आज समाज से जाना पड़ा मधुकर उपाध्याय को

राहुल देव के आज समाज का समूह संपादक बनने के बाद अब तक समूह संपादक के रूप में काम कर रहे मधुकर उपाध्याय ने इस्तीफा दे दिया है. मधुकर उपाध्याय के नेतृत्व में ही आज समाज अखबार की शुरुआत हुई थी. पिछले कई महीनों से मधुकर साइडलाइन चल रहे थे और अखबार से जुड़े फैसलों में उनकी कोई राय नहीं ली जाती थी. अब जबकि एक नए ग्रुप एडिटर आ गए हैं, मधुकर के जाने की चर्चा तेज हो गई. बताया जाता है कि कल मधुकर उपाध्याय आफिस आए और अपना सामान समेटकर चले गए. उनकी प्रबंधन से जुड़े कुछ लोगों से कुछ देर तक बात हुई. उसके बाद वे आफिस छोड़कर चले गए.

सीईओ के रूप में राकेश शर्मा और मैनेजिंग एडिटर के रूप में रवीन ठुकराल के आने के बाद आज समाज में मधुकर उपाध्याय की पोजीशन पहले ही खराब हो गई थी. पर उपेक्षा के बावजूद मधुकर उपाध्याय आज समाज में बने रहे. भड़ास4मीडिया ने मधुकर उपाध्याय को जब उनके इस्तीफे के बाबत फोन किया तो उन्होंने फोन नहीं उठाया. उधर सूचना है कि राहुल देव 29 नवंबर से आज समाज के आफिस में बैठना शुरू कर देंगे. सूत्रों के मुताबिक राहुल ने ज्वाइन पहले ही कर लिया लेकिन कामकाज शुरू करने के लिए 29 नवंबर का दिन तय किया है. एक दिसंबर को आज समाज के गुड़गांव एडिशन को लांच होना है. इसके लिए भी तैयारियां जोरों से चल रही हैं.

Comments on “आज समाज से जाना पड़ा मधुकर उपाध्याय को

  • संजय says:

    श्री मधुकर उपाध्याय जैसे वरिष्ठ और बेहतरीन पत्रकार को आज समाज के साथ अपनी पारी की शुरूआत करनी ही नहीं चाहिए थी।
    ऐसा हमेशा होता है जब कोई नया अखबार आता है तो किसी बड़े पत्रकार को बुला लिया जाता है। कोई भी नया अखबार तुरंत नहीं जमता। बाद में निवेश करने वाले और मालिक तुरंत उसका प्रभाव और लाभ चाहते हैं। तब उन्हें लगता है कि जो लोग उनके यहां कार्य कर रहे हैं, वे अच्छे नहीं हैं।
    जबकि नये अखबार से साथ जुड़े पत्रकार सबसे ज्यादा मेहनत करते हैं। मालिकों की उनकी मेहनत नजर नहीं आती है। जब मेहनत की फसल आती है तो काटने वाले कोई और चले आते हैं।
    नये पत्रकारों को सिखने के लिए अखबार के लॉचिंग के समय जरूर जुड़ना चाहिए। लेकिन पुराने पत्रकारों ऐसे मौके को मजबूरी में ही भुनाना चाहिए।
    संजय
    🙁

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  • ek reporter aaj samaj se says:

    ab sayad aaj samaj ka kuch bhalla ho jayega. bus ek aur aalsi waha pada hai chief reporter bankar use bhi bahar ka rasta jald hi management ko dikhana chahiye. tab to reporters ka bhi bhala ho jayega.

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  • Girish Mishra says:

    I have not been able to make out why this paper was started at all. In Delhi, it has not been able to take off. In spite of all the claims, it has not cared to pay to the contributors who were requested to contribute articles. So far as Rahul Dev is concerned, I am unable to understand how he will run a pro-Congress paper with his Sanghi orientation.

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  • माननीय मधुकर जी के बाद कुछ और लोगो की विदाई पोसिबल है. उसमे वो सभी है जो डबल सलारी पते है. एम डी आजकल उन सभी से उनके काम के बारे मे रिपोर्ट मांग रहे है अप्पको इतनी मोटी सेलरी मिलती है आपका आउट पुट क्या है.

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