क्या चिदंबरम ने मित्तल-अंबानी के कारण नीरा का फोन टेप कराया?

2-जी स्पेक्ट्रम महाघोटाले का जाल अब कांग्रेस के गले के चारों तरफ भी लिपटने लगा है। परेशान कांग्रेसी अब यह पता लगाने लगे हैं कि क्या  तत्कालीन वित्त मंत्री पी.चिदम्बरम ने सुनील मित्तल के किये या किसी से कराई शिकायत को आधार बनाकर नीरा राडिया की फोन टेपिंग के आदेश दिलवाये! कहा जाता है कि पी.चिदम्बरम की भारती एअरटेल  कम्पनी  के विवादास्पद मालिक सुनील मित्तल से बहुत घनिष्ठता है। चिदम्बरम के बारे में यह भी चर्चा है कि वह सुनील मित्तल आदि की जीएसएम कम्पनियों की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में मोटी फीस पर वकील भी रहे हैं।

जब टाटा ने अपनी कम्पनियों के खिलाफ की जा रही लाबिंग की काट के लिए लाबिस्ट नीरा राडिया व उसकी कम्पनी वैष्णवी को लगभग 60 + 20  करोड़ रुपये सालाना का ठेका दिया  और नीरा राडिया ने अपने क्लाइंट रतन टाटा के लिए हर स्तर पर जोरदार लाबिंग शुरू की तो सुनील मित्तल की कम्पनी को परेशानी होने लगी। कहा जाता है कि उसी के बाद नीरा राडिया के खिलाफ वित्त मंत्रालय में लिखित शिकायत पहुंचती है। सोनिया गांधी की यूपीए-2 की मनमोहनी सरकार ने नीरा राडिया फोन टेपिंग मामले में रतन टाटा की यचिका पर  सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय में 10 दिसम्बर 2010 को जो हलफाना दिया है उसके मुताबिक-नीरा राडिया के फोन टेप करने के आदेश इनकम टैक्स के डायरेक्टरेट जनरल ने दिया था।

यह आदेश 16 नवंबर 2007 को वित्त मंत्रालय को मिली उस शिकायत के बाद दिया गया जिसमें आरोप लगाया गया था कि नीरा राडिया ने नौ साल की छोटी सी अवधि में 300 करोड़ रुपए का साम्राज्य खड़ा कर लिया। शिकायत में यह भी कहा गया था कि नीरा राडिया विदेशी खुफिया एजेंसियों की एजेंट हैं और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में शामिल रही हैं।
मालूम हो कि 2007 तक मुकेश अंबानी ने अपनी कम्पनियों की लाबिंग का ठेका भी लगभग 60 करोड़ रु. सालाना पर नीरा राडिया व उसकी  कम्पनी वैष्णवी को दे दिया था। तब कम्पनियों के बंटवारे के घमासान के बाद अनिल अंबानी और मुकेश अंबानी के बीच गैस के बंटवारे को लेकर घमासान छिड़ा हुआ था। सो चर्चा है कि है कि नीरा राडिया इसके चलते  अनिल अंबानी और उनके लाबिस्ट टोनी जसुदासन की आंखों की भी किरकिरी बन गई।

कहा जाता है कि इधर से भी नीरा राडिया के खिलाफ शिकायत कराई गई होगी। लेकिन शिकायत चाहे जिसने भी की हो, उस शिकायत को आधार बनाकर नीरा राडिया का फोन टेपिंग तो पी.चिदम्बरम के वित्त मंत्री रहते ही हुआ। सोनिया गांधी की यूपीए-1 की मनमोहनी सरकार में  22 मई 2009 तक पी.चिदम्बरम वित्त मंत्री थे। 23 मई 2009 से प्रणव मुखर्जी वित्त मंत्री हैं। 23 मई 2009 को पी.चिदम्बरम को वित्त मंत्री पद से हटाकर गृह मंत्री बनाया गया। खुफिया एजेंसी आई.बी. इसी गृह मंत्रालय के अधीन है। कहा जाता है कि पी. चिदम्बरम ने गृह मंत्री बनने के बाद नीरा राडिया फोन टेपिंग मामले में आई.बी. को सक्रिय कर दिया।  सुप्रीम कोर्ट में सोनिया की  मनमोहनी सरकार ने जो हलफनामा दिया है उसमें नीरा राडिया का फोन टेप कराने की जो दलील दी है उसका तिथिवार फाइल व फोन टेपिंग आदेश आई.बी. को आदेश आदि का व्यौरा देखने पर काफी कुछ स्पष्ट हो जाता है कि किस मंत्री की अति सक्रियता के कारण नीरा राडिया का फोन टेप हुआ है।

लेखक कृष्णमोहन सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं.

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