आप सत्‍तालोभी, गुलाम और डमी प्रधानमंत्री हैं

आदरणीय मनमोहन सिंह जी, सादर प्रमाण। आपकी हताशा और निराशा से भरा हुआ बयान पढ़ा। पढकर बड़ी वेदना हुई तथा अपनी अतीत की स्मृतियों में खो गया। 14 वीं लोकसभा में हम 11 सदस्यों को छद्म नाम से बनाई गई कम्पनी द्वारा प्रश्न के बदले पैसे की एक सनसनीखेज समाचार के आधार पर, जिसमें स्ट्रिंग आपरेशन करने वाली कम्पनी ने 5 लाख 25 हजार की पूंजी लगाकर कैसेट को आजतक को 48 लाख में बेचकर अधिक धन कमाया तथा संसद में आपकी सरकार ने हम 11 सदस्यों की भ्रूण हत्या कर दी, उस दिन आपने कहा था इस घटना से मेरा सिर शर्म से झुक गया है और नैतिकता के आधार पर सदन की गठित समिति ने संसद के इतिहास में पहली बार 7 दिवस के अन्दर रिपोर्ट देकर सदस्यता समाप्त कर दी।

आज आपके कुशल मार्गदर्शन में 176 लाख करोड़ रूपये का 2-जी स्पैक्ट्रम घोटला, 70 हजार करोड़ रूपये का कामनवेल्थ गेम्स घोटाला, आदर्श सोसायटी घोटला, 200 लाख करोड़ का एस बैण्ड घोटाला, जो सीधे आपके नियंत्रण का विभाग है तथा सुरक्षा जैसे संवेदनशील विषय से जुड़ा हुआ है। इस जैसे अन्य घोटाले आपके कार्यकाल में हुए परिणाम स्वरूप देश को अरबों रूपये का नुकसान हुआ तथा अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि खण्डित हुई और आप गठबंधन धर्म की मजबूरी बताकर अपने पाप पर पर्दा डालने का प्रयास कर रहे हैं। यह आप जैसे अर्थशास्त्री को शोभा नहीं देता है।

आप अर्थशास्त्री है, इसलिए बड़ी कुशलता से आपके अधीनस्थ आपकी सहमति से अर्थ का अनर्थ कर रहे हैं और आप मौन हैं, मजबूर हैं, बेबस व लाचार हैं। कौरवों की सभा में द्रोपदी का चिरहरण हो रहा था सारे दिग्गज मौन थे, लेकिन उसकी करूण पुकार को कृष्ण ने सुनकर सहायता प्रदान की तथा काल ने समय आने पर सभी को अपने-अपने तरीके से दण्ड दिया। सभा में मौन विद्वानों को भी पश्चाताप की अग्नि में जलकर प्रायश्चित करना पड़ा था।

हम सभी लोग काम, क्रोध, लोभ, मोह, अंहकार के पुतले हैं। विश्वामित्र के तप को मेनका ने खण्डित किया, धन के लोभ ने ‘‘आपरेशन दुर्योधन‘‘ का निर्माण किया, अपनी सत्ता बचाने के लिए आपने करोड़ों रूपये देकर सांसदों को खरीदा, लोकतंत्र के इतिहास में पहली बार संसद के अंदर तीन करोड़ रूपये आए, सत्ता के मद में तमाम संवैधानिक मर्यादाओं को तार-तार करते हुए आपने उन्हीं सांसदों को दोषी ठहराने का कुत्सित प्रयास किया। वस्तुतः आप सत्ता लोभी प्रधानमंत्री हैं। जब व्यक्ति लोभी होता है, तो वह गुलाम होता है, और आप एक गुलाम प्रधानमंत्री हैं।

विधायिका में प्रधानमंत्री का पद बड़ा महत्वपूर्ण होता है, लेकिन आप एक नौकरशाह से प्रधानमंत्री बने हैं, इसलिए आप डमी प्रधानमंत्री हैं तथा सुपर प्राइम मिनिस्टर के मौखिक दिशानिर्देश पर मजबूरी में बेबस और लाचार होकर काम करते हुए आपने प्रधानमंत्री के पद की गरिमा को गहरा आघात पहुंचाया है। राजनीति का सिद्वांत है बरगद के नीचे दूब नही फलता-फूलता, लेकिन बरगद एक दिन बूढ़ा होता है और उसकी जड़ें खोखली हो जाती हैं 125 वर्ष पुरानी कांग्रेस की जड़ें खोखली हो गई हैं। इस पार्टी में एक भी आचरण का आचार्य नहीं है जो देश को दिशा दे सके। वर्तमान राजनैतिक दौर में सभी राजनैतिक दलों में आचरण के आचार्य की शून्यता नजर आ रही है, इसलिए रामदेव बाबा जैसे योगी जब दहाड़कर राजनैतिक दलों के खोखलेपन को उजागर करते हैं तो युवामन में क्रांति की लहरें दौड़ती हैं तथा बाबा जिस अग्नि को प्रज्‍ज्‍वलित कर रहे हैं, वह कब दावानल का रूप धारण कर लेगा यह भविष्य के गर्भ में छिपा हुआ है।

आपने मिस्र जैसी क्रांति पर कहा कि भारत में स्वतंत्र प्रेस तथा मजबूत लोकतंत्र है यहॉ सम्भावना नहीं है, लेकिन आपके कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि टॉप पालिटिशियन, टॉप ब्यूरोक्रेट्स तथा टॉप कार्पोरेट्स व टॉप प्रेस के अपवित्र गठबंधन का जो पर्दाफश हुआ है वह एक नई इबादत लिख सकता है?

आप मजबूर नहीं, मजबूत प्रधानमंत्री बनें, ईमानदार बनें नहीं बल्कि निर्णय से दिखे, रिमोट कंट्रोल से न चले अपितु अपने स्वयं के आत्मबल और मनोबल के सहारे चलें। ‘‘सिंह इज किंग‘‘ को चरितार्थ करें, चूंकि यह कौम बलिदानी कौम रही है और समय बलिदान मांग रहा है। हम 11 सदस्यों की सदस्यता नैतिकता और शुचिता के सवाल पर समाप्त की गई, आज हम उसी नैतिकता और शुचिता के सवाल पर आपसे मौन तोड़वाना चाहते हैं। नैतिकता और शुचिता के सवाल पर दोहरे मापदण्ड अपनाना क्या उचित कदम होगा?

स्व. हीरेन मुखर्जी व्याख्यानमाला में ”सामाजिक न्याय” के सिद्वांत पर बोलते हुए नोबल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन ने मत्स्यन्याय के सिद्धांत पर कहा था कि बड़ी मछलियां छोटी मछलियों को खा जाती हैं,  यह मत्स्यन्याय बंद होना चाहिए लेकिन आज भी मत्स्यन्याय चल रहा है। प्रेस ने आपकी प्रतिमा खण्डित करने का प्रयास किया तो आपको वेदना हुई, आपने कहा मैं दोषी हूं मगर उतना नहीं जितना प्रचारित किया जा रहा है, तथा आपने कहा कि अभी बहुत कुछ करना है अतः इस्तीफा नहीं दूंगा। मेरा आपसे विनम्र आग्रह है कि आप जेपीसी गठन से डर रहे हैं तो उसके सामने लोकतंत्र के इतिहास में पहलीबार किसी प्रधानमंत्री को तलब किया जाएगा, उस समय रोज आपकी छवि खण्डित होगी और आप जवाब नहीं दे पाएंगे। अतः मजबूत लोकतंत्र की स्थापना के लिए आप शीघ्र अपने पद से मुक्त होकर नया जनादेश प्राप्त करें तथा दोहरे चरित्र के जीवन से ऊपर उठकर नया आदर्श प्रस्तुत करें।

( प्रदीप गांधी )

पूर्व सांसद, राजनांदगांव (छ.ग.)

(ऑपरेशन दुर्योधन में फंसे फिर इस्तीफा देने को मजबूर हुए छत्तीसगढ़ राजनांदगांव के भाजपा सांसद प्रदीप गाँधी द्वारा भ्रष्टाचार के आरोपों में बुरी तरह फंसी यूपीए गठबंधन सरकार के प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को लिखा पत्र)

अपने मोबाइल पर भड़ास की खबरें पाएं. इसके लिए Telegram एप्प इंस्टाल कर यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia

Comments on “आप सत्‍तालोभी, गुलाम और डमी प्रधानमंत्री हैं

  • gandhi ji pura desh netaon ki karastani se bhrasht ho chuka hai. kya pradhanmantri kya sansad sadasy mera tatpary aap samajh chuke honge. aap logon ki nazarron men desh ki janta bhole ho sakte hain lekin murkh nahi hain ye janta kya kar jayen kisi ko malum nahin. jai hind

    Reply
  • मदन कुमार तिवारी says:

    प्रदीप जी आपकी बात सही है लेकिन अब तो उससे भी बडी एक समस्या पैदा हो गई है । देश के कुछ बुद्धि कुबेरो ने एक मदारी को प्रधानमंत्री बनाने की कसम ले ली है । इससे तो अच्छा है एक निरीह , दुसरे के इशारे पर नाचने वाला प्रधानमंत्री । आठवी पास यह मदारी अरबपति होकर इमानदार बनता है ।

    Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *