राहुल देव अब आज समाज अखबार चले गए हैं. कांग्रेसी नेता विनोद शर्मा वाले इस अखबार में वे प्रधान संपादक बने हैं. सीएनईबी न्यूज चैनल से विदाई के बाद राहुल देव की कुछ जगहों पर बातचीत चली लेकिन ज्यादातर जगहों पर एडिटर-इन-चीफ की कुर्सी खाली न होने के कारण उन्हें मायूस होना पड़ा. ऐसे में उनके पास दोयम दर्जे के कुछ अखबारों-चैनलों के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचा था. सो, उन्होंने आज समाज का प्रधान संपादक बनना कुबूल किया. उल्लेखनीय है कि सीएनईबी में राहुल देव को अनुरंजन झा ने सीईओ और एडिटर इन चीफ की कुर्सी से अचानक हटवाने में कामयाबी पा ली थी. उस समय राहुल देव यही कहते रहे कि वे सीईओ और एडिटर इन चीफ हैं और रहेंगे भी. लेकिन समय ने उनके दावों को झुठला दिया.
राहुल देव को बेबसी व मायूसी में सीएनईबी से अलग होना पड़ा. बॉस के जाने के बाद राहुल देव के लोगों को एक-एक कर चैनल से जाने को मजबूर किया जाने लगा या खुद ही ये लोग छोड़कर जाने लगे. राहुल देव ने सीएनईबी से खुद को हटाए जाने को लेकर लंबे समय तक चुप्पी साधे रखी. बातचीत में वे लगातार यही कहते रहे कि उन्हें सीएनईबी चेयरमैन ने सीईओ और एडिटर इन चीफ की कुर्सी पर बने रहने को कहा है और जो कुछ नया हो रहा है, वो सब तात्कालिक व्यवस्था के तहत है, बिहार चुनावों तक के लिए है.
पर अब यह स्पष्ट है कि हालात वो नहीं थे जो राहुल देव बता रहे थे. उन्हें प्रबंधन ने निजी तौर पर जाने को कह दिया था, सो वो कई जगहों पर हाथ-पांव मार रहे थे. लेकिन पब्लिकली यह कह रहे थे कि वे सीएनईबी में उनकी कुर्सी यथास्थान अब भी कायम हैं. अंततः जब उनकी सीएनईबी से विदाई की डेडलाइन पूरी हो गई तो उन्होंने अंतिम आप्शन ‘आज समाज’ को चुना. देखना ये है कि भारी भरकम तनख्वाह लेने वाले राहुल देव अब आज समाज में कितने दिन टिक पाते हैं. राहुल देव करीब 32 सालों से मीडिया में हैं.
घटिया ब्रांडों के साथ काम करने के पहले राहुल देव कई बड़े ब्रांडों यथा आज तक, दूरदर्शन, जी न्यूज आदि के साथ काम कर चुके हैं. जनसत्ता अखबार में वे आरई रहे हैं. लेकिन बदले समय के साथ उन्हें समझौता करते हुए छोटे व नए ब्रांडों के साथ एसोसिएट होना पड़ा. कभी वे जनमत चैनल में थे जिसे बंद होना पड़ा था. सीएनईबी में भारी भरकम फौज लाने के बावजूद वे लगभग नाकाम ही रहे. चर्चा है कि आज समाज में राहुल देव का दौर कहीं शुरू होने से पहले ही न बंद हो जाए. हालांकि राहुल देव के बारे में मशहूर यही है कि अखबार या चैनल भले बंद हो जाएं, उनकी नौकरी कहीं न कहीं ठीकठाक पद व पैकेज पर चलती रहती है.












dhiraj dhillon
November 24, 2010 at 6:48 am
kisi akhbar ya chanal ko doyem darje ka batana galat hai, kirpya isme sudhar karen.
Nikku
November 24, 2010 at 7:40 am
RAHUL ji jaise desh ke jaane maane patrakar aise haashiye pe jaana desh kaa durbhaghya hai
anonymous
November 24, 2010 at 7:42 am
पहले पक्का हो जाये कि ज्वाइन कर भी लिया या नहीं। आज समाज वाले सिर्फ टीआरपी बढ़ाने के लिए बड़ी बड़ी अफवाहें उड़ाते रहते हैं। कभी एमजे अकबर कभी प्रभु चावला तो कभी राहुल देव। आज समाज ज्वाइन कर लिया तो कोई बुराई नहीं है लेकिन वे वहां काम क्या करेंगे। सिर्प दिन गिनने हैं। अखबार दिल्ली में तो बंद ही हो चुका है। शायद चंडीगढ़ में शुरुआत की थी परंतु अब बंद होने के कगार पर है। अलबत्ता जब तनख्वाह न िमलेगी तो भागना ही पड़ेगा। वैसे भी कोई आज समाज में टिकता नहीं है। राहुल देव कहां देखेंगे और क्या करेंगे।
vineet kumar
November 24, 2010 at 9:24 am
माफ कीजिएगा,शीर्ष आपने ऐसी लगायी कि मैंने पढ़ा- आज समाज को कब तक काटेंगे राहुल देव? सवाल पर्सनल हो जाता है लेकिन मेरा मन इन दिग्गजों से करने का जरुर होता है कि आप किस सरोकारी पत्रकारिता के तहत ऐसे दागदार संस्थानों में काम करने जाते हैं। आप अभी तक पत्रकारिता को मिशन की कंठीमाला लेकर घूमते रहते हैं लेकिन इतनी भी तो खाने-पीने और जीने की मजबूरी नहीं होती कि कोई एथिक्स काम नहीं करता और आप चिपक जाते हैं कहीं भी,बिना कोई सोच के।.
mani
November 24, 2010 at 12:00 pm
doyam darje ki kya paribhasha hai. iska bhi ullekh krna tha yashwant…
akhbaro se door hone kya baad tumhari paribhasha me doyam darja kya hai.
Rahul Dabas
November 24, 2010 at 12:32 pm
आपको युगान्तर-संध्या-कैसरी या हरिजन का नाम याद है..। अगर याद होता ऐसे लेख नहीं लिखते, चलो गांधी-खुदी राम बोस-तिलक और गंदर पार्टी का नाम तो याद होगा.. किसी ज़माने में इन्हें भी छोटा अख़बार कहा जाता था..लेकिन कलम या कैमरा माध्यम होता और उसे लिखने ये दिखाने वाला पत्रकार..जिसे कभी छोटा या बड़ा नहीं समझना चाहिये
आपका वेब-पोटल trp की अंधी दौड़ की बुराई तो करता लेकिन खुद के हिट भड़ाने के लिये ‘आज समाज’ में कब तक दिन काटेंगे राहुल देव? जैसे टाइटलो से परहेज़ नहीं करता..। जब तक आपके पोर्टल पर सीएनईबी का विज्ञापन आता था तब अटल जी सरकार की तरह राहुल जी का का भी उदय था और सत्ता से उतरते ही सरोकार-सच और शब्द बदल गये..इसे कहते आज के समाज मीडियां भड़ास…।
sandeep
November 24, 2010 at 3:51 pm
ye ghatiya brand kisko kahte hai bhai , kya aaj tak aur chand channalo ne media ko kharid liya hai , aap to patrkarita ko mission kahte hai yashvant ji to ye ghatiya aur chote shabd aapki dictionary me kahan se aa gay …. shayad aapko pata nahin chote channal jaldi nahin bikte aur khabar thok kar dikhate hai
स्ट्रिंगर ...............
November 25, 2010 at 5:19 am
यशवंत जी नमस्कार ! आप समझदार है लेकिन किसी संस्थान को दोयम दर्जे का कहना अनुचित होगा ! दो दिन पहले ही भड़ास पर ये छपा था की प्रभु चावला दलाल है, अब सोचने वाली बात ये है की चावला आज तक जैसे चैनल के चेहरा है और इंडिया टुडे सरीखी किताब के कलमकार है ! फिर सवाल ये बनता है की आज तक और इंडिया टुडे का कौनसा दर्जा है जहां दलाली की मण्डी लगती है माफ़ कीजियेगा ये मण्डी शब्द हम नहीं कह रहे है बल्कि दलाल शब्द के बाद ये ही बात आती है ! आपसे ये उम्मीद करते है की जो सच्च है वो लिखे, ऐसी भाषा शोभा नहीं देती और रही बात हमारे क्षेत्र की तो ये आपसे छुपा नहीं है की सी एन इ बी भी वो चैनल है जिसने ज्यादातर स्ट्रिंगरों के पैसे डकार लिए है और इसमे राजस्थान गवाह है ! नाम लेना ठीक नहीं रहेगा बल्कि सिर्फ इतना कहेंगे की आज की तारीख में शीर्ष पर कहे जाने वाले चैनलों ने भी स्ट्रिंगरों के साथ धोख किया है फिर ये तो सवाल ही नहीं बनता है की कौन बड़ा या फिर कौन छोटा ! हम तो ये ही कहेंगे चोर चोर मौसेरे भाई !
Nemish
November 25, 2010 at 7:37 am
yaswant ji. mai vaise bhi bhadash kam dekhata hu. isliye ki yaha satahi baate hoti hai. or khud kahit sadhane wala bhi. [b][/b]
sahi kaha hai kisi ne bas baat karne se kuchh nahi hota. use amal me bhi lana chahiye… ye shayad aap nahi karte…
ek baat aor. buraa lagega aap ko. bahut badhiya abhiyan tha aap ka. maa ke sath pulishiya badsaluki ka.. aap ne jamin aasman ek kar diya. khud sochiye dusare ki maa ke sath huae badsaluki par kitani awaz uthaye hai aap ne. yaad rakhiye aap faisala sunane wale ya kisi ka bhawishy tay karne wale nahi hai..
Ashish Singh
November 26, 2010 at 3:04 pm
Rahulji kaa CNEB se janna is channel ke tarakee kaa raastaa kholegaa . Rahulji aap kee CNEB team kaa kya hoogaa .Sub berojgaar hoo jayengee. Unhee bhee apnee saath lete jayeegaa.
Asish Singh
pranay sinha
November 27, 2010 at 8:12 pm
TO Asish Singh
आपके विचार पढ़े बेहद ही घटिया हैं… आपको बता दो कि राहुल देव पर कमेंट के लायक आप हैं नही… रही बात उनकी टीम की तो चिंता मत कीजिए कुछ लोग अच्छी जगह जा चुके हैं… और कुछ अच्छी जगह चले जाएंगे… क्योंकि सीएनईबी से ज्यादा घटिया जगह क्या होगी… रही बात अनुरंजन झा की … तो उनके वश में नहीं है कि वो सीएनईबी को ऊपर उठा पाएंगे… लोग एस वन और इंडिया न्यूज कू हालत देख चुके हैं…