काल तुझसे होड़ है मेरी

अपनी बीमारी के दौरान भी आलोक तोमर की कलम रूकी नहीं थी. वे लगातार लिख रहे थे. अपने घातक कैंसर के बारे में जानने के बाद भी वह वे कहीं से विचलित नहीं थे. बार-बार कहते थे कि मेरा नहीं कैंसर का इलाज चल रहा है. देखते हैं वो अपने को मेरी काया से कैसे बचा पाता है. वे इतने निडर थे कि उन्‍होंने काल से भी होड़ ले रखी थी.

नीचे उनके खुद के हाथों से ग्‍यारह फरवरी को लिखी गई एक कविता को सत्‍ताचक्र ब्‍लॉग से साभार लेकर प्रकाशित कर रहे हैं.

कविता

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Comments on “काल तुझसे होड़ है मेरी

  • pankaj yadav says:

    alok tomer jaan dal gaye is kavita ke madhyam se un lekhko aur patrkaro me jo avi kisi na kisi pareshani ke kaarn apne kalam ko rokna chah rahe the…

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