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इतनी माइलेज तो बाइक भी नहीं देती, हम तो इंसान हैं

: राष्ट्रीय सहारा न्यूज ब्यूरो में किया जा रहा है कर्मचारियों का शोषण : रूहेलखण्ड मण्डल में राष्ट्रीय सहारा न्यूज ब्यूरो में काम कर रहे कर्मचारियों का धड़ल्ले से शोषण किया जा रहा है। दस-दस माह बीतने के बाद भी नहीं मिल पाया है मानदेय। मुख्यालय पर सम्पर्क करने पर कहा जाता है कि हम अपने संवाददाताओं से बात करते हैं कर्मचारियों से नहीं। इस कारण से कई कर्मचारी मानदेय न मिलने के कारण काम छोड़ कर चले जाते हैं।

<p style="text-align: justify;">: <strong>राष्ट्रीय सहारा न्यूज ब्यूरो में किया जा रहा है कर्मचारियों का शोषण </strong>: रूहेलखण्ड मण्डल में राष्ट्रीय सहारा न्यूज ब्यूरो में काम कर रहे कर्मचारियों का धड़ल्ले से शोषण किया जा रहा है। दस-दस माह बीतने के बाद भी नहीं मिल पाया है मानदेय। मुख्यालय पर सम्पर्क करने पर कहा जाता है कि हम अपने संवाददाताओं से बात करते हैं कर्मचारियों से नहीं। इस कारण से कई कर्मचारी मानदेय न मिलने के कारण काम छोड़ कर चले जाते हैं।</p> <p style="text-align: justify;" />

: राष्ट्रीय सहारा न्यूज ब्यूरो में किया जा रहा है कर्मचारियों का शोषण : रूहेलखण्ड मण्डल में राष्ट्रीय सहारा न्यूज ब्यूरो में काम कर रहे कर्मचारियों का धड़ल्ले से शोषण किया जा रहा है। दस-दस माह बीतने के बाद भी नहीं मिल पाया है मानदेय। मुख्यालय पर सम्पर्क करने पर कहा जाता है कि हम अपने संवाददाताओं से बात करते हैं कर्मचारियों से नहीं। इस कारण से कई कर्मचारी मानदेय न मिलने के कारण काम छोड़ कर चले जाते हैं।

उनके स्थान पर नये कर्मचारी लगाये जाते हैं तो उनके साथ भी वही व्यवहार होता है। क्या सहारा ग्रुप के सहारा श्री अपने ग्रुप में काम करने वाले कर्मचारियों को मानदेय देने से मना करते हैं। कागजी औपचारिकता के नाम पर महीनों परेशान किया जाता है। रुपये मांगने पर कहा जाता है कि काम करना है तो करो वरना रास्ता देखो। यही वजह है कि रूहेलखण्ड में दैनिक समाचार पत्र अपनी पकड़ नहीं बना पाया है। इसके ब्यूरोचीफ दलाली में लगे हुए हैं। बेखौफ होकर पत्रकारिता के सिद्धान्त ताक पर रखे जा रहे हैं। ब्यूरो चीफ सौ रुपये देकर सौ दिन काम कराना चाहता है, इतना माइलेज तो बाइक भी नहीं देती है तो हम तो इन्सान हैं। पीड़ा बयां करने वाले का पहचान गुप्त रखने का अनुरोध है।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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0 Comments

  1. ragesh bhadu

    February 25, 2012 at 9:11 pm

    all mostly every paper use this mether

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