साथ-साथ नये वर्ष का आगाज हो चुका है। नई उम्मीदों, नये सपनों को लेकर साल 2011 हमारे सामने...
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता क्या विकराल और अनियंत्रित स्वरुप ले सकती है, यह इन्टरनेट के आने से सभी जगह देखा जा सकता है. इन दिनों...
: इमरजेंसी के खलनायक को आडवाणी द्वारा सही बताने की कोशिश अब्सर्ड है : समकालीन इतिहास का सबसे बड़ा अजूबा संजय गाँधी को माना...
गए साल को अलविदा कहना और नए साल का स्वागत कुछ-कुछ ऐसा होता है, जैसे एक ही दिन और एक ही समय आप रेलवे...
महंगाई डायन से जनता परेशान और सरकार हैरान है। जनता इसलिए की बजट गड़बड़ा गया है और सरकार इसलिए की राजनीति कहीं गड़बड़ा न...
सुना भी है और पढ़ा भी है कि एक मछली पूरे तालाब को गन्दा कर देती है। पढाई और जिंदगी के अब तक के...
साल 2010 कई मायनों में बहुत महत्वपूर्ण रहा। पूरी दुनिया में ऐसी घटनाएं हुई जिन्होनें विश्व के लगभग सभी देशों में हलचल पैदा की।...
औद्योगिक खेती, बहुराष्ट्रीय कंपनियों की दवाओं पर निर्भरता और शहरी विकास ने हमारे रोजमर्रा के आहार में कुदरती गुणों की भारी कमी कर दी...
कर्नाटक में पंचायत चुनाव चल रहे हैं. दो दौर में पूरे राज्य में चुनाव होने हैं. पहले दौर का चुनाव 26 दिसंबर को पूरा...
मैं हूं आम आदमी... सरकार का मारा...मेरी आवाज़ सुनो... दर्द का राज सुनो... फ़रियाद सुनो। मनमोहन सिंह जी, आप तो सुनो... कुछ जवाब दो।...
एक व्यक्ति दिमागी दिवालियेपन की किस सीमा तक पहुँच सकता है इसके प्रत्यक्ष उदाहरण हैं दिग्विजय सिंह जी. लगातार आ रहे उनके वक्तव्य कोई...
नीरा राडिया तब कुछ और ज्यादा जवान रही होगी। अब भी देखने में वे अच्छी ही लगती है, लेकिन 1994 में जब भारतीय जनता...