आरुषि हत्याकांड : कोर्ट ने न्याय की हत्या की

आलोक तोमरनोएडा की एक विशेष अदालत ने न्याय की हत्या कर दी। गनीमत है कि यह अदालत देश की आखिरी अदालत नहीं है और फिलहाल इतिहास में यह लिखने के लिए बाध्य नहीं है कि डॉक्टर राजेश और डॉक्टर नुपुर तलवार ने लगभग सवा दो साल पहले अपनी चौदह साल की मासूम बेटी की हत्या कर दी।

सबसे पहले तो यह कि जब तक वह निरक्षरों और जाहिलों की खाप पंचायत नहीं हो तब तक आप अपनी नहीं कर सकते कि कोई अपनी बेटी को कितने भी बड़े कारण से मारने की हिम्मत करेगा या उसकी आत्मा उसे ऐसा करने देगी। फिर आरुषि को तो देश के सबसे बड़े और महंगे स्कूलों में से एक में पढ़ाया जा रहा था और एयरकंडीशनर लगा हुआ बेडरूम उसे लैपटॉप और इंटरनेट के वाई फाई कनेक्शन के साथ मिला हुआ था।

आखिर जिनकी छाती पर उनकी बेटियां बोझ होती हैं, वे बेटियों को इतने लाड और दुलार से नहीं पालते। राजेश तलवार और नुपुर के पिकनिक और यात्राओं के वीडियो भी अब लगभग पूरा देश देख चुका है और यह भी देख चुका है कि दमे के मरीज डॉक्टर तलवार अपनी बेटी को कंधे पर बैठा कर कैसे दौड़ रहे थे और हाफ रहे थे। यह हत्यारे और शिकार के रिश्ते का दृश्य नहीं हो सकता। एक टीवी चैनल पर दुनिया भर से डॉलर ठूंसने वाली एक देवी जी, झूठ को सच करने वाले एक वकील साहब और चिकित्सा के नाम पर परी कथाएं सुनाने वाले एक मनोविश्लेषक खुद भी राजेश और आरुषि को हत्यारा मान चुके कार्यक्रम संचालक के साथ बैठ कर सीबीआई के तथाकथित समाजवाद और सामंतवाद पर बहस कर रहे थे। संचालक को तो खैर कई लाख रुपए वेतन मिलता है और जो देवियां और सज्जन इस बहस में हिस्सा ले रहे थे उन्हें भी अच्छी खासी फीस दी जा रही थी। इन भाई लोगों और बहनजियों का समाजवादी सवाल यह था कि इस मामले में आस पड़ोस के जिन नौकरों पर शक किया गया उनकी तरफ से बोलने वाला कोई नहीं था और न उनकी जमानत करवाने के लिए कोई सामने आया था। आरोप यह भी था कि खुद राजेश तलवार और नुपुर ने नौकरों को फंसने दिया।

पता नहीं किसी को क्यों याद नहीं हैं कि राजेश तलवार और नुपुर दोनों को झूठ पकड़ने वाली पॉलीग्राफ मशीन पर बिठाया गया था और राजेश तलवार का तो नारको टेस्ट भी हुआ था। जिस पर शक था, सीबीआई ने उसे घेर लिया। सीबीआई को बड़ी काबिल संस्था माना जाता है मगर उत्तर प्रदेश पुलिस ने आरुषि का फोन डेढ़ साल मे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के एक छोटे से शहर से बरामद कर के दिया। सीबीआई तो अदालत में यह कहने गई थी कि उसके पास आरुषि और हेमराज की हत्या के मामले में कोई साफ सबूत नहीं है और वह मामला बंद करने की अनुमति चाहती है।

सीबीआई की अदालत की जज प्रीति सिंह को बहुत काबिल कानूनी विद्वानों में से नहीं गिना जाता मगर वे चीफ जूडीशियल मजिस्ट्रेट की कुर्सी पर बैठी थीं और उन्होंने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट की एक पंक्ति पकड़ ली जिसमें कहा गया था कि हत्या तो घर में मौजूद किसी व्यक्ति या व्यक्तियों ने ही की है। घर में हेमराज, आरुषि, राजेश और नूपुर मौजूद थे और इनमें से दो मारे जा चुके हैं इसलिए प्रीति सिंह ने राजेश और नूपुर को हत्या के आरोप में इसी क्लोजर रिपोर्ट को चार्ज शीट बना कर देने के आदेश दे दिए। कहा तो राजेश और नूपुर सीबीआई के सामने पिछले दो साल से अपनी बेटी के हत्यारों का पता और उसके साथ हुए अपराध के लिए न्याय मांग रहे थे ओैर कहां वे दोनों ही अभियुक्त हो गए। जज प्रीति सिंह ने 28 फरवरी की तारीख दी है। राजेश तलवार पहले से जमानत पर हैं और नूपुर को अभियुक्त बन जाने के बाद जमानत लेनी पड़ेगी।

बहुत संभावना इस बात की है कि क्योंकि नूपुर तलवार से भी सीबीआई और नोएडा पुलिस लगभग हर मुद्दे पर पूछताछ कर चुकी है और नोएडा पुलिस की नालायकी खुद सीबीआई और सीबीआई की नालायकी वकील पकड़ चुके हैं इसलिए नूपुर तलवार को जमानत दे दी जाएगी। मगर गाजियाबाद अदालत में जिस तरह के सनकी न्याय की परंपरा चल रही है उसे देखते हुए कुछ भी हो सकता है। सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट अपने आपमें एक अजीबोगरीब दस्तावेज है। इसका एक पैरा उसके अगले पैराग्राफ को खंडित करता है। इसके हिसाब से तो राजेश तलवार के भाई दिनेश और भाई की पत्नी वंदना को भी सबूत मिटाने के आरोप में गिरफ्तार किया जाना चाहिए। सीबीआई ने कहा है कि डीएनए के नमूने अब खराब हो चुके हैं मगर राजेश और नूपुर दोनों मेडिकल के जानकार हैं और उन्होंने सही ही याद दिलाया है कि डीएनए कभी खराब नहीं होता और उसमें से भी पहचान के संकेत निकाले जा सकते हैं।

खुद सीबीआई के अधिकारियों की जड़मूर्खता देख ली जानी चाहिए। सीबीआई के पास इस बात का कोई सबूत नहीं हैं कि हेमराज की हत्या आरुषि के कमरे में की गई। सीढ़ियों पर लाश घसीटने के निशान है, उससे जाहिर होता है कि हत्या कहीं और की गई थी। राजेश तलवार के कपड़ों पर सिर्फ आरुषि का खून पाया। हेमराज के खून की एक बूंद भी नहीं मिली। नूपुर तलवार के कपड़ों पर तो खून की कोई बूंद नहीं मिली। हत्या के हथियार कहीं बरामद नहीं हुए। वैज्ञानिक परीक्षणों से साबित नहीं हुआ कि राजेश और नूपुर तलवार आरुषि की हत्या में शामिल रहे हैं। हेमराज की तलाश तो तीसरे दिन मिली ही तब जब आरुषि की अस्थियां ले कर वे हरिद्वार जा रहे थे।

सीबीआई की एक टीम कहती है कि हत्या खूंखरी से हुई थी और दूसरी कहती है कि हत्या ऑपरेशन करने वाले किसी उपकरण से की गई थी। चलिए, दूसरी वाली बात को सह मान कर राजेश तलवार को फंसाने की कोशिश करता है। राजेश और नूपुर तलवार दोनों दांतों के डॉक्टर हैं दांतो के इलाज में ऑपरेशन के उपकरणों का उपयोग नहीं किया जाता। वैसे भी सीबीआई की रिपोर्ट में हेमराज के किसी जानने वाले के द्वारा आ कर हत्या करने की संभावना पर विचार ही नहीं किया गया। आरुषि के माथे पर सीबीआई के अनुसार किसी ठोस चीज से चोट पहुंचाई गई थी मगर पोर्स्टमार्टम में इस चोट का कोई वर्णन नहीं है। खाने की मेज पर जो व्हिस्की की बोतल रखी थी उस पर खून के दाग पाए गए हैं और तलवार दंपत्ति पता नहीं कब से यह अनुरोध करते आ रहे हैं कि इस बोतल पर जो भी खून के निशान या डीएनए के अंश हैं उनकी भी जांच की जाहिए। उनकी इस बात को कभी किसी ने गंभीरता से नहीं लिया। हैरत तो यह है कि अब पढ़े लिखे और समाजवाद की मुद्रा अपनाने वाले बहुत सारे लोग भी प्रीति सिंह की तरह राजेश और नूपुर को अभियुक्त मान रहे हैं।

लेखक आलोक तोमर देश के जाने-माने पत्रकार हैं.

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Comments on “आरुषि हत्याकांड : कोर्ट ने न्याय की हत्या की

  • anis ahmad khan says:

    Alok ji
    Knoon ki devi ki ankh me patti hoti he our hath me eak trazoo jo khali hoti he woh ye nahi dekhti he ki usme chadawa koun dal raha yahi karan he ki honi ki anhoni agar dekhni he to UP ki adalto me dekhiye khud suprime
    court UP high court par ungli utha chuki he

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  • radha sharma says:

    आपको लख-लख बधाइयाँ आलोक जी ! बधाई तलवार दंपत्ति को भी जिन्हें मुफ्त में (कदाचित ) ऐसा गुनी वकील मिल गया। यदि आप भूत कथाओं में यकीन नहीं करते तो मुझे भी कुछ कहना है-

    – जब घर में कोई पांचवां शख्स था ही नहीं तो तलवार दंपत्ति पर शक क्यों न हो ?

    – कंधे पर आरुषि को बिठाकर दौड़ने वाले चित्रों का हवाला देते समय आलोक भाई यह भूल गये कि वे जिस भिंड जिले से आये हैं वहां ऐसे अनेक हत्यारे हुए हैं जो हतप्राण के साथ ऐसी नजदीकियों के तमाम फोटो अपने घरों में टांगे रहते हैं।

    – खुद आलोक भैया जिन प्रभाष जी के हाथो जनसत्ता से निर्वासित होकर अब तक वनवासी हैं वही जोशी जी इन्ही तोमर जी को काँधे पर उठाये घुमते थे ये सबने देखा है।

    मुमकिन है आप मेरा पत्र प्रकाशित न करें। ऐसे में इसे आलोक जी के पास इस मशविरे के साथ ज़रूर भेज दें कि सेहत ठीक न हो तो बेवज़ह अतार्किक न हों।

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  • अभिषेक आनंद says:

    [b]अलोक तोमर जी, आपने सिर्फ एक चैनल की चर्चा की हैं, आज और अभी तो हर चैनलों की तरफ आपके इस विश्लेषण के उलट ही खबरे हैं. बतौर एक मीडिया छात्र मैं क्या समझूँ आप सही या, बाकी बड़े बड़े पत्रकार? जिसमें चुनिन्दा वैसे भी शख्स हैं जिन्हें आप भी सम्मान देते होंगे.[/b]

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  • apane aap ko kabil aparadh vishleshak samajhane valon se mera ek aagrah hai – yadi talwar dampati ko apani ladali beti ka hatyara man bhi len to jin paristhatiyon me ye hatya batayee ja rahi hai, yese halat me baap ko beti ki hatya nahi to aor kya karna chahiye, is mudde par bhi bahas honi chahiye.

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  • alok ji lagta hai Dr ne aap ki achhi tarah se jeb garam ki hai. Bade patrakar ka thappa lagne ka matalab ye nahi hota ki kuchh bhi likh den.

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  • koi ashchraya nahi is tika-tippani par
    alok ji hi kyon desh main har jagah yehi charcha hai ki aakhir arushi aur hemraj ka katil hai kaun.
    desh ki police to nakara pehle se hi thi, cbi ne bhi bar-bar har bar yahi sabit kiya hai ki jab tak appradhi khud jurm na kabool kar le, tab tak wo dhool main lathh marti rahegi aur kuch nahi.

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  • alok ji aap bilkul hi sahi hain. agar rajesh talwar fasatein ahin to news hai. varana news nahi. investigation mein kuch khas nike ,kuuch ajib nikale to news ahi. maja hai. saleable hai, vaana trp nahi hai., who stole the mobile? theft of mobileis the symptom of some uneducated and probable lower class person is involved . no body is thinking for the mobile which was found again. doctors can not become vilent for their daughters sexual mis-adventourous act. they do understand the urge of sex.

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