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क्या पंजाब सरकार चला रही है दैनिक जागरण को?

[caption id="attachment_18314" align="alignnone" width="505"]पंजाब में दैनिक जागरण की पत्रकारिता पर उठने लगा सवालपंजाब में दैनिक जागरण की पत्रकारिता पर उठने लगा सवाल[/caption]


: जागरण की एकतरफा रिपोर्टिंग से पंजाब के मीडिया वाले हतप्रभ : जागरण को भले ही सरोकारों की कोई परवाह न हो लेकिन उसे याद रखना चाहिए कि पंजाब में अधिकतर पाठक एक से ज्यादा अख़बार पढ़ रहे हैं और ऐसे में जागरण की विश्वसनीयता खतरे में है क्योंकि यह पब्लिक है यह सब जानती है : देश में सबसे ज्यादा पढे जाने वाला अख़बार होने का दावा करने वाला दैनिक जागरण यूं तो अपने कुकृत्यों के लिए पहले ही काफी बदनाम है लेकिन हाल ही के दिनों में पंजाब में उप मुख्यमंत्री सुखबीर बादल के दबाव में इसने जिस किस्म की पत्रकारिता की है, उसके कारण उसकी हर ओर थू थू हो रही है.

पंजाब में दैनिक जागरण की पत्रकारिता पर उठने लगा सवाल

पंजाब में दैनिक जागरण की पत्रकारिता पर उठने लगा सवाल


: जागरण की एकतरफा रिपोर्टिंग से पंजाब के मीडिया वाले हतप्रभ : जागरण को भले ही सरोकारों की कोई परवाह न हो लेकिन उसे याद रखना चाहिए कि पंजाब में अधिकतर पाठक एक से ज्यादा अख़बार पढ़ रहे हैं और ऐसे में जागरण की विश्वसनीयता खतरे में है क्योंकि यह पब्लिक है यह सब जानती है : देश में सबसे ज्यादा पढे जाने वाला अख़बार होने का दावा करने वाला दैनिक जागरण यूं तो अपने कुकृत्यों के लिए पहले ही काफी बदनाम है लेकिन हाल ही के दिनों में पंजाब में उप मुख्यमंत्री सुखबीर बादल के दबाव में इसने जिस किस्म की पत्रकारिता की है, उसके कारण उसकी हर ओर थू थू हो रही है.

वित्त मंत्री मनप्रीत बादल द्वारा राज्य के कर्ज को केंद्र से खत्म करवाए जाने सम्बन्धी लिए गए कदम के बाद दैनिक जागरण ने उप मुख्मंत्री सुखबीर बादल के दबाव में जिस तरह एकतरफा रिपोर्टिंग कर रहा है, उससे यह सवाल उठने लगा है कि क्या पंजाब में दैनिक जागरण उप मुख्यमंत्री सुखबीर बादल के हाथ की कठपुतली बन कर रह गया है? मनप्रीत बदल प्रकरण से तो कम से कम यही बात साबित होती है. इस पूरे प्रकरण पर इस अखबार ने अब तक एकतरफ़ा रिपोर्टिंग ही की है. वैसे भी दैनिक जागरण सुखबीर और उनकी पत्नी की प्रमोट करने के लिए समय समय पर पहले पन्ने पर ऐसी स्टोरी करता रहता है जो आखिरी पेज के लायक भी नहीं होती लेकिन इस पूरे मामले में तो जागरण पूरी तरह से नंगा हो गया है. मैं यहाँ पंजाब के समाचार पत्रों में छपी कुछ खबरों के हेडलाईंस दे रहा हूं जिसे देख कर आप समझ जायेंगे कि कैसे जागरण एकतरफा रिपोर्टिंग कर रहा है.

रविवार को पूर्व वित्तमंत्री गुरदासपुर के कहनुवान स्थिति गुरूद्वारे में एक मीटिंग करने वाले थे लेकिन पुलिस ने उप-मुख्मंत्री सुखबीर बादल के इशारे पर उस गुरूद्वारे के दरवाजे पर ताला लटका दिया. यह खबर आज पंजाब के सारे हिंदी-अंग्रेजी अखबारों में सुर्खी है लेकिन दैनिक जागरण ने इस खबर को तवज्जो देने की बजाय पहले पन्ने पर उप मुख्यमंत्री सुखबीर बादल का बयान छापा कि मनप्रीत की गतिविधियों से अकाली दल को खतरा नहीं. मनप्रीत की खबर अन्दर के पन्ने पर छपी जिसकी सुर्खी है “पुराने स्टैंड पर कायम मनप्रीत”. अब ज़रा बाकी अखबारों की सुर्खी पर भी गौर फरमाएं. दैनिक भास्कर ने सोमवार को लिखा  “मनप्रीत बादल के लिए गुरूद्वारे में लगाये ताले “. अख़बार ने पहले पन्ने पर मनप्रीत का बयान छापा “पंजाब में लोकतंत्र की हत्या शुरू”.

पंजाब केसरी ने इसे पहली सुर्खी बनाया और सब पक्षों को पहले पन्ने पर जगह दी. “अकाली राजनीती में घमासान तेज”. ”पंजाब में पाकिस्तान की तरह तानाशाही-मनप्रीत” एक अन्य सुर्खी- ”मनप्रीत को गुरूद्वारे जाने से रोका” ”अकाली दल को तोड़ने की कोशिश सफल नहीं होने देंगे-सुखबीर” Tribune Headline on Front page- ”Manpreet Blames govt for blocking his public rally” Hindustan times page 3 headline- ”Manpreet, Man Locked Out””Minister Sekhva supporter back by Police Locked Kahnuvaan gurudwara” Express writes on Punjab Page- ”Manpreet not allowed to hold Public Meetinig”

दैनिक जागरण की रविवार की सुर्खी है- ”हलके पर पकड़ साबित करने में नाकाम रहे मनप्रीत” दैनिक भास्कर ने लिखा- ”मनप्रीत ने माँगा इन्साफ, समर्थकों की भीड़ ने सुखबीर को दी चुनौती.” पंजाब केसरी की सुर्खी है- ”गाँव छातेआना में बुलाई मीटिंग ने लिया विशाल रैली का रूप” इंडियन एक्सप्रेस ने लिखा-  ”Manpreet gets thumping support at Gidarhbaha.” Tribune Headline-  “manpreet draws Crowd but No Leader.” यहाँ तक की अकाली समझे जाते सबसे बड़े पंजाबी अख़बार ‘अजीत’ ने भी इतनी एकतरफ़ा रिपोर्टिंग नहीं की. यह अखबार लिखता है- ”पंजाब को कंगाली से बचाने के लिए मनप्रीत ने माँगा सहयोग, गुरुद्वारा में हुयी विशाल एकता.” पूरा इंगलिश मीडिया पहले दिन से इस मामले में मनप्रीत के साथ खड़ा है लेकिन शायद जागरण इकलौता ऐसा अख़बार है जो एकतरफ़ा रिपोर्टिंग कर रहा है.

दैनिक जागरण ने 14 अक्टूबर को लिखा “पार्टी और परिवार से बागी हुए मनप्रीत, मंत्रिमंडल से छुटी.” साथ ही सुखबीर का बयान भी छापा- ”पार्टी का मसला है, पार्टी ने कार्रवाई की.” मनप्रीत ने इसी दिन चंडीगढ़ में मीडिया को कर्ज संबंधी केंद्र से चल रही उनकी बातचीत के दस्तावेज भी मुहैया करवाए थे जिसे बाकी अखबारों ने तो छापा लेकिन दैनिक जागरण को शायद यह पसंद नहीं आया. भास्कर ने उसी दिन लिखा  “मनप्रीत मंत्रिमंडल से बर्खास्त, पार्टी में विरोधियों से आहत वित्त मंत्री ने भेजा था इस्तीफ़ा.” साथ ही एक बाक्स भी है- ”दस्तावेज पेश कर बतायी हकीकत.” पंजाब केसरी की खबर भी हूबहू यही थी. दोनों अखबारों ने सुखबीर का बयान भी साथ छापा की कोई पार्टी से उपर नहीं है. उसी दिन हिंदुस्तान टाईम्स ने लिखा-  “Manpreet walks out of SAD Govt,4 in Tow. Page 2 Headline- Manpreet shows papers for Proof. Tribune writes on Page 5- ”Badal Sacks a Defiant Manpreet.;; Page 5 headline- “manpreet Releases Center Offer Letter.” Indian Express Headline- ”Manpreet expelled from Sukhbeer akali Dal.”

यह सिर्फ बानगी भर है. दैनिक जागरण ने मनप्रीत द्वारा मुहैया करवाए गए केंद्र के दस्तावेजों के आधार पर पहले पन्ने पर स्टोरी की “पंजाब में सिर्फ 3500 करोड़ का कर्ज.” इसमें मनप्रीत को झुठलाने की कोशिश की गयी. यह सुर्खियाँ तो सिर्फ बानगी भर है. दैनिक जागरण लम्बे समय से उप-मुख्यमंत्री सुखबीर बादल की चापलूसी करता आया है और हर महीने दैनिक जागरण में सुखबीर और उनकी पत्नी हरसिमरत कौर के बारे में पहले पन्ने पर कई ऐसी स्टोरी प्रकाशित होती हैं जिन्हें कोई अच्छा सम्पाक अन्दर के पन्ने पर भी जगह न दे. अब सवाल यह है कि क्या दैनिक जागरण पंजाब में सुखबीर बादल के हाथ की कठपुतली बन गया है. क्या पंजाब सरकार चला रही है दैनिक जागरण को? क्या लोकतंत्र से अखबार का कोई वास्ता नहीं है? क्या दैनिक जागरण ने पेड न्यूज के कारोबार को चरम पर पहुंचाने का ठान लिया है? जब सारे अखबार निष्पक्ष पत्रकारिता कर रहे हैं तो जागरण सुखबीर के तलवे क्यों चाट रहा है ? जागरण को भले ही सरोकारों की कोई परवाह न हो लेकिन उसे याद रखना चाहिए कि पंजाब में अधिकतर पाठक एक से ज्यादा अख़बार पढ़ रहे हैं और ऐसे में जागरण की विश्वसनीयता खतरे में है क्योंकि यह पब्लिक है यह सब जानती है.

चंडीगढ़ से एक वरिष्ठ पत्रकार की रिपोर्ट. उन्होंने अपना नाम न छापने का अनुरोध किया है.

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0 Comments

  1. Imran

    October 18, 2010 at 9:30 pm

    good, very good job….

  2. kabir

    October 18, 2010 at 11:44 pm

    jis akhbar me steno colummnist ho aur political editor railway canteen ka theka le raha ho waha aur kya hoga.

  3. rishi naagar

    October 19, 2010 at 1:48 am

    Nishikant ko badhai! chandigarh me pahle chahal ka gungaan hota tha ab sukhbir ka hota hai…thaali ka bengan! jalandhar me gadha news editor hai…chitfund wala chief reporter…bhikhmanga chandigarh bureau hai…kaya kar loge aap!

  4. somveer bhiwani

    October 19, 2010 at 4:05 pm

    news paper nahi pamplet ho gaye hai news paper

  5. punjabkasach

    October 19, 2010 at 8:44 pm

    very very good news
    दैनिक जागरण पंजाब में सुखबीर बादल के हाथ की कठपुतली बन गया है.

  6. sandeep sharma

    October 19, 2010 at 11:29 pm

    Dainik Jagran pehle sirf criminal businessmen ko kagzi hero banaata tha(remember sheetal vij), ab politicians ka dost ban gaya hai. subah ki akhbaar ko shaam ki raddi kahaa jata tha lekin inhone to subah subah raddi bantani shuru kar di hai. shame on you- World’s most read raddi (newspaper).

  7. abc

    October 28, 2010 at 8:58 pm

    Dusro ko dekh kar kuch logo ko khujli honay ki aadat hoti hai……….

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