Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

दुख-दर्द

अवैध खनन के खिलाफ लिखने की कीमत : जागरण के पत्रकार को पांच दिन में इलाका छोड़ने का फरमान

उत्तराखण्ड के पिथौरा्गढ़ जिल के मदकोट कस्बे में दैनिक जागरण के पत्रकार पवन बत्रा ने दैनिक जागरण समाचार पत्र में सात सितम्बर को गोरी नदी में हो रहे अवैध खनन की खबर छापी। 15 सितम्बर तक राज्य में नदियों में खनन पर प्रतिबंध होता है। इस खबर के बाद खनन व्यवसाय से जुडे़ प्रदीप रावत ने अन्य खनन माफिया वर्ग के साथ पत्रकार के मदकोट स्थित प्रतिष्‍ठान पर धावा बोला। उसके साथ मारपीट की। प्रतिष्‍ठान में तोड़-फोड़ हुई। पत्रकार की पत्नी को नग्न घुमाने की धमकी दी गयी।

उत्तराखण्ड के पिथौरा्गढ़ जिल के मदकोट कस्बे में दैनिक जागरण के पत्रकार पवन बत्रा ने दैनिक जागरण समाचार पत्र में सात सितम्बर को गोरी नदी में हो रहे अवैध खनन की खबर छापी। 15 सितम्बर तक राज्य में नदियों में खनन पर प्रतिबंध होता है। इस खबर के बाद खनन व्यवसाय से जुडे़ प्रदीप रावत ने अन्य खनन माफिया वर्ग के साथ पत्रकार के मदकोट स्थित प्रतिष्‍ठान पर धावा बोला। उसके साथ मारपीट की। प्रतिष्‍ठान में तोड़-फोड़ हुई। पत्रकार की पत्नी को नग्न घुमाने की धमकी दी गयी।

इस घटना के बाद पत्रकार राजस्व पुलिस में दर्ज करने के लिए मदकोट से मुनस्यरी की ओर जा रहा था तो खनन माफिया हाथों में अवैध तमंचे लेकर पीछा करते रहे। पत्रकार ने सात सितम्बर, 2011 को राजस्व पुलिस में मुकदमा दर्ज करने के लिए तहरीर उपजिलाधिकारी मुनस्यारी को दी, जो अभी तक दर्ज नहीं हो पाई है। उपजिलाधिकारी कार्यालय के आगे खडे़ पत्रकार को इन माफिया ताकतों ने अगवा करने का प्रयास किया। प्रदीप रावत तथा नाथ सिंह नामक दो माफिया पत्रकार को पकड़कर एक वाहन में ले जाना चाहते थे। अन्य चार लोग वाहन में पहले से ही मौजूद थे। इसकी रिपोर्ट मुनस्यारी के उत्तराखण्ड पुलिस के थाने में की गयी। पुलिस तथा माफिया के गठजोड़ का परिणाम रहा कि पुलिस ने अगवा करने की घटना को पूरी तरह अलग करते हुए गाली-गलौच करने, धमकी देने जैसी सामान्य घटना को दर्शाते हुए इन माफियाओं के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 232, 504, 506 के अंतर्गत मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया। पुलिस तथा माफिया के अलावा उत्तराखण्ड की सत्ता की भूमिका इस पूरे मामले में सवालों के घेरे में है।

खनन माफिया प्रदीप रावत भारतीय जनता पार्टी के यूथ बिग्रेड भारतीय जनता युवा मोर्चा के डीडीहाट जिले के पूर्व जिलाध्यक्ष है। उत्तराखण्ड में भाजपा की सरकार है। अपने युवा नेता माफिया को बचाने के लिए भाजपा ने पूरी ताकत झोंक दी। जो इस घटना में साफ-साफ नजर आती है। खनन माफिया रावत को पुलिस ने जब गिरफ्तार किया तो उसका तर्क था कि दोनों आरोपी मुनस्यारी बस स्टेशन से थल की ओर जा रहे थे। जबकि सही बात यह है कि दोनों आरोपी में से एक अपने वाहन तथा दूसरा मुनस्यारी के क्षेत्र प्रमुख, जो भाजपा के प्रतिनिधि है, उनके पति के वाहन में बैठकर आराम से पुलिस के साथ गले में हाथ डालकर दोस्ती निभाते हुए डीडीहाट गये। पुलिस, सत्ता तथा माफिया के दोस्ती के कारण पहले तो वास्तविक घटना पर धारायें नहीं लगाई गयी। उसके बाद गिरफ्तारी में भी औपचारिकता ही पूरी की गयी।

उत्तराखण्ड पुलिस के डीडीहाट के पुलिस उपाधीक्षक राजीव मोहन ने उत्तराखण्ड श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के हस्तक्षेप के बाद इन दोनों को गिरफ्तार तो किया लेकिन पत्रकार के बयान नहीं लिये। बयान लेने के लिए पत्रकार को मुनस्यारी से डीडीहाट बुलाया गया। मौखिक वार्ता के बाद पुलिस उपाधीक्षक की भूमिका को देखें तो आपको लगेगा कि पुलिस इनके साथ किस प्रकार से सहयोगी भूमिका में खड़ी थी। पुलिस उपाधीक्षक आरोपी तथा खनन माफिया प्रदीप रावत को बुलाते हैं और पत्रकार से कहते है कि आपस में समझौता कर लो। पत्रकार ने इस प्रस्ताव को कई बार नकार दिया। पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी डा. एमसी जोशी को इस घटना की पूरी जानकारी दी गयी, लेकिन अभी तक राजस्व पुलिस में मुकदमे का दर्ज न होना उपजिलाधिकारी, जिलाधिकारी की भूमिका को माफिया के साथ मिला हुआ पाते हैं। उत्तराखण्ड श्रमजीवी पत्रकार यूनियन की जिला इकाई पूरे मामले में दबाव बनाने में लगी हुई है।

इस घटना के बाद मदकोट क्षेत्र में भाजपा, कांग्रेस के साथ-साथ तमाम संगठनों ने क्षेत्रीय मानसिकता तथा पत्रकार से बदला लेने की भावना को रखते हुए व्यापार मंडल, ग्राम पंचायतों की संयुक्त बैठक में खाप पंचायत की तर्ज पर फैसले लिये गये हैं, जो इस लोकतंत्र के लिए घातक है। फैसला लिया गया है कि पत्रकार पवन बत्रा पांच दिन के भीतर मदकोट को छोड दें। उनकी पत्नी एक निजी स्कूल में शिक्षिका हैं, स्कूल के प्रबन्धक को भी पत्रकार की पत्नी को स्कूल से निकालने को कहा गया है। स्कूल में जाते ही प्रबन्धक ने पत्रकार की पत्नी को स्कूल में ना आने को कहा। हालांकि स्कूल के अन्य स्टाफ के विरोध के कारण प्रबन्धक कुछ न कर सके। इसी स्कूल में पत्रकार के दो बच्चे भी पढ़ते हैं, उनका नाम स्कूल से काटने के लिए भी प्रस्ताव स्कूल के प्रबन्धक को भेजा गया है। मदकोट क्षेत्र के पंचायत तथा व्यापार मंडल खनन माफियाओं के दबाव में खाप पंचायत की तरह फैसले ले रहे हैं।

इस पूरी घटना ने उत्तराखण्ड में खनन माफियों के गठजोड़ की सच्चाई को सामने ला दी है। उत्तराखण्ड में पुलिस, प्रशासन तथा राज सत्ता के लोग किस प्रकार से खनन करने वाले माफिया के चंगुल में हैं, यह बात इससे साबित तो हो गयी है लेकिन यह चुनौती भी है कि इस राज्य में कैसे खनन माफिया के खिलाफ कलम चले। उत्तराखण्ड श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के प्रान्तीय महामंत्री प्रयाग पांडेय के अनुसार मदकोट में खनन माफिया जिस तरह से अन्य संस्थाओं का प्रयोग अपने हितों के लिए कर रहे हैं यह चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि शासन-प्रशासन पर दबाव बनाने के साथ-साथ हम पत्रकार को न्याय दिलाने के लिए देश भर के पत्रकारों से सहयोग मांग रहे है।

यूनियन के प्रान्तीय वरिष्‍ठ उपाध्यक्ष जगत मर्तोलिया के अनुसार उत्तराखण्ड में भाजपा व कांग्रेस की सत्ताओं ने खनन माफिया पैदा किये हैं। मदकोट की घटना उत्तराखण्ड ही नहीं देश की पहली घटना है, जब खनन माफिया के खिलाफ लिखने पर पत्रकार को पांच दिन के भीतर इलाका छोड़ने का फैसला सार्वजनिक हुआ है। उन्होंने कहा कि पूरी भाजपा की टीम अपने खनन माफिया को बचाने तथा पत्रकार को इलाके से भगाने में जुटी हुई है। उन्होंने कहा कि 12 सितम्बर को दोपहर 12 बजे से पिथौरागढ़ के नगर पालिका सभागार में सभी लोकतांत्रिक समर्थक तथा प्रेस की आजादी के पक्षधर संगठनों की संयुक्त बैठक बुलाई गयी है।

एक पत्रकार द्वारा भेजा गया पत्र.

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

0 Comments

  1. suresh mishra

    September 12, 2011 at 5:08 am

    bbhayi yashwant ji jaraa yah baat lal krishna aadwaani ko bhi bataayiye jo desh ki yaatra par nikalane waale hain / aadwaani kis munh se yatraa karenge / yadi patrakaar batraa ko kuchh ho gayaa to iski saari jimmedaari wahaan ki sarkaar , afsar aur un daulat ke bhookhe bhediyon ki hogi. ham saare patrakaar batraa ke saath hain/

  2. chandan bangari

    September 12, 2011 at 8:52 am

    satta ke nase me bjp neta chur hain aur prasasan natmastak bana hai. patrakar per ho rhe hamle ke bad bhi patrakar biradari khamosh baithi hai. bade sharam ki bat hai. isse bura kuch nhi ho sakta hai. ab patrakar ko bhi sahar chodane ka farman suna diya jana aane wale khatare ka sanket hai.

  3. a.k.gupta

    September 12, 2011 at 10:39 am

    Dear all media mamber and uni. media house sonebhadra u.p sopat to pavan ( danick jagran repoter ) and press uni.uk.
    Dr.A.K.Gupta ( Chif Editor & President )
    Wah Kya Baat Hai ( Natianol Hindi Magazine) & Media House
    Head Office – Media House. Dalla.Sonebhadra.U.P. 231207. India
    [email protected]

  4. Anwar Ansari

    September 12, 2011 at 5:01 pm

    जागरण वालो ने कभी अपने किसी पत्रकार का साथ नहीं दिया, तभी तो इस तरह की घटना हुई, खैर पत्रकार के साथ इस तरह की घटना काफी घातक है, और हम आपके साथ जरूर है, साथ ही में ये भी कहना चाहूँगा की डीएम और एसएसपी अपने फ़र्ज़ को देखते हुए खुद रेत माफिया को गिरफ्तार करे

  5. harish singh

    September 13, 2011 at 6:16 am

    इतना बड़ा लेख छापने से पहले ये तो पता कर लो, ये सिर्फ पत्रकार ही है या फिर खुद भी खनन के कारोबार में लिप्त है। चर्चा तो ये भी है कि ये पत्रकार कम ठेकेदार ज्यादा है। अगर ऐसा है तो फिर कौन से बड़ी बात है।

  6. deepak gupta

    September 13, 2011 at 7:04 am

    पिथौरागढ़ के मदकोट में खनन माफियाओं द्वारा जागरण के पत्रकार के साथ किया जा रहा ब्यवहार वाकई सोचनीय विषय है.. यू तो पत्रकारों को कोई भी संगठन अपने द्वारा किये जा रहे कार्य कि कवरेज के लिए बड़े ही सम्मान के साथ बुलाया जाता है. ताकि बिना किसी खर्चे के उनके कार्यकलापों का प्रचार प्रसार हो जाये.. लेकिन छेत्र हित में उसके द्वारा लिखे गए माफियाओं के खिलाफ लेख या खबर पर उसके साथ होने वाले अत्त्याचार को कौन देखेगा, ये एक सवाल है.. मेरा मानना तो ये है कि अगर पत्रकार गलत है तो उसके खिलाफ ठोस कार्यवाही हो, ताकि जनता में, पत्रकारिता की गलत छवि दर्शाने वाले लोगों को सबक मिल पाए.. पर वो सही है तो माफिया तंत्र को शासन-प्रसाशन का समर्थन आंखिर क्यों…?
    जो काम कानून का है, वो आज माफिया कर रहे है…. अपना कानून, अपना तुगलकी फरमान , जिसे चाहो उसे दबा लो.. जो सरासर गलत है.. ऐसी अलोकतांत्रिक व मनमानी हरकतों पर यदि जल्द रोक ना लगी तो समाज के हित में काम करने वाली ताकतों का ना सिर्फ मनोबल टूटेगा वरन राक्सशी प्रवार्तियाँ हावी होंगी…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास तक खबर सूचनाएं जानकारियां मेल करें : [email protected]

भड़ास के वाट्सअप चैनल से जुड़ें और नवीनतम खबरें पाएं : Bhadas Whatsapp

भड़ास लीगल टीम : किसी किस्म की लीगल हेल्प के लिए संपर्क करें- Bhadas Legal Team

You May Also Like

Uncategorized

भड़ास4मीडिया डॉट कॉम तक अगर मीडिया जगत की कोई हलचल, सूचना, जानकारी पहुंचाना चाहते हैं तो आपका स्वागत है. इस पोर्टल के लिए भेजी...

Uncategorized

भड़ास4मीडिया का मकसद किसी भी मीडियाकर्मी या मीडिया संस्थान को नुकसान पहुंचाना कतई नहीं है। हम मीडिया के अंदर की गतिविधियों और हलचल-हालचाल को...

हलचल

[caption id="attachment_15260" align="alignleft"]बी4एम की मोबाइल सेवा की शुरुआत करते पत्रकार जरनैल सिंह.[/caption]मीडिया की खबरों का पर्याय बन चुका भड़ास4मीडिया (बी4एम) अब नए चरण में...

Uncategorized

मीडिया से जुड़ी सूचनाओं, खबरों, विश्लेषण, बहस के लिए मीडिया जगत में सबसे विश्वसनीय और चर्चित नाम है भड़ास4मीडिया. कम अवधि में इस पोर्टल...